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छत्तीसगढ़ शिक्षक भर्ती परीक्षा पर हाई कोर्ट की रोक, दिव्यांग आरक्षण पर सरकार से मांगा जवाब

छत्तीसगढ़ शिक्षक भर्ती परीक्षा पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, दिव्यांग आरक्षण पर सरकार से जवाब तलब - न्यूज़ क्रिटिक

छत्तीसगढ़ में शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ा अपडेट सामने आया है। बिलासपुर हाई कोर्ट ने दिव्यांग आरक्षण से जुड़े विवाद पर सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ शिक्षक भर्ती परीक्षा पर रोक लगा दी है।

अदालत ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। मामला पूर्ण दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलने से जुड़ा है। इस आदेश के बाद सहायक शिक्षक और शिक्षक पदों के लिए अक्टूबर में होने वाली परीक्षाएं प्रभावित हुई हैं।

हाई कोर्ट ने शिक्षक भर्ती परीक्षा पर क्यों लगाई रोक?

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति कृष्णराम महापात्र की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने भर्ती विज्ञापन में दिव्यांग आरक्षण की व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की।

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया में दिव्यांग अभ्यर्थियों की कुछ श्रेणियों को आरक्षण का लाभ दिया गया, लेकिन पूर्ण दृष्टिबाधित उम्मीदवारों को इससे बाहर रखा गया। इसी आधार पर उन्होंने भर्ती विज्ञापन और आरक्षण व्यवस्था को चुनौती दी।

सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार से इस मामले में जवाब मांगा। साथ ही, भर्ती परीक्षाओं के