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एमपी में विजयादशमी पर शस्त्र पूजन आज, इंदौर में सीएम और जिलों में मंत्री करेंगे आयोजन

एमपी में विजयादशमी पर सीएम मोहन यादव द्वारा शस्त्र पूजन का दृश्य - News Critic

मध्य प्रदेश में आज, 20 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर शस्त्र पूजन के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इंदौर में मुख्य आयोजन में शामिल होकर शस्त्र पूजन करेंगे। वहीं, प्रदेश के अन्य जिलों में मंत्री और प्रशासनिक अधिकारी इस परंपरा को आगे बढ़ाएंगे।

राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी 55 जिलों में आयोजन की व्यवस्था की है। इनमें 31 जिलों में मंत्री और प्रमुख जनप्रतिनिधि कार्यक्रमों में शामिल होंगे। बाकी 24 जिलों में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक शस्त्र पूजन करेंगे। इस आयोजन के जरिए साहस, सुरक्षा, कर्तव्य और राष्ट्र रक्षा के प्रति सम्मान का संदेश दिया जाएगा।

एमपी में विजयादशमी पर शस्त्र पूजन का मुख्य कार्यक्रम

विजयादशमी के मौके पर मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेशव्यापी शस्त्र पूजन कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इंदौर की डीआरपी लाइन में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री दोपहर 12 बजे शस्त्र पूजन करेंगे।

इस आयोजन में शस्त्रों के प्रति सम्मान और सुरक्षा बलों के कर्तव्य को महत्व दिया जाएगा। साथ ही, विजयादशमी की परंपरा के माध्यम से शक्ति के सदुपयोग का संदेश भी दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने शस्त्र पूजन को देश की सैन्य शक्ति, राष्ट्रीय सुरक्षा और स्वतंत्रता के प्रति सम्मान से जोड़ा है।

वहीं, अलग-अलग जिलों में होने वाले कार्यक्रमों की जिम्मेदारी पहले ही तय कर दी गई है। इससे प्रदेशभर में एक ही दिन सरकारी स्तर पर आयोजन किए जा सकेंगे। संबंधित जिलों के प्रशासन को कार्यक्रम की व्यवस्था और जरूरी तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

31 जिलों में मंत्री करेंगे शस्त्र पूजन

राज्य सरकार ने 31 जिलों में मंत्रियों और प्रमुख जनप्रतिनिधियों को शस्त्र पूजन कार्यक्रमों में शामिल होने की जिम्मेदारी सौंपी है। इन आयोजनों में मंत्रियों की मौजूदगी से सरकारी कार्यक्रमों को स्थानीय स्तर पर भी आयोजित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री इंदौर में रहेंगे, जबकि विधानसभा अध्यक्ष, उपमुख्यमंत्री और अन्य मंत्री अलग-अलग जिलों में पहुंचेंगे। प्रमुख कार्यक्रमों का विवरण इस प्रकार है:

  • इंदौर: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
  • ग्वालियर: विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर
  • मंदसौर: उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा
  • रीवा: उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल
  • भोपाल: मंत्री विश्वास कैलाश सारंग
  • धार: मंत्री कैलाश विजयवर्गीय
  • जबलपुर: मंत्री राकेश सिंह
  • नरसिंहपुर: मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल
  • सीहोर: मंत्री करण सिंह वर्मा
  • नर्मदापुरम: मंत्री उदय प्रताप सिंह
  • देवास: मंत्री तुलसीराम सिलावट
  • सागर: मंत्री गोविंद सिंह राजपूत
  • खंडवा: मंत्री कुंवर विजय शाह
  • मुरैना: मंत्री एदल सिंह कंषाना
  • मंडला: मंत्री संपतिया उइके

इसके अलावा, अन्य मंत्रियों और राज्यमंत्रियों को भी अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी दी गई है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में विजयादशमी की परंपरा का आयोजन किया जाएगा।

24 जिलों में कलेक्टर और एसपी संभालेंगे जिम्मेदारी

प्रदेश के सभी जिलों में शस्त्र पूजन कराने की योजना के तहत प्रशासनिक अधिकारियों को भी जिम्मेदारी दी गई है। जिन 24 जिलों में मंत्री कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे, वहां संबंधित जिले के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक शस्त्र पूजन करेंगे।

कलेक्टर और एसपी आयोजन की व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करेंगे। इसमें कार्यक्रम स्थल की तैयारी और आवश्यक प्रशासनिक समन्वय शामिल है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी कार्यक्रमों में आमंत्रित करने की व्यवस्था रखी गई है।

इसके साथ ही, आम नागरिकों से अपने घरों में शस्त्र पूजन करने की अपील भी की गई है। हालांकि, इस परंपरा का पालन करते समय सुरक्षा और कानून के नियमों का ध्यान रखना जरूरी है। किसी भी शस्त्र का इस्तेमाल केवल कानूनी और सुरक्षित तरीके से ही किया जाना चाहिए।

विजयादशमी पर शस्त्र पूजन क्यों होता है?

