मध्य प्रदेश: 6 हजार व्यवसायिक शिक्षकों के पक्ष में सरकार का फैसला, 13 कंपनियों का एग्रीमेंट खत्म
मध्य प्रदेश व्यवसायिक शिक्षक लंबे समय से नौकरी और सेवा व्यवस्था को लेकर असमंजस में रहे हैं। अब करीब 6 हजार व्यवसायिक शिक्षकों से जुड़ी व्यवस्था में बड़ा बदलाव सामने आया है। सरकार की ओर से 13 कंपनियों के साथ हुए करार को खत्म करने का फैसला बताया जा रहा है।
यह फैसला उन शिक्षकों के लिए अहम है, जो सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण से जुड़े हैं। हालांकि, नई व्यवस्था में शिक्षकों की नियुक्ति किस तरीके से होगी, यह पूरी तरह स्पष्ट होना अभी बाकी है।
6 हजार व्यवसायिक शिक्षकों से जुड़ा मामला क्या है?
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा योजना के तहत विद्यार्थियों को अलग-अलग कौशल सिखाए जाते हैं। इसके लिए Vocational Training Provider यानी VTP के जरिए प्रशिक्षकों की सेवाएं ली जाती हैं।
इन प्रशिक्षकों को स्कूलों में विद्यार्थियों को रोजगार से जुड़े कौशल की जानकारी देने की जिम्मेदारी मिलती है। इनमें अलग-अलग ट्रेड और जॉब रोल के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाता है।
मार्च 2025 में सामने आए एक आदेश के अनुसार प्रदेश के करीब 6 हजार व्यवसायिक शिक्षकों की सेवाएं 30 अप्रैल 2025 तक रखने की बात कही गई थी। इसके बाद आगे के निर्देश जारी करने की बात भी कही गई थी।
अब 13 कंपनियों के करार खत्म होने की खबर ने इस पूरी व्यवस्था को फिर चर्चा में ला दिया है। इससे शिक्षकों के भविष्य और नई नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर उम्मीद बढ़ी है।
13 कंपनियों के करार खत्म होने का क्या असर होगा?
VTP कंपनियां अब तक व्यवसायिक प्रशिक्षकों को उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाती रही हैं। पुराने मॉडल में शिक्षक इन प्रशिक्षण प्रदाताओं के जरिए स्कूलों में सेवाएं देते थे।
ऐसे में कंपनियों के साथ करार खत्म होने से नियुक्ति की प्रक्रिया में बदलाव संभव है। हालांकि, केवल करार खत्म होने का मतलब यह नहीं है कि सभी शिक्षकों की नौकरी स्वतः नियमित हो गई है।
यह अंतर समझना जरूरी है। सरकार और VTP के बीच अनुबंध एक प्रशासनिक व्यवस्था है। वहीं शिक्षक की सेवा स्थिति अलग नियमों और आदेशों से तय होती है।
इसलिए नई व्यवस्था में सरकार को शिक्षकों की नियुक्ति, सेवा अवधि और भुगतान को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने होंगे। इससे करीब 6 हजार शिक्षकों को अपने भविष्य की स्थिति समझने में मदद मिलेगी।
सरकार के सामने सबसे बड़ा सवाल रोजगार का है
व्यवसायिक शिक्षकों का मुख्य काम विद्यार्थियों को किताबी शिक्षा से अलग कौशल देना है। इसके तहत विद्यार्थियों को रोजगार से जुड़े क्षेत्रों की शुरुआती जानकारी मिलती है।
पुरानी व्यवस्था में VTP कंपनियां प्रशिक्षकों को स्कूलों तक पहुंचाती थीं। अब यदि कंपनियों की भूमिका कम होती है, तो सरकार को वैकल्पिक मॉडल तैयार करना होगा।
