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अमित शाह बोले- देश कोई धर्मशाला नहीं, घुसपैठिए सुरक्षा के लिए खतरा

"देश कोई धर्मशाला नहीं, यहां रहने का अधिकार सिर्फ नागरिकों को है और घुसपैठिए भारत की सुरक्षा के लिए खतरा हैं" — केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस कड़े बयान को दर्शाता News Critic का बैनर।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अवैध घुसपैठ को लेकर एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन में उन्होंने कहा कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है और देश में रहने का अधिकार नागरिकों को है।

शाह ने कहा कि घुसपैठिए देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और जनसांख्यिकीय संतुलन के लिए खतरा हैं। उन्होंने कम समय में भारत को घुसपैठ-मुक्त बनाने को सरकार का लक्ष्य बताया।

अमित शाह घुसपैठिए मुद्दे पर क्या बोले?

नई दिल्ली में इंटेलिजेंस ब्यूरो के राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए अमित शाह ने अवैध घुसपैठ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही। उन्होंने कहा कि देश में रहने की अनुमति कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होनी चाहिए।

गृह मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है। उनके मुताबिक, देश के नागरिकों को ही यहां रहने का अधिकार है और दूसरे लोगों को भारत में रहने के लिए वैध माध्यम से अनुमति लेनी होगी।

शाह ने यह भी कहा कि अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने वाले लोगों के खिलाफ अभियान आने वाले समय में सुरक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा।

घुसपैठ को तीन बड़े खतरों से जोड़ा

अमित शाह ने घुसपैठ को केवल सीमा सुरक्षा का मुद्दा नहीं बताया। उन्होंने इसे देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और जनसांख्यिकीय बदलाव से भी जोड़ा।

गृह मंत्री के अनुसार, अवैध घुसपैठ से आंतरिक सुरक्षा पर दबाव बढ़ सकता है। इसके साथ ही संसाधनों, रोजगार और स्थानीय प्रशासन से जुड़े सवाल भी पैदा हो सकते हैं।

हालांकि, किसी व्यक्ति की स्थिति का निर्धारण कानून और संबंधित जांच के आधार पर ही किया जाता है। इसलिए अवैध प्रवास और वैध विदेशी नागरिकों या शरणार्थियों के बीच अंतर करना भी जरूरी है।

देश को घुसपैठ-मुक्त बनाने का लक्ष्य

अमित शाह ने कहा कि पिछले आठ महीनों में गृह मंत्रालय ने सभी भूमि-सीमा वाले राज्यों का दौरा किया। इस दौरान राज्यों के साथ सीमा सुरक्षा के लिए चार आयामी दृष्टिकोण वाला दस्तावेज साझा किया गया।

सरकार का लक्ष्य बहुत कम समय में देश को घुसपैठ-मुक्त बनाना है। इसके लिए केंद्र और राज्य स्तर पर बेहतर समन्वय को महत्वपूर्ण बताया गया है।

शाह ने प्रत्येक राज्य में सीमा सुरक्षा से जुड़े मामलों के लिए वरिष्ठ स्तर के नोडल अधिकारी नियुक्त करने की बात भी कही। यह अधिकारी सुरक्षा एजेंसियों और राज्य प्रशासन के बीच समन्वय में अहम भूमिका निभाएंगे।

सीमा सुरक्षा पर चार स्तर की रणनीति

गृह मंत्री के अनुसार, सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच समन्वित व्यवस्था जरूरी है। सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों के साथ स्थानीय प्रशासन और संबंधित सरकारी विभागों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।

इस रणनीति का उद्देश्य अवैध प्रवेश के रास्तों की पहचान करना और सीमा पर निगरानी बढ़ाना है। साथ ही खुफिया जानकारी को समय पर साझा करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

सरकार का मानना है कि केवल सीमा पर सुरक्षा बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। देश के अंदर भी संदिग्ध नेटवर्क और अवैध गतिविधियों की पहचान जरूरी है।

राज्यों की भूमिका बढ़ेगी

घुसपैठ से निपटने में राज्य पुलिस और स्थानीय प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ बेहतर तालमेल पर जोर दिया है।

