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NEET-UG पेपर लीक के बाद NTA की सुरक्षा बढ़ाने की तैयारी, ₹7.5 करोड़ का टेंडर आज खुलेगा

NEET-UG पेपर लीक के बाद NTA की सुरक्षा बढ़ाने की तैयारी और 7.5 करोड़ का टेंडर - News Critic

NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले के बाद राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी यानी NTA ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। एजेंसी ने अपने मुख्यालय, क्षेत्रीय कार्यालयों और अन्य महत्वपूर्ण परिसरों की 24 घंटे सुरक्षा के लिए करीब 7.5 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया है।

इस टेंडर के तहत ऐसी पेशेवर सुरक्षा एजेंसी का चयन किया जाएगा, जो NTA के संवेदनशील दस्तावेजों, परीक्षा सामग्री, सर्वर रूम, स्ट्रॉन्ग रूम और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करेगी। टेंडर के लिए बोली जमा करने की अंतिम तारीख 17 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है।

NEET-UG पेपर लीक के बाद NTA का बड़ा कदम

NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक को लेकर पहले ही गंभीर सवाल उठ चुके हैं। केंद्र सरकार की शिकायत के आधार पर CBI ने मई 2026 में इस मामले में केस दर्ज किया था और जांच शुरू की थी।

CBI की जांच में परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र की जानकारी कुछ लोगों तक पहुंचने का आरोप सामने आया। जांच एजेंसी ने यह भी बताया था कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े एक व्यक्ति की कथित भूमिका मामले में सामने आई है।

ऐसे माहौल में NTA की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नया टेंडर जारी करना अहम माना जा रहा है। इसका उद्देश्य परीक्षा से जुड़े संवेदनशील रिकॉर्ड और परिसरों तक अनधिकृत पहुंच को रोकना है।

₹7.5 करोड़ का है सुरक्षा टेंडर

NTA की ओर से जारी टेंडर की अनुमानित कीमत करीब 7.5 करोड़ रुपये है। यह राशि GST को छोड़कर बताई गई है और शुरुआती अनुबंध दो साल के लिए रखा गया है।

प्रदर्शन के आधार पर इस अनुबंध को दो अतिरिक्त एक-एक साल की अवधि के लिए बढ़ाया जा सकता है। हालांकि NTA जरूरत के अनुसार सुरक्षा कर्मियों की संख्या या तैनाती में बदलाव कर सकता है।

टेंडर का मकसद केवल भवन की सामान्य सुरक्षा करना नहीं है। इसमें परीक्षा सामग्री और संवेदनशील रिकॉर्ड की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है।

किन जगहों पर बढ़ाई जाएगी सुरक्षा?

नए सुरक्षा प्रबंधों के तहत NTA के कई महत्वपूर्ण परिसरों को कवर किया जाएगा। इनमें दिल्ली के मिंटो रोड स्थित NTA मुख्यालय और ओखला स्थित क्षेत्रीय कार्यालय के साथ अन्य अधिसूचित स्थान शामिल हैं।

सुरक्षा एजेंसी को इन परिसरों में 24 घंटे निगरानी की व्यवस्था करनी होगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संवेदनशील क्षेत्रों में केवल अधिकृत व्यक्ति ही प्रवेश कर सकें।

NTA की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक सुरक्षा के दायरे में ये क्षेत्र शामिल हो सकते हैं:

  • परीक्षा से जुड़ी गोपनीय सामग्री रखने वाले स्थान
  • सर्वर रूम
  • स्ट्रॉन्ग रूम
  • रिकॉर्ड रूम
  • वेयरहाउस
  • संवेदनशील दस्तावेजों के भंडारण वाले परिसर
  • महत्वपूर्ण आईटी और अन्य बुनियादी ढांचा

सुरक्षा एजेंसी की क्या होगी जिम्मेदारी?

