रेलवे के पानी पर CAG का बड़ा खुलासा, 512 स्टेशनों की जांच में E. coli मिला
भारतीय रेलवे के स्टेशनों पर यात्रियों को मिलने वाले पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। CAG ने 512 गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों का ऑडिट किया, जिसमें कई जगह पानी और स्वच्छता व्यवस्था में खामियां मिलीं।
रिपोर्ट के मुताबिक, आठ रेलवे स्टेशनों के वाटर कूलर से लिए गए पानी के नमूनों में E. coli बैक्टीरिया मिला। हालांकि, उपलब्ध CAG रिपोर्ट में इन आठ स्टेशनों में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जोन का कोई स्टेशन सूचीबद्ध नहीं है। इसलिए बिलासपुर जोन के पानी को इस रिपोर्ट के आधार पर सबसे खराब बताना सही नहीं होगा।
512 रेलवे स्टेशनों का हुआ ऑडिट
CAG की रिपोर्ट का नाम ‘Passenger Amenities and Sanitation at Non-Suburban Railway Stations in Indian Railways’ है। इसमें देशभर के 512 गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की सुविधाओं, साफ-सफाई और पेयजल व्यवस्था का परीक्षण किया गया।
ऑडिट में 512 में से 458 स्टेशन यानी 89 प्रतिशत से ज्यादा स्टेशन न्यूनतम जरूरी यात्री सुविधाओं के निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें सुविधाओं की कमी से लेकर उनकी खराब स्थिति तक कई तरह की कमियां सामने आईं।
CAG ने पानी की गुणवत्ता को लेकर भी कई गंभीर खामियां दर्ज की हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि कुछ स्टेशनों पर निर्धारित तरीके से पानी की जांच ही नहीं की गई, जबकि कुछ जगहों के नमूनों में बैक्टीरिया की मौजूदगी मिली।
आठ स्टेशनों के वाटर कूलर में मिला E. coli
CAG की रिपोर्ट के अनुसार, आठ रेलवे स्टेशनों के वाटर कूलर से लिए गए पानी के नमूनों में E. coli पॉजिटिव पाया गया।
ये स्टेशन चार रेलवे जोन में शामिल हैं:
- दक्षिण रेलवे के कोयंबटूर और पलक्कड़ जंक्शन
- दक्षिण मध्य रेलवे का हैदराबाद स्टेशन
- मध्य रेलवे के CSMT, भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावला स्टेशन
- पूर्व रेलवे का मधुपुर स्टेशन
CAG की रिपोर्ट में इन स्टेशनों के नाम स्पष्ट रूप से दिए गए हैं। इनमें दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे यानी SECR के बिलासपुर जोन का कोई स्टेशन शामिल नहीं है।
इसलिए सोशल मीडिया या खबर की हेडलाइन में यदि बिलासपुर जोन के रेलवे पानी को सीधे तौर पर सबसे घटिया बताया जा रहा है, तो उसे CAG की मूल रिपोर्ट से मिलान करना जरूरी है।
E. coli मिलने का क्या मतलब है?
E. coli एक प्रकार का बैक्टीरिया है। इसके कुछ प्रकार इंसानों में बीमारी पैदा कर सकते हैं और दूषित पानी या भोजन के जरिए शरीर में पहुंचने पर दस्त, पेट की समस्या और फूड पॉइजनिंग जैसी परेशानियां हो सकती हैं। गंभीर मामलों में कुछ संक्रमण किडनी से जुड़ी जटिलताएं भी पैदा कर सकते हैं।
पीने के पानी में E. coli या अन्य फीकल इंडिकेटर बैक्टीरिया की मौजूदगी स्वच्छता और पानी की गुणवत्ता के लिहाज से गंभीर संकेत मानी जाती है। इसका मतलब है कि पानी की सप्लाई, स्टोरेज या आसपास की स्वच्छता व्यवस्था में कहीं समस्या हो सकती है।
हालांकि, किसी एक नमूने में बैक्टीरिया मिलने के आधार पर पूरे रेलवे जोन या पूरे स्टेशन की हर पानी की सप्लाई को दूषित घोषित नहीं किया जा सकता। इसके लिए नियमित और व्यापक परीक्षण जरूरी होते हैं।
प्लेटफॉर्म के नलों के पानी में भी बैक्टीरिया
CAG की जांच केवल वाटर कूलर तक सीमित नहीं थी। रिपोर्ट में प्लेटफॉर्म पर लगे नलों से लिए गए पानी के नमूनों के परिणामों का भी उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2022-23 में आठ रेलवे जोन के 49 स्टेशनों और 2023-24 में नौ जोन के 56 स्टेशनों से लिए गए पानी के नमूनों में Total Coliforms पाए गए। इन बैक्टीरिया में E. coli भी शामिल हो सकता है।
CAG ने पानी की गुणवत्ता से जुड़ी कई दूसरी कमियों का भी उल्लेख किया। इनमें क्लोरीन के स्तर में कमी या अधिकता और निर्धारित परीक्षण व्यवस्था का ठीक से पालन नहीं किया जाना शामिल है।
इन निष्कर्षों के आधार पर CAG ने रेलवे स्टेशनों पर उपलब्ध पीने के पानी की गुणवत्ता को असंतोषजनक बताया है।
59 स्टेशनों पर पानी की जांच ही नहीं हुई
ऑडिट में सिर्फ दूषित पानी ही चिंता का विषय नहीं रहा। CAG ने यह भी पाया कि छह रेलवे जोन के 59 स्टेशनों पर पीने के पानी का बैक्टीरियोलॉजिकल विश्लेषण ही नहीं कराया गया था।
रेलवे बोर्ड की ओर से पानी की नियमित जांच को लेकर प्रोटोकॉल मौजूद है। CAG के अनुसार, संबंधित स्वास्थ्य एवं चिकित्सा निरीक्षक को पानी की व्यवस्था का नियमित निरीक्षण करना चाहिए और तय प्रक्रिया के तहत बैक्टीरियोलॉजिकल टेस्ट भी कराया जाना चाहिए।