विजयादशमी को दशहरा भी कहा जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक माना जाता है। देश के कई हिस्सों में इस दिन शस्त्र पूजन की परंपरा भी निभाई जाती है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त की थी। इसी वजह से दशहरा साहस, धर्म और अन्याय के खिलाफ संघर्ष की याद दिलाता है। शस्त्र पूजन को भी इसी सांस्कृतिक संदर्भ में देखा जाता है।

हालांकि, शस्त्र पूजन का अर्थ केवल हथियारों की पूजा करना नहीं है। यह शक्ति के साथ जिम्मेदारी और अनुशासन के महत्व को भी दर्शाता है। परंपरा का संदेश है कि शक्ति का उपयोग सुरक्षा, न्याय और दूसरों की रक्षा के लिए होना चाहिए।

सेना और पुलिस की परंपरा से भी जुड़ा है आयोजन

शस्त्र पूजन की परंपरा भारतीय सेना और पुलिस सहित विभिन्न सुरक्षा बलों में भी देखने को मिलती है। दशहरे के अवसर पर शस्त्रों और उपकरणों के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है। इसका संबंध कर्तव्य, प्रशिक्षण और देश की सुरक्षा के संकल्प से है।

सुरक्षा बलों के लिए हथियार केवल उपकरण नहीं हैं। उनका इस्तेमाल तय नियमों और जिम्मेदारियों के अनुसार किया जाता है। इसलिए शस्त्र पूजन को कर्तव्य और अनुशासन की याद दिलाने वाली परंपरा के रूप में भी समझा जाता है।

इसी तरह, मध्य प्रदेश में आयोजित सरकारी कार्यक्रमों का उद्देश्य भी सुरक्षा और राष्ट्र रक्षा के प्रति सम्मान व्यक्त करना है। राज्य सरकार ने विजयादशमी के अवसर पर इस परंपरा को प्रदेशव्यापी रूप देने की व्यवस्था की है।

स्थानीय स्तर पर भी होंगे आयोजन

प्रदेश के विभिन्न जिलों में शस्त्र पूजन कार्यक्रम स्थानीय प्रशासन की देखरेख में आयोजित किए जाएंगे। संबंधित अधिकारी कार्यक्रमों की तैयारियों और व्यवस्थाओं पर ध्यान देंगे। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से इन आयोजनों को जिले के स्तर पर भी महत्व मिलेगा।

वहीं, नागरिक अपने घरों में भी परंपरा के अनुसार पूजा कर सकते हैं। कुछ परिवारों में कृषि उपकरणों, वाहनों और कामकाज में इस्तेमाल होने वाले औजारों की पूजा करने की परंपरा भी है। इन रीति-रिवाजों का स्वरूप परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकता है।

इसके अलावा, दशहरे पर कई स्थानों पर रावण दहन और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों के जरिए लोग परिवार और समुदाय के साथ त्योहार मनाते हैं। हालांकि, शस्त्र पूजन और रावण दहन अलग-अलग परंपराएं हैं, जिनका अपना सांस्कृतिक महत्व है।

प्रशासन की तैयारियां और आगे की प्रक्रिया

सरकार की ओर से निर्धारित कार्यक्रमों के लिए संबंधित जिलों के अधिकारियों को व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी दी गई है। कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक आयोजन के संचालन तथा जरूरी प्रशासनिक समन्वय पर ध्यान देंगे। कार्यक्रमों का संचालन तय योजना के अनुसार किया जाएगा।

वहीं, मंत्रियों की भागीदारी वाले जिलों में संबंधित जनप्रतिनिधि कार्यक्रमों में शामिल होंगे। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी से उन जिलों में भी आयोजन संभव होंगे, जहां मंत्री व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं रहेंगे।

फिलहाल, इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य विजयादशमी की परंपरा को सरकारी स्तर पर निभाना और सुरक्षा बलों के प्रति सम्मान व्यक्त करना है। कार्यक्रमों के दौरान स्थानीय व्यवस्थाओं और सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन महत्वपूर्ण रहेगा।

निष्कर्ष

मध्य प्रदेश में एमपी में विजयादशमी पर शस्त्र पूजन के कार्यक्रम आज, 20 अक्टूबर को प्रदेश के सभी 55 जिलों में आयोजित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इंदौर में दोपहर 12 बजे पूजा करेंगे। वहीं, 31 जिलों में मंत्री और 24 जिलों में कलेक्टर तथा पुलिस अधीक्षक आयोजन की जिम्मेदारी संभालेंगे।

विजयादशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा साहस, अनुशासन, सुरक्षा और कर्तव्य के प्रति सम्मान का संदेश देती है। इस अवसर पर प्रदेशभर में होने वाले कार्यक्रमों के जरिए इसी सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाया जाएगा।

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