अमित शाह ने कहा कि हर राज्य में वरिष्ठ स्तर का नोडल अधिकारी होना चाहिए। इससे सीमा सुरक्षा से जुड़े मामलों में सूचनाओं और कार्रवाई के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सकेगा।

15 से 20 साल आगे की सुरक्षा रणनीति

राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन में अमित शाह ने अधिकारियों से आने वाले 15 से 20 वर्षों के सुरक्षा रुझानों पर नजर रखने को कहा। उन्होंने कहा कि किसी चुनौती के बड़ा संकट बनने से पहले ही उसकी पहचान कर लेनी चाहिए।

गृह मंत्री ने सुरक्षा एजेंसियों से भविष्य की चुनौतियों के लिए अभी से रणनीति तैयार करने का आह्वान किया। उनका जोर केवल मौजूदा समस्याओं पर कार्रवाई करने के बजाय संभावित खतरों को पहले पहचानने पर रहा।

इसमें सीमा सुरक्षा के साथ आतंकवाद, नशीले पदार्थ, साइबर अपराध और गलत सूचना जैसे मुद्दे भी शामिल हैं।

आतंकवाद के खिलाफ ‘प्रहार’ पर जोर

सम्मेलन में अमित शाह ने आतंकवाद के खिलाफ सरकार की नई रणनीति ‘प्रहार’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे केवल दस्तावेज तक सीमित रखने के बजाय रोजमर्रा की सुरक्षा व्यवस्था में लागू करने पर जोर दिया।

उन्होंने आतंकवादी नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने और उसके अलग-अलग हिस्सों पर एक साथ कार्रवाई की जरूरत बताई। इसमें आतंकियों के वित्तीय नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स और सहयोगी तंत्र को निशाना बनाना शामिल है।

शाह ने केंद्र और राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय को आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की अहम कड़ी बताया।

PFI कार्रवाई का भी दिया उदाहरण

गृह मंत्री ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी PFI के खिलाफ 2022 में हुई कार्रवाई को केंद्र और राज्य के बीच समन्वय का उदाहरण बताया। उनके अनुसार, विभिन्न राज्यों में एक साथ कार्रवाई के बाद संगठन पर प्रतिबंध लगाया गया और उसके नेटवर्क के खिलाफ कदम उठाए गए।

शाह ने कहा कि इसी तरह के समन्वय की जरूरत भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में भी होगी।

उनका जोर केंद्रीय एजेंसियों और राज्य पुलिस के बीच रियल टाइम जानकारी साझा करने पर भी रहा।

नशे के खिलाफ भी सरकार का फोकस

राष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन में नारकोटिक्स को लेकर भी रणनीति पर चर्चा हुई। अमित शाह ने राज्यों की पुलिस से Narcotics Control Vision Document 2026-2029 को जमीन पर लागू करने का आह्वान किया।

उन्होंने नशे के खिलाफ ‘तीन D’ यानी Detect, Disrupt और Destroy के आधार पर काम करने की बात कही।

सरकार का लक्ष्य नशीले पदार्थों के नेटवर्क को पहचानना, उसके संचालन को बाधित करना और पूरे नेटवर्क को खत्म करना है। इसे युवाओं और आंतरिक सुरक्षा से जोड़कर देखा गया है।

घुसपैठ और शरणार्थी में अंतर जरूरी

घुसपैठ के मुद्दे पर चर्चा करते समय अवैध प्रवासी और शरणार्थी के बीच अंतर महत्वपूर्ण है। गृह मंत्रालय पहले भी कह चुका है कि वैध प्रक्रिया के तहत आने वाले लोगों और अवैध तरीके से सीमा पार करने वालों को एक ही श्रेणी में नहीं रखा जाना चाहिए।

अमित शाह ने पहले भी कहा है कि धार्मिक उत्पीड़न के कारण आने वाले कुछ लोगों को शरणार्थी के रूप में देखा जाना चाहिए, जबकि अवैध तरीके से आर्थिक या अन्य कारणों से प्रवेश करने वालों को अलग श्रेणी में रखा जाता है।

इसलिए मौजूदा बहस का मुख्य केंद्र अवैध प्रवेश और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई है।

