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INDIA गठबंधन का बड़ा एलान: चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और बैलेट पेपर की मांग को लेकर 2 अक्टूबर से ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च

चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और बैलेट पेपर की मांग को लेकर INDIA गठबंधन का लोकतंत्र बचाओ मार्च - News Critic

नई दिल्ली में हुई INDIA गठबंधन की बैठक के बाद विपक्षी दलों ने देशव्यापी आंदोलन का एलान किया है। लोकतंत्र बचाओ मार्च 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक जिला स्तर पर निकाला जाएगा।

इस अभियान में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे उठाए जाएंगे। विपक्षी दलों ने ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी दोहराई है।

2 अक्टूबर से शुरू होगा लोकतंत्र बचाओ मार्च

INDIA गठबंधन के नेताओं की बैठक 30 सितंबर को नई दिल्ली में हुई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में हुई इस बैठक में 19 विपक्षी दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया।

बैठक के बाद साझा आंदोलन की योजना सामने रखी गई। इसके तहत 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक अलग-अलग जिलों में मार्च और प्रदर्शन होंगे।

इन कार्यक्रमों का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनाव प्रक्रिया रहेगा। विपक्षी दलों ने नागरिक समाज और युवाओं को भी अभियान से जोड़ने की बात कही है।

जिलों से दिल्ली तक होगा प्रदर्शन

विपक्षी दलों के अनुसार, जिला स्तर पर प्रदर्शन जिलाधिकारी कार्यालयों के आसपास किए जाएंगे। इसके अलावा 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसद चुनाव आयोग के मुख्यालय तक मार्च निकालेंगे।

इस तरह आंदोलन को स्थानीय स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने की योजना बनाई गई है। वहीं, अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में विपक्षी नेता राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात का समय भी मांगेंगे।

मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग

INDIA गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई है। विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं।

इन दलों का आरोप है कि मतदाता सूचियों में बदलाव और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर पारदर्शिता से जुड़े सवाल हैं। हालांकि, ये विपक्षी दलों के आरोप हैं। इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

वहीं, चुनाव आयोग ने अपने कदमों का बचाव किया है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव कानून और निर्धारित प्रक्रिया के तहत किए जा रहे हैं। इसलिए इस पूरे विवाद में विपक्ष के आरोप और आयोग का पक्ष अलग-अलग समझना जरूरी है।

बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग

बैठक में विपक्षी दलों ने ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी दोहराई। यह मांग पिछले कुछ समय से विपक्ष की चुनावी बहस का हिस्सा रही है।

INDIA गठबंधन का कहना है कि आगामी चुनावों में मतपत्र के जरिए मतदान कराया जाना चाहिए। इस मांग को गठबंधन की साझा कार्ययोजना में शामिल किया गया है।

हालांकि, मौजूदा चुनाव व्यवस्था में भारत में ईवीएम का इस्तेमाल होता है। बैलेट पेपर की मांग विपक्षी दलों की राजनीतिक मांग है। इसलिए इसे वर्तमान चुनाव प्रक्रिया में लागू बदलाव के रूप में नहीं देखा जा सकता।

SIR को लेकर क्या है विवाद?

इस पूरे राजनीतिक विवाद में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR भी प्रमुख मुद्दा है। चुनाव आयोग मतदाता सूची की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया चला रहा है।

विपक्षी दलों का कहना है कि इस प्रक्रिया से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, विपक्ष ने मतदाता सूची में कथित बदलावों को लेकर चिंता जताई है।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में बदलाव को कानूनी प्रक्रिया से जोड़ा है। आयोग ने सत्यापन और दस्तावेजों से जुड़ी प्रक्रियाओं में भी बदलाव किए हैं। ऐसे में SIR को लेकर विवाद अभी राजनीतिक और संस्थागत दोनों स्तरों पर जारी है।

INDIA गठबंधन ने बनाई लंबी आंदोलन योजना

यह आंदोलन केवल 2 अक्टूबर तक सीमित नहीं रहेगा। गठबंधन ने अक्टूबर और नवंबर में पांच बड़ी रैलियां करने की भी योजना बनाई है।

इन रैलियों की तारीख और स्थान बाद में तय किए जाएंगे। इसके अलावा 1 नवंबर को दिल्ली में बड़ी रैली आयोजित करने की योजना बताई गई है।

इससे साफ है कि विपक्ष चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लंबे अभियान में बदलने की तैयारी कर रहा है। वहीं, आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए इन मुद्दों पर राजनीतिक बहस और बढ़ सकती है।

राहुल गांधी और खड़गे ने क्या कहा?