इसका असर केवल शिक्षकों पर नहीं पड़ेगा। विद्यार्थियों की व्यावसायिक शिक्षा भी इसी व्यवस्था से जुड़ी है।
इसलिए बदलाव के साथ प्रशिक्षण व्यवस्था को जारी रखना भी जरूरी होगा। स्कूलों में चल रहे ट्रेड बंद न हों, इसके लिए विभाग को समय पर अगला कदम उठाना होगा।
हाईकोर्ट के मामलों से भी जुड़ा है विवाद
व्यवसायिक शिक्षकों की सेवा व्यवस्था को लेकर मध्य प्रदेश में लंबे समय से कानूनी विवाद भी चला है। सितंबर 2025 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के एक आदेश में VTP के जरिए नियुक्त Vocational Teachers और Trainers के मामलों का उल्लेख हुआ था।
अदालत के सामने ऐसे शिक्षक थे, जिन्हें VTP के माध्यम से नियुक्त किया गया था। आदेश में पुराने सरकारी निर्देशों और शिक्षकों की सेवा जारी रखने से जुड़े घटनाक्रम का भी उल्लेख किया गया।
एक अन्य मामले में अदालत ने यह भी दर्ज किया कि पहले दिए गए सरकारी आश्वासन में शिक्षकों की सेवाओं की सुरक्षा का मुद्दा सामने आया था। हालांकि, उस व्यवस्था को सरकारी सेवा में स्थायी नियुक्ति के बराबर नहीं माना गया था।
इसलिए मौजूदा बदलाव को सीधे नियमितीकरण मानना सही नहीं होगा। शिक्षकों की स्थायी सेवा को लेकर अलग सरकारी आदेश की जरूरत होगी।
जुलाई 2026 में सरकार ने क्या जानकारी दी?
मध्य प्रदेश विधानसभा में जुलाई 2026 में व्यवसायिक प्रशिक्षकों की सेवा और भुगतान से जुड़ा सवाल भी उठा। सरकार ने बताया कि VTP के साथ हुए अनुबंध के अनुसार VTP ही व्यवसायिक प्रशिक्षक का नियोक्ता है।
सरकार के अनुसार वर्तमान में प्रति व्यवसायिक प्रशिक्षक 20 हजार रुपये प्रतिमाह की दर से VTP या पार्टनर को मानदेय की प्रतिपूर्ति की जा रही है। भुगतान उपस्थिति के आधार पर किया जाता है।
यह जानकारी मौजूदा व्यवस्था को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। इससे साफ होता है कि व्यवसायिक प्रशिक्षकों की सेवा अभी भी VTP आधारित मॉडल से जुड़ी रही है।
साथ ही, विधानसभा में सरकार ने यह भी कहा कि VTP के साथ हुए अनुबंध के कारण व्यवसायिक प्रशिक्षक के वेतन को लेकर अलग प्रस्ताव फिलहाल प्रचलन में नहीं है।
शिक्षकों की पुरानी मांग क्या रही है?
व्यवसायिक शिक्षक लंबे समय से सेवा शर्तों और भुगतान को लेकर अपनी मांग उठाते रहे हैं। कई शिक्षक VTP के जरिए काम करने के कारण अपनी सेवा को लेकर असुरक्षा जताते रहे हैं।
2022 में भी मध्य प्रदेश में VTP से जुड़े शिक्षकों को लेकर विवाद सामने आया था। उस समय विभाग ने 34 HR कंपनियों को नोटिस जारी किए थे। इन कंपनियों के माध्यम से व्यवसायिक शिक्षकों को स्कूलों में उपलब्ध कराया जाता था।
2023 में भी कुछ स्कूलों में व्यवसायिक प्रशिक्षकों की सेवाएं अस्थायी रूप से स्थगित करने का आदेश सामने आया था। उस समय विभागीय स्तर पर VTP के अधीन काम करने वाले प्रशिक्षकों की सेवा अवधि को लेकर निर्देश दिए गए थे।
इन घटनाओं से पता चलता है कि VTP मॉडल को लेकर विवाद नया नहीं है। समय-समय पर शिक्षकों की सेवा और अनुबंध व्यवस्था पर सवाल उठते रहे हैं।
नई व्यवस्था में क्या बदल सकता है?