सुरक्षा के साथ जनसांख्यिकीय बदलाव की चिंता

अमित शाह ने घुसपैठ को जनसांख्यिकीय बदलाव से भी जोड़ा है। सरकार का तर्क है कि लंबे समय तक होने वाली अवैध आबादी की आवाजाही कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों की जनसंख्या संरचना पर असर डाल सकती है।

हालांकि, ऐसे दावों का आकलन क्षेत्रवार आधिकारिक आंकड़ों और जनगणना जैसे विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर किया जाना जरूरी है। केवल राजनीतिक बयान के आधार पर किसी क्षेत्र की जनसांख्यिकी के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

सुरक्षा एजेंसियों के बीच डेटा साझा करने पर जोर

सम्मेलन में सुरक्षा एजेंसियों के बीच डेटा साझा करने की व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। गृह मंत्रालय के अनुसार CCTNS, ICJS, NATGRID और NAFIS जैसे प्लेटफॉर्म के डेटा को एकीकृत किया गया है।

अधिकारियों से डेटा विश्लेषण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से संदिग्ध गतिविधियों और संभावित खतरों की पहचान करने को कहा गया है।

इसका उद्देश्य सुरक्षा एजेंसियों को घटना होने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले से खतरे की पहचान करने में सक्षम बनाना है।

भगोड़ों को वापस लाने पर भी सरकार का जोर

अमित शाह ने विदेशों में मौजूद भगोड़ों के खिलाफ भी कार्रवाई का उल्लेख किया। गृह मंत्रालय के अनुसार, 2019 से 2026 के बीच करीब 274 भगोड़ों को विदेश से भारत वापस लाया गया है।

उन्होंने राज्यों से भी विदेश में मौजूद आरोपियों और भगोड़ों को कानूनी प्रक्रिया के तहत भारत वापस लाने की दिशा में काम करने को कहा।

सरकार का कहना है कि विदेश में बैठकर भारत के खिलाफ अपराध या आर्थिक अपराध करने वालों को कानून से बचने नहीं दिया जाना चाहिए।

सरकार के सामने क्या हैं चुनौतियां?

घुसपैठ पर कार्रवाई के लिए केवल सीमा पर निगरानी बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। सीमा सुरक्षा बलों, राज्य पुलिस, खुफिया एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के बीच लगातार समन्वय जरूरी होगा।

इसके साथ यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कानूनी प्रक्रिया और नागरिक अधिकारों का पालन हो। संदिग्ध व्यक्ति और अवैध प्रवासी की पहचान उचित जांच और दस्तावेजों के आधार पर होनी चाहिए।

सरकार के लिए चुनौती सुरक्षा को मजबूत करने के साथ मानवीय और कानूनी पहलुओं के बीच संतुलन बनाए रखने की भी है।

आगे क्या होगा?

अमित शाह के बयान से साफ है कि अवैध घुसपैठ आने वाले समय में केंद्र की आंतरिक सुरक्षा नीति का महत्वपूर्ण मुद्दा रहेगा। केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर सीमा सुरक्षा और आंतरिक निगरानी की व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

इसके साथ आतंकवाद, नशीले पदार्थों और साइबर खतरों से निपटने के लिए भी संयुक्त रणनीति पर जोर दिया जा रहा है।

आने वाले समय में इस नीति का असर सीमा प्रबंधन, खुफिया जानकारी साझा करने और अवैध प्रवास से जुड़े मामलों की जांच पर दिखाई दे सकता है।

निष्कर्ष

अमित शाह घुसपैठिए मुद्दे पर सरकार का रुख एक बार फिर स्पष्ट हुआ है। गृह मंत्री ने कहा कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है और देश में रहने के लिए वैध अनुमति जरूरी है। उन्होंने अवैध घुसपैठ को सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और जनसांख्यिकीय स्थिरता के लिए चुनौती बताया।

सरकार का लक्ष्य कम समय में भारत को घुसपैठ-मुक्त बनाने का है। अब इस लक्ष्य को हासिल करने में केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय, मजबूत सीमा प्रबंधन, सटीक खुफिया जानकारी और कानून के अनुसार कार्रवाई सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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