बैठक के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्षी दलों की साझा रणनीति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि गठबंधन के सभी दल इस मुद्दे पर साथ मिलकर अभियान चलाएंगे।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी चुनाव प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र किसी एक व्यक्ति से बड़ा है और विपक्ष इस मुद्दे पर मिलकर आगे बढ़ेगा।

वहीं, अलग-अलग विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग और मतदाता सूची को लेकर अपने आरोप भी लगाए। इन बयानों में राजनीतिक आरोप और मांगें शामिल हैं, जिन पर संबंधित पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं।

विपक्षी सांसद 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग जाएंगे

लोकतंत्र बचाओ मार्च का अगला बड़ा चरण 6 अक्टूबर को होगा। इस दिन विपक्षी सांसद चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च करेंगे।

इस मार्च का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को सीधे चुनाव आयोग के सामने उठाना है। विपक्षी नेताओं ने इस कार्यक्रम को अपने राष्ट्रव्यापी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है।

इसके बाद राष्ट्रपति से मुलाकात की योजना भी है। विपक्षी नेता अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में राष्ट्रपति के सामने अपनी मांगें और चिंताएं रखने की कोशिश करेंगे।

चुनाव आयोग का पक्ष भी समझना जरूरी

इस विवाद में चुनाव आयोग का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। आयोग ने मतदाता सूची से जुड़े अपने कदमों को कानूनी प्रक्रिया के तहत बताया है।

Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, आयोग ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि मतदाता सूची में बदलाव निर्धारित नियमों के तहत किए जा रहे हैं। आयोग ने सत्यापन प्रक्रिया को लेकर कुछ प्रक्रियात्मक बदलाव भी किए हैं।

इसलिए फिलहाल विवाद का एक हिस्सा राजनीतिक आरोपों पर आधारित है। वहीं, मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े प्रशासनिक कदम अलग विषय हैं। दोनों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

आने वाले दिनों में बढ़ेगी राजनीतिक हलचल

INDIA गठबंधन के इस अभियान से चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है। 2 से 8 अक्टूबर तक होने वाले कार्यक्रमों में स्थानीय स्तर पर भी विपक्षी दल सक्रिय होंगे।

इसके बाद 6 अक्टूबर का चुनाव आयोग मार्च और राष्ट्रपति से प्रस्तावित मुलाकात आगे की रणनीति का हिस्सा होगी। साथ ही पांच बड़ी रैलियों की योजना भी बनाई गई है।

वहीं, सरकार और चुनाव आयोग की ओर से आने वाले जवाब इस विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल विपक्ष अपने आरोपों और मांगों को देशभर में उठाने की तैयारी में है।

क्या है INDIA गठबंधन की प्रमुख मांग?

बैठक और बाद की घोषणाओं से सामने आए प्रमुख मुद्दे इस प्रकार हैं:

  • मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग।
  • मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग।
  • SIR प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता की मांग।
  • ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग।
  • चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों की चिंताओं पर कार्रवाई।
  • देशभर में आंदोलन और रैलियों के जरिए मुद्दे को उठाना।

इन मांगों को लेकर विपक्षी दलों ने संयुक्त अभियान शुरू करने का फैसला किया है। हालांकि, इन मांगों पर चुनाव आयोग और सरकार का पक्ष अलग है।

आगे क्या होगा?

अब 2 अक्टूबर से जिला स्तर पर लोकतंत्र बचाओ मार्च शुरू होगा। इसके बाद 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसद चुनाव आयोग की ओर मार्च करेंगे।

अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में राष्ट्रपति से मुलाकात की कोशिश होगी। वहीं, अक्टूबर और नवंबर में पांच बड़ी रैलियों की योजना है। 1 नवंबर को दिल्ली में बड़ी रैली का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है।

इस पूरे अभियान के दौरान मतदाता सूची, SIR, ईवीएम और चुनाव आयोग की भूमिका जैसे मुद्दे केंद्र में रहेंगे। आगे की घटनाओं में संबंधित संस्थाओं और राजनीतिक दलों के जवाब भी महत्वपूर्ण होंगे।

निष्कर्ष

लोकतंत्र बचाओ मार्च के जरिए INDIA गठबंधन ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर देशव्यापी अभियान का एलान किया है। 2 से 8 अक्टूबर तक जिला स्तर पर प्रदर्शन होंगे। इसके बाद 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसद चुनाव आयोग तक मार्च करेंगे।

विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और बैलेट पेपर से चुनाव कराने जैसी मांगें रखी हैं। वहीं, चुनाव आयोग अपने मतदाता सूची संबंधी कदमों को कानूनी प्रक्रिया के तहत बता रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का प्रमुख हिस्सा बना रहेगा।

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