13 कंपनियों के करार खत्म होने के बाद अब सबसे अहम सवाल नई व्यवस्था का है। सरकार यदि नया मॉडल लागू करती है, तो उसके नियम शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
संभावित बदलावों में ये मुद्दे सबसे ज्यादा अहम रहेंगे:
- व्यवसायिक शिक्षकों की नियुक्ति का तरीका।
- वेतन या मानदेय की भुगतान व्यवस्था।
- सेवा की अवधि और नवीनीकरण।
- EPF और दूसरी सुविधाओं की स्थिति।
- स्कूलों में प्रशिक्षकों की निरंतर उपलब्धता।
- VTP कंपनियों की भविष्य की भूमिका।
हालांकि, इन सभी बिंदुओं पर अंतिम स्थिति संबंधित सरकारी आदेशों से ही स्पष्ट होगी। इसलिए अभी किसी संभावित व्यवस्था को अंतिम निर्णय मानना उचित नहीं होगा।
विद्यार्थियों की व्यावसायिक शिक्षा पर भी असर
व्यवसायिक शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को रोजगार से जुड़े कौशल से परिचित कराना है। सरकारी स्कूलों में अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े ट्रेड के माध्यम से यह प्रशिक्षण दिया जाता है।
पुराने सरकारी रिकॉर्ड में भी मध्य प्रदेश के स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा के तहत कई ट्रेड संचालित होने की जानकारी मिलती है। इनमें ब्यूटी एंड वेलनेस, बैंकिंग, इलेक्ट्रिकल, हेल्थ केयर, आईटी, खेल, रिटेल और पर्यटन जैसे क्षेत्र शामिल रहे हैं।
इसलिए नई व्यवस्था बनाते समय केवल शिक्षकों की सेवा का सवाल नहीं होगा। सरकार को विद्यार्थियों के प्रशिक्षण की निरंतरता भी सुनिश्चित करनी होगी।
यदि प्रशिक्षकों की नियुक्ति में देरी होती है, तो इसका असर स्कूलों में चलने वाले कौशल प्रशिक्षण पर पड़ सकता है। वहीं स्पष्ट और स्थिर व्यवस्था बनने से शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों को फायदा हो सकता है।
आगे क्या होगा?
अब नजर स्कूल शिक्षा विभाग के अगले आदेश पर रहेगी। सबसे पहले यह स्पष्ट होना जरूरी है कि 13 VTP कंपनियों के करार खत्म होने के बाद प्रशिक्षकों की सेवाओं को लेकर क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
इसके बाद नियुक्ति, भुगतान और सेवा शर्तों को लेकर दिशा-निर्देश जारी हो सकते हैं। शिक्षकों के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि वर्तमान सेवा अवधि को नई व्यवस्था में किस तरह देखा जाता है।
वहीं सरकार को यह भी स्पष्ट करना होगा कि करीब 6 हजार व्यवसायिक शिक्षकों की सेवाओं को आगे कैसे जारी रखा जाएगा। इससे लंबे समय से चल रही अनिश्चितता कम हो सकती है।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश व्यवसायिक शिक्षक से जुड़ा मामला लंबे समय से सेवा व्यवस्था और VTP मॉडल के बीच रहा है। 13 कंपनियों के करार खत्म होने की खबर से अब नई व्यवस्था की चर्चा तेज हुई है।
हालांकि, इसे सीधे नियमित नौकरी का फैसला मानना जल्दबाजी होगी। वास्तविक स्थिति सरकार के अगले आधिकारिक आदेशों से साफ होगी। फिलहाल शिक्षकों और विद्यार्थियों की नजर नई व्यवस्था, नियुक्ति प्रक्रिया और सेवा शर्तों पर है।