टेंडर जीतने वाली एजेंसी को NTA परिसरों में प्रवेश और निकास को नियंत्रित करना होगा। इसके अलावा प्रतिबंधित क्षेत्रों में अनधिकृत लोगों की पहुंच रोकना भी उसकी जिम्मेदारी होगी।

सुरक्षा कर्मियों को विजिटर रिकॉर्ड बनाए रखने और प्रवेश द्वारों पर आवश्यक सुरक्षा जांच करने का काम भी करना होगा। इसके लिए हैंड-हेल्ड और डोर-फ्रेम मेटल डिटेक्टर जैसी व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा सकता है।

सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी परीक्षा से जुड़े गोपनीय दस्तावेजों और संवेदनशील सामग्री की सुरक्षा होगी। सुरक्षा एजेंसी के कर्मचारियों को परीक्षा सामग्री और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी जानकारी की गोपनीयता बनाए रखनी होगी।

कंपनियों के लिए रखी गईं कड़ी शर्तें

NTA ने सुरक्षा एजेंसी के चयन के लिए कुछ कड़े मानदंड भी रखे हैं। टेंडर में भाग लेने वाली एजेंसी के पास पेशेवर सुरक्षा सेवाओं में कम से कम पांच साल का अनुभव होना जरूरी है।

इसके अलावा पिछले तीन वित्तीय वर्षों में औसत वार्षिक कारोबार कम से कम 10 करोड़ रुपये होना चाहिए। एजेंसी के पास हाई-सिक्योरिटी संस्थानों में काम करने का अनुभव भी अपेक्षित है।

ऐसे संस्थानों में केंद्र सरकार के संगठन, परीक्षा एजेंसियां, विश्वविद्यालय, एयरपोर्ट, अस्पताल और मेट्रो जैसी जगहें शामिल हो सकती हैं।

QCBS मॉडल से होगा एजेंसी का चयन

NTA ने सुरक्षा एजेंसी के चयन के लिए Quality and Cost Based Selection यानी QCBS मॉडल अपनाया है। इसमें केवल सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी को सीधे ठेका नहीं मिलेगा।

टेंडर प्रक्रिया में तकनीकी गुणवत्ता को 70 प्रतिशत और वित्तीय बोली को 30 प्रतिशत महत्व दिया जाएगा। तकनीकी मूल्यांकन में कम से कम 70 अंक हासिल करने वाली एजेंसियां ही वित्तीय चरण के लिए योग्य होंगी।

इससे संकेत मिलता है कि NTA सुरक्षा एजेंसी चुनते समय केवल कीमत पर निर्भर नहीं रहना चाहता, बल्कि अनुभव और तकनीकी क्षमता को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

₹15 लाख की EMD और 5 प्रतिशत सिक्योरिटी

टेंडर में शामिल होने वाली कंपनियों को 15 लाख रुपये की Earnest Money Deposit यानी EMD भी जमा करनी होगी। इसके अलावा चयनित एजेंसी को अनुबंध मूल्य का 5 प्रतिशत परफॉर्मेंस सिक्योरिटी के रूप में देना होगा।

इन शर्तों का उद्देश्य ऐसी एजेंसी का चयन करना है जो बड़े और संवेदनशील परीक्षा नेटवर्क की सुरक्षा संभालने में सक्षम हो।

NTA के सामने चुनौती केवल कार्यालयों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में प्रश्नपत्र और अन्य संवेदनशील सामग्री की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती है।

24 घंटे निगरानी से क्या बदलेगा?

नई व्यवस्था लागू होने के बाद NTA के महत्वपूर्ण परिसरों में सुरक्षा 24 घंटे उपलब्ध रहने की योजना है। इससे संवेदनशील क्षेत्रों में अनधिकृत प्रवेश और सुरक्षा उल्लंघन की आशंका कम करने में मदद मिल सकती है।

खास तौर पर सर्वर रूम, स्ट्रॉन्ग रूम और परीक्षा सामग्री रखने वाले स्थानों पर अतिरिक्त निगरानी महत्वपूर्ण होगी।

