संसद में NDA-कांग्रेस आमने-सामने, राहुल के झारखंड दौरे पर BJP का सवाल
संसद के मानसून सत्र में NDA कांग्रेस विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। झारखंड में छात्र आंदोलन और प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर मंगलवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसद संसद परिसर में आमने-सामने नजर आए। NDA सांसदों ने मार्च निकालकर कांग्रेस और राहुल गांधी पर सवाल उठाए।
भाजपा सांसदों ने पूछा कि जब झारखंड में छात्रों के साथ कथित तौर पर बल प्रयोग हुआ तो राहुल गांधी वहां क्यों नहीं गए। कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा कि राहुल गांधी झारखंड के छात्रों से मुलाकात कर चुके हैं और पार्टी इस मुद्दे को लगातार उठा रही है।
NDA कांग्रेस विवाद की वजह क्या है?
मंगलवार को संसद परिसर में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की ओर से प्रदर्शन हुआ। NDA सांसदों ने मकर द्वार तक मार्च निकाला और राहुल गांधी को निशाने पर लिया।
यह पूरा विवाद झारखंड में नौकरी की तैयारी कर रहे छात्रों के प्रदर्शन और उनके खिलाफ हुई कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़ा है। भाजपा का आरोप है कि झारखंड में कांग्रेस सत्ता गठबंधन का हिस्सा है, इसलिए उसे राज्य सरकार से जवाब मांगना चाहिए।
दूसरी ओर कांग्रेस का कहना है कि झारखंड की कानून-व्यवस्था राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती है। कांग्रेस सांसदों ने केंद्र और खासकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर जवाब मांगा है।
NDA सांसदों ने निकाला मार्च
संसद में मंगलवार सुबह NDA सांसदों ने मार्च निकाला। यह मार्च संसद की लाइब्रेरी बिल्डिंग से मकर द्वार तक गया।
प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने राहुल गांधी के खिलाफ नारे लगाए। NDA सांसदों का आरोप था कि विपक्ष छात्र आंदोलन के मुद्दे पर संसद में बहस चाहता है, लेकिन जब सरकार चर्चा और जवाब के लिए तैयार है तो विपक्ष कार्यवाही चलने नहीं दे रहा।
राहुल गांधी पर BJP ने क्या सवाल उठाए?
भाजपा ने राहुल गांधी से सीधे सवाल किया कि झारखंड में कांग्रेस सत्ता गठबंधन का हिस्सा है तो छात्रों पर कार्रवाई को लेकर उनकी जिम्मेदारी क्या है।
भाजपा प्रवक्ता और सांसद संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि अगर कार्रवाई राहुल गांधी के निर्देश पर हुई तो उन्हें जिम्मेदारी लेनी चाहिए और अगर ऐसा नहीं हुआ तो उन्हें अपनी पार्टी के राज्य सरकार में सहयोग को लेकर जवाब देना चाहिए।
भाजपा नेताओं ने यह भी कहा कि राहुल गांधी को झारखंड जाकर छात्रों से मिलना चाहिए। पार्टी ने संसद में गृह मंत्री अमित शाह के जवाब की पेशकश का हवाला देते हुए कहा कि विपक्ष को चर्चा में शामिल होना चाहिए।
अनुराग ठाकुर ने भी साधा निशाना
भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने झारखंड के छात्रों को न्याय दिलाने की मांग की। उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की सरकार पर छात्रों के खिलाफ कार्रवाई का आरोप लगाया।
ठाकुर ने सवाल उठाया कि यदि सरकार छात्रों के हित में काम कर रही है तो कार्रवाई के बाद जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की गई। उन्होंने राहुल गांधी की संसद में मौजूदगी और गृह मंत्री के जवाब को लेकर भी सवाल खड़े किए।
प्रियंका गांधी से भी पूछा गया सवाल
संसद परिसर में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी NDA सांसदों के सवालों के बीच घिरती नजर आईं। भाजपा सांसद मुकेश दलाल ने उनसे पूछा कि वह झारखंड के छात्रों के प्रदर्शन में क्यों नहीं गईं।
इस दौरान प्रियंका गांधी ने कहा कि कांग्रेस की ओर से नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी झारखंड के छात्रों से मुलाकात कर चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे से जुड़ी हुई है।
प्रियंका गांधी ने सत्ता पक्ष के सांसदों के संसद परिसर में प्रदर्शन को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहली बार सत्तारूढ़ दल के सांसदों को इस तरह प्रदर्शन करते देखा है।
कांग्रेस ने BJP के आरोपों पर क्या कहा?
कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि झारखंड में हुई घटना की जिम्मेदारी राज्य सरकार से जुड़ी है। पार्टी सांसद मणिक्कम टैगोर ने कहा कि राहुल गांधी झारखंड के मुख्यमंत्री या गृह मंत्री नहीं हैं।
कांग्रेस ने दिल्ली में छात्रों पर हुई कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब और जिम्मेदारी तय करने की मांग की। पार्टी का कहना है कि दिल्ली पुलिस केंद्र के अधीन आती है, इसलिए दिल्ली में हुई कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार को जवाब देना चाहिए।
इस तरह दोनों पक्षों ने अलग-अलग घटनाओं और अलग-अलग सरकारों की जवाबदेही को मुद्दा बनाया है। यही वजह है कि संसद में छात्र आंदोलन अब व्यापक राजनीतिक टकराव का विषय बन गया है।
अमित शाह के जवाब पर भी अटका विवाद
संसद में जारी गतिरोध का एक बड़ा कारण यह भी है कि विपक्ष केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर जवाब चाहता है।
सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि गृह मंत्री चर्चा के लिए तैयार हैं। NDA का दावा है कि विपक्ष ने ही पहले गृह मंत्री से जवाब की मांग की थी, लेकिन अब सरकार चर्चा के लिए तैयार है तो विपक्ष सदन नहीं चलने दे रहा।
कांग्रेस का कहना है कि उसकी मांग केवल एक बयान तक सीमित नहीं है। विपक्ष प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से जिम्मेदारी स्वीकार करने तथा माफी की मांग भी कर रहा है।
संसद की कार्यवाही पर असर
राजनीतिक टकराव का सीधा असर संसद की कार्यवाही पर पड़ा है। मंगलवार को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के बाद हंगामे के कारण इसे दोपहर 2 बजे तक स्थगित करना पड़ा।
इससे पहले भी मानसून सत्र में कई मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा टकराव देखने को मिला है। छात्र आंदोलन का मुद्दा अब इस टकराव में एक और प्रमुख विषय बन गया है।
झारखंड छात्र आंदोलन बना राजनीतिक मुद्दा
झारखंड में नौकरी और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े छात्रों का प्रदर्शन पिछले कुछ समय से राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। छात्रों की मांगों और प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष तथा सत्ता पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हुए हैं।
NDA इस मुद्दे को कांग्रेस के खिलाफ इसलिए भी उठा रहा है क्योंकि झारखंड में कांग्रेस सत्ता गठबंधन का हिस्सा है। भाजपा नेताओं का कहना है कि राज्य सरकार में शामिल दलों को छात्रों की शिकायतों का समाधान करना चाहिए।
कांग्रेस का तर्क है कि छात्र मुद्दे को राजनीतिक रंग देने के बजाय केंद्र और राज्य सरकारों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में जवाबदेही तय करनी चाहिए।
NDA की रणनीति में क्या बदलाव दिखा?
दिलचस्प बात यह है कि संसद परिसर में प्रदर्शन करने की रणनीति अब केवल विपक्ष तक सीमित नहीं रही। मंगलवार को NDA सांसद भी मार्च और नारेबाजी करते नजर आए।
इससे साफ है कि सरकार और विपक्ष दोनों संसद के बाहर भी अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। NDA ने अपने प्रदर्शन के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि वह विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के साथ-साथ विपक्ष से भी सवाल पूछ सकता है।
‘मंगल मिलन’ बैठक में बनी रणनीति
NDA सांसदों की साप्ताहिक ‘मंगल मिलन’ बैठक भी मंगलवार को हुई। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू समेत कई नेता मौजूद रहे।
बैठक के बाद NDA सांसदों ने संसद परिसर में मार्च किया। रिपोर्टों के मुताबिक बैठक में संसद की कार्यवाही सुचारू रखने और विपक्ष के विरोध का सामना करने की रणनीति पर चर्चा हुई।
राहुल गांधी के झारखंड दौरे पर क्यों उठे सवाल?
भाजपा का मुख्य सवाल यह है कि राहुल गांधी ने झारखंड में छात्रों के मुद्दे पर सीधे राज्य में जाकर हस्तक्षेप क्यों नहीं किया। भाजपा नेताओं ने उन्हें रांची जाने और छात्रों से मिलने की चुनौती भी दी।
वहीं कांग्रेस की ओर से यह कहा गया है कि राहुल गांधी पहले ही झारखंड के छात्रों से मुलाकात कर चुके हैं। इसलिए पार्टी का कहना है कि यह कहना सही नहीं है कि कांग्रेस इस मुद्दे से दूर है।
यही विरोधाभास अब NDA कांग्रेस विवाद का बड़ा हिस्सा बन गया है। एक पक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी और राज्य सरकार के साथ कांग्रेस के संबंध को मुद्दा बना रहा है, जबकि दूसरा पक्ष केंद्र की जिम्मेदारी पर सवाल उठा रहा है।
आगे क्या हो सकता है?
संसद के मौजूदा गतिरोध के बीच अब सबसे बड़ी चुनौती सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने की है। छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और केंद्र-राज्य की जवाबदेही जैसे मुद्दों पर दोनों पक्ष अपनी स्थिति से पीछे हटते नजर नहीं आ रहे हैं।
यदि सरकार और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बनती है तो आने वाले दिनों में भी संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी जारी रह सकती है। हालांकि, अंतिम स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष चर्चा के लिए किस तरह की सहमति बनाते हैं।
निष्कर्ष
संसद में NDA कांग्रेस विवाद ने मंगलवार को नया रूप ले लिया। झारखंड के छात्र आंदोलन को लेकर NDA सांसदों ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर सवाल उठाए, जबकि कांग्रेस ने केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगते हुए पलटवार किया।
भाजपा का कहना है कि झारखंड में कांग्रेस सत्ता गठबंधन का हिस्सा है, इसलिए उसे छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई की जिम्मेदारी पर जवाब देना चाहिए। कांग्रेस का तर्क है कि राज्य सरकार की कार्रवाई और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई अलग-अलग विषय हैं और केंद्र को दिल्ली से जुड़े मामले में जवाब देना चाहिए।
फिलहाल छात्र आंदोलन संसद में एक बड़े राजनीतिक मुद्दे में बदल चुका है। राहुल गांधी के झारखंड दौरे को लेकर भाजपा के सवाल और कांग्रेस के जवाब के बीच यह देखना अहम होगा कि सरकार और विपक्ष इस मुद्दे पर सदन में बहस के लिए सहमति बना पाते हैं या नहीं।

