BSP कबाड़ चोरी मामला: भिलाई स्टील प्लांट में ₹114 करोड़ के लोहा घोटाले की जांच करेगी CBI, साय सरकार ने जारी की अधिसूचना
भिलाई स्टील प्लांट से जुड़े कथित लोहा और कबाड़ चोरी मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI को सौंपने की मंजूरी दे दी है। सरकार ने 25 सितंबर 2026 को इस संबंध में अधिसूचना जारी की।
मामला पुरानी भिलाई थाना क्षेत्र में दर्ज अपराध क्रमांक 277/2026 से जुड़ा है। पुलिस की जांच में अब तक बड़ी मात्रा में स्क्रैप बरामद होने और कई लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। वहीं, कथित चोरी की कीमत करीब ₹114 करोड़ बताई जा रही है। हालांकि, वास्तविक नुकसान और पूरे नेटवर्क की स्थिति CBI की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
BSP कबाड़ चोरी मामला अब CBI के पास
भिलाई स्टील प्लांट यानी BSP से कथित तौर पर लोहा और स्क्रैप बाहर ले जाने का मामला मई 2026 में सामने आया था। इसके बाद पुरानी भिलाई पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
अब छत्तीसगढ़ सरकार ने केंद्रीय जांच एजेंसी को जांच की अनुमति दे दी है। 25 सितंबर को जारी अधिसूचना के तहत CBI को अपराध क्रमांक 277/2026 की जांच के लिए अधिकार क्षेत्र दिया गया है। यह मामला दुर्ग जिले के पुरानी भिलाई थाने में दर्ज है।
इस फैसले के बाद जांच का दायरा और बढ़ सकता है। CBI प्लांट से स्क्रैप निकालने के तरीके, इसमें शामिल लोगों और उससे जुड़े आर्थिक लेनदेन की भी जांच कर सकती है।
250 टन के करीब स्क्रैप बरामद होने के बाद खुला मामला
मामले की शुरुआत 26 मई 2026 को हुई बताई गई है। पुलिस को सूचना मिली थी कि भिलाई स्टील प्लांट से जुड़े फ्लू डस्ट परिवहन के दौरान वाहनों में कथित तौर पर लोहे का स्क्रैप ले जाया जा रहा है।
इसके बाद जांच और कार्रवाई में करीब 250 टन लौह स्क्रैप बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई। यह बरामदगी अकलोरडीह खदानपारा स्थित एके ट्रेडर्स के परिसर से जुड़ी बताई गई है। इसके बाद पुलिस ने वाहनों और अन्य सामान को भी जांच के दायरे में लिया।
मामले की जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने कथित तौर पर स्क्रैप को प्लांट से बाहर ले जाने के तरीके और उसे अलग-अलग जगहों पर पहुंचाने की कड़ियों की पड़ताल की।
फ्लू डस्ट की आड़ में स्क्रैप बाहर ले जाने का आरोप
जांच से जुड़े दस्तावेजों और रिपोर्टों के अनुसार, BSP से निकलने वाले फ्लू डस्ट की ढुलाई के लिए इस्तेमाल होने वाले वाहनों को लेकर सवाल उठे। आरोप है कि इन्हीं वाहनों के जरिए कथित रूप से लोहे का स्क्रैप भी बाहर ले जाया गया।
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के अगस्त 2026 के एक आदेश में भी अपराध क्रमांक 277/2026 का उल्लेख है। इसमें अभियोजन का पक्ष था कि 26 मई को दो वाहनों में फ्लू डस्ट के साथ कथित तौर पर लौह स्क्रैप ले जाया जा रहा था। 27 मई को निरीक्षण के दौरान वाहनों में कथित रूप से अनधिकृत लौह स्क्रैप मिला।
यही मामला बाद में व्यापक जांच का विषय बन गया। पुलिस ने इस दौरान प्लांट कर्मचारियों, परिवहन से जुड़े लोगों और अन्य संदिग्ध कड़ियों की भी जांच की।
अब तक 21 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी
BSP कबाड़ चोरी मामले में पुलिस कार्रवाई के दौरान कई गिरफ्तारियां हुई हैं। 29 सितंबर की उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अब तक 21 लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें मामले से जुड़े अलग-अलग स्तर के लोग शामिल बताए गए हैं।
हालांकि, किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। अंतिम जिम्मेदारी और आरोपों की पुष्टि अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगी।
CBI जांच शुरू होने के बाद एजेंसी पहले से जुटाए गए दस्तावेजों और साक्ष्यों की समीक्षा कर सकती है। इसके साथ ही जरूरत के अनुसार नए सिरे से पूछताछ और जांच भी की जा सकती है।
₹114 करोड़ के कथित घोटाले का क्या है मामला?
इस मामले में कथित चोरी और नुकसान का आंकड़ा करीब ₹114 करोड़ बताया जा रहा है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, यह अनुमान एक साल के दौरान कथित तौर पर चोरी किए गए लोहे और स्क्रैप की कीमत से जुड़ा है।
हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि ₹114 करोड़ का आंकड़ा अभी जांच का अंतिम निष्कर्ष नहीं है। वास्तविक चोरी कितनी हुई, BSP को कितना आर्थिक नुकसान हुआ और इस पूरी गतिविधि में कितने लोग शामिल थे, यह CBI की जांच के बाद ज्यादा स्पष्ट हो सकता है।
कुछ रिपोर्टों में इससे कहीं बड़े आंकड़ों के दावे भी सामने आए हैं। लेकिन इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि जांच पूरी होने से पहले नहीं की जा सकती। इसलिए फिलहाल ₹114 करोड़ के कथित नुकसान को जांच के दायरे में शामिल अनुमान के तौर पर देखना उचित है।
CBI किन पहलुओं की जांच कर सकती है?
CBI के सामने इस मामले में कई अहम सवाल होंगे। इनमें सबसे पहले यह पता लगाना शामिल हो सकता है कि प्लांट से कथित तौर पर स्क्रैप किस तरीके से बाहर निकाला गया।
इसके अलावा, जांच में यह भी देखा जा सकता है कि परिवहन के लिए इस्तेमाल किए गए वाहनों का रिकॉर्ड क्या था। वाहनों की आवाजाही, दस्तावेज, प्लांट एंट्री और निकासी से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा बन सकते हैं।
जांच के संभावित प्रमुख बिंदु इस तरह हैं:
- BSP से कथित तौर पर स्क्रैप बाहर निकालने का तरीका।
- फ्लू डस्ट परिवहन में इस्तेमाल वाहनों की भूमिका।
- प्लांट कर्मचारियों और बाहरी लोगों के बीच संभावित संपर्क।
- स्क्रैप के भंडारण और आगे भेजे जाने की प्रक्रिया।
- संबंधित कंपनियों और कारोबारियों के बीच लेनदेन।
- बैंकिंग और वित्तीय रिकॉर्ड।
- मोबाइल और डिजिटल संचार से जुड़े साक्ष्य।
- बरामद स्क्रैप और उसके स्रोत की पहचान।
रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस जांच में वित्तीय लेनदेन और डिजिटल साक्ष्यों की भी पड़ताल की गई थी। अब CBI इन पहलुओं की स्वतंत्र समीक्षा कर सकती है।
सरकार की अधिसूचना से जांच का दायरा बढ़ा
छत्तीसगढ़ सरकार की 25 सितंबर 2026 की अधिसूचना इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके जरिए दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट यानी CBI को राज्य में इस मामले की जांच के लिए सहमति दी गई है।
अधिसूचना का संबंध दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट एक्ट, 1946 की धारा 6 के तहत दी गई सहमति से है। इसके बाद अपराध क्रमांक 277/2026 CBI जांच के दायरे में आ गया है।
इससे पहले मामला राज्य पुलिस के स्तर पर जांच में था। अब केंद्रीय एजेंसी के स्तर पर जांच आगे बढ़ने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
विधानसभा में भी उठ चुका है मामला
भिलाई स्टील प्लांट में कथित कबाड़ चोरी का मुद्दा राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर भी चर्चा में रहा है। वैशाली नगर से भाजपा विधायक रिकेश सेन ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था।
रिपोर्टों के अनुसार, विधायक की ओर से मामले की CBI जांच की मांग की गई थी। इसके बाद राज्य सरकार ने केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने के लिए अधिसूचना जारी की।
हालांकि, जांच एजेंसी अब मामले के तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगी।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
BSP कबाड़ चोरी मामला अब राज्य पुलिस की जांच से आगे बढ़कर CBI के दायरे में आ गया है। करीब 250 टन स्क्रैप की बरामदगी और 21 गिरफ्तारियों के बाद मामले को गंभीरता से देखा जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल कथित ₹114 करोड़ के नुकसान और इसके पीछे मौजूद पूरे नेटवर्क को लेकर है। CBI जांच में यह स्पष्ट हो सकता है कि चोरी कितने समय से चल रही थी, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और BSP से बाहर गए स्क्रैप का इस्तेमाल या बिक्री कहां हुई।
फिलहाल, ₹114 करोड़ का आंकड़ा कथित नुकसान से जुड़ा है। इसे अंतिम आर्थिक नुकसान नहीं माना जा सकता। जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
निष्कर्ष
BSP कबाड़ चोरी मामला अब एक बड़े जांच चरण में पहुंच गया है। छत्तीसगढ़ सरकार की अधिसूचना के बाद CBI को अपराध क्रमांक 277/2026 की जांच की जिम्मेदारी मिलने का रास्ता साफ हुआ है। मामले में अब तक करीब 250 टन स्क्रैप बरामद होने और 21 गिरफ्तारियों की जानकारी सामने आई है।
वहीं, करीब ₹114 करोड़ के कथित लोहा घोटाले ने मामले को और गंभीर बना दिया है। हालांकि, चोरी की वास्तविक मात्रा, आर्थिक नुकसान और आरोपों की पुष्टि CBI की जांच तथा आगे की कानूनी प्रक्रिया से ही होगी।