हालांकि केवल सुरक्षा गार्ड बढ़ाने से परीक्षा प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो सकती। प्रश्नपत्र की छपाई, पैकिंग, परिवहन, स्टोरेज और परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया में सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी होगा।

NEET-UG 2026 मामले में CBI जांच जारी

NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI पहले ही जांच शुरू कर चुकी है। गृह मंत्रालय के अधीन जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, शिकायत में परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र से जुड़े दस्तावेजों के अनधिकृत प्रसार का आरोप लगाया गया था।

इसके बाद CBI ने जांच में एक कथित किंगपिन की पहचान कर गिरफ्तारी की थी। जांच में आरोप लगाया गया कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े व्यक्ति के पास प्रश्नपत्रों तक पहुंच थी और उसने कुछ छात्रों को परीक्षा से पहले कथित तौर पर प्रश्नों की जानकारी दी।

यह जांच परीक्षा व्यवस्था की कमजोर कड़ियों को सामने लाने में महत्वपूर्ण हो सकती है।

छात्रों का भरोसा बहाल करना बड़ी चुनौती

NEET देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में से एक है। लाखों छात्र मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए इस परीक्षा पर निर्भर रहते हैं।

ऐसे में पेपर लीक या परीक्षा में गड़बड़ी की खबर केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहती। इसका सीधा असर छात्रों के भरोसे और पूरी परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर पड़ता है।

NTA की नई सुरक्षा व्यवस्था से उम्मीद है कि परीक्षा सामग्री और संवेदनशील रिकॉर्ड की सुरक्षा पहले से मजबूत होगी। हालांकि छात्रों का भरोसा पूरी तरह बहाल करने के लिए सुरक्षा के साथ पारदर्शिता और जवाबदेही भी जरूरी होगी।

NTA की वेबसाइट पर कई सुरक्षा टेंडर सक्रिय

NTA की आधिकारिक टेंडर सूची में सुरक्षा से जुड़े कई अन्य काम भी दिखाई देते हैं। इनमें NEET-UG के लिए CCTV, फ्रिस्किंग और फेस ऑथेंटिकेशन जैसी व्यवस्थाओं से जुड़े टेंडर भी शामिल हैं।

इससे साफ है कि परीक्षा सुरक्षा अब केवल भवन और दस्तावेजों की निगरानी तक सीमित नहीं है। परीक्षा केंद्रों पर उम्मीदवारों की पहचान, निगरानी और प्रवेश प्रक्रिया को भी तकनीक के जरिए मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

आज खुलेगा टेंडर, अब किस पर नजर?

17 अगस्त को टेंडर प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण पूरा होगा। इसके बाद योग्य कंपनियों की तकनीकी और वित्तीय बोली का मूल्यांकन किया जाएगा।

सबसे अहम बात यह होगी कि NTA किस एजेंसी को जिम्मेदारी देता है और नई सुरक्षा व्यवस्था कब से पूरी तरह लागू होती है। इसके साथ यह भी देखा जाएगा कि सुरक्षा उपायों का असर परीक्षा प्रक्रिया की गोपनीयता और विश्वसनीयता पर कितना पड़ता है।

निष्कर्ष

NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले के बाद NTA ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। करीब 7.5 करोड़ रुपये के टेंडर के जरिए मुख्यालय, क्षेत्रीय कार्यालयों और अन्य संवेदनशील परिसरों में 24 घंटे सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की तैयारी है।

नई व्यवस्था में परीक्षा सामग्री, सर्वर रूम, स्ट्रॉन्ग रूम, रिकॉर्ड रूम और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सुरक्षा एजेंसी के चयन में तकनीकी क्षमता और अनुभव को वित्तीय बोली से अधिक महत्व दिया गया है।

NEET-UG 2026 मामले की CBI जांच के बीच यह कदम परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब 17 अगस्त को टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद यह स्पष्ट होगा कि NTA अपनी नई सुरक्षा व्यवस्था को किस तरह लागू करता है और इससे भविष्य की परीक्षाओं में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने में कितनी मदद मिलती है।

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