यदि नियमित जांच नहीं होती है, तो पानी की गुणवत्ता में होने वाली समस्या समय रहते सामने नहीं आ पाती। यही वजह है कि CAG ने निगरानी और परीक्षण व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया है।
458 स्टेशनों पर जरूरी सुविधाओं की कमी
CAG रिपोर्ट में रेलवे स्टेशनों की पानी व्यवस्था के अलावा यात्रियों के लिए उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
ऑडिट किए गए 512 स्टेशनों में 458 स्टेशन न्यूनतम आवश्यक सुविधाओं के मानकों में कमी वाले पाए गए। इसका मतलब है कि 89 प्रतिशत से अधिक ऑडिट किए गए स्टेशनों पर कम से कम एक जरूरी सुविधा या तो निर्धारित मानक के अनुसार उपलब्ध नहीं थी या उसकी स्थिति संतोषजनक नहीं थी।
रिपोर्ट में शौचालय, यूरिनल, पानी के नल और दूसरी यात्री सुविधाओं से संबंधित कमियां भी दर्ज की गई हैं।
रेलवे जैसे बड़े सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क में इन सुविधाओं का महत्व काफी ज्यादा है, क्योंकि रोजाना बड़ी संख्या में यात्री स्टेशनों पर कई घंटे बिताते हैं।
बिलासपुर जोन को लेकर क्या है स्थिति?
छत्तीसगढ़ का बिलासपुर रेलवे नेटवर्क दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) का हिस्सा है। बिलासपुर इस जोन का मुख्यालय भी है।
लेकिन CAG की उपलब्ध रिपोर्ट में जिन आठ स्टेशनों के वाटर कूलर में E. coli पाया गया, उनकी सूची में बिलासपुर जोन का नाम नहीं है। इसलिए इस रिपोर्ट के आधार पर यह दावा नहीं किया जा सकता कि बिलासपुर जोन का रेलवे पानी देश में सबसे खराब है।
हालांकि, इसका यह मतलब भी नहीं है कि बिलासपुर जोन में पानी की गुणवत्ता को लेकर किसी जांच की जरूरत नहीं है। रेलवे के सभी जोन में पेयजल की नियमित जांच और स्वच्छता व्यवस्था की निगरानी जरूरी है।
यदि बिलासपुर जोन के किसी खास स्टेशन के पानी से संबंधित अलग CAG या आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने आती है, तो उसके आधार पर स्थानीय स्तर पर स्थिति का आकलन किया जा सकता है।
रेलवे ने शुरू किए सुधारात्मक कदम
CAG की रिपोर्ट सामने आने के बाद रेलवे मंत्रालय ने सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने के लिए सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट में सामने आई कमियों को दूर करने और यात्रियों को बेहतर पानी उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
रेलवे की ओर से पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए ‘Tank to Tap’ जैसी व्यवस्था पर भी काम करने की जानकारी सामने आई है। इसका उद्देश्य पानी को टंकी से यात्रियों तक पहुंचने के दौरान सुरक्षित और स्वच्छ बनाए रखना है।
इस तरह की व्यवस्था के साथ नियमित सैंपलिंग, टंकियों की सफाई, पाइपलाइन की निगरानी और क्लोरीनेशन जैसे उपाय भी महत्वपूर्ण होंगे।
यात्रियों के लिए क्यों जरूरी है यह रिपोर्ट?
रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के लिए पीने का पानी एक बुनियादी सुविधा है। खासकर लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए स्टेशन का पानी महत्वपूर्ण हो सकता है।
ऐसे में पानी की गुणवत्ता से जुड़ी CAG की रिपोर्ट रेलवे के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी है। सिर्फ वाटर कूलर लगाने या नल उपलब्ध कराने से समस्या हल नहीं होती, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि वहां से मिलने वाला पानी निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरे।
इसके लिए नियमित जांच के परिणामों की निगरानी, खराब नमूने आने पर तत्काल सुधार और यात्रियों को सुरक्षित पानी उपलब्ध कराने की जवाबदेही जरूरी है।
निष्कर्ष
CAG की ताजा रिपोर्ट ने भारतीय रेलवे के कई स्टेशनों पर पेयजल और यात्री सुविधाओं की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। 512 गैर-उपनगरीय स्टेशनों के ऑडिट में 458 स्टेशन न्यूनतम आवश्यक सुविधाओं के मानकों में कमी वाले पाए गए, जबकि आठ स्टेशनों के वाटर कूलर के पानी में E. coli पाया गया।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि CAG की मूल रिपोर्ट में E. coli वाले आठ स्टेशनों में बिलासपुर या दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे का कोई स्टेशन शामिल नहीं है। इसलिए बिलासपुर जोन के पानी को इस रिपोर्ट के आधार पर ‘सबसे घटिया’ बताना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
फिर भी रिपोर्ट का व्यापक संदेश बेहद अहम है। रेलवे को पेयजल की नियमित जांच, साफ-सफाई, पाइपलाइन और टंकियों के रखरखाव तथा न्यूनतम यात्री सुविधाओं के मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना होगा, ताकि यात्रियों को सुरक्षित और स्वच्छ पानी मिल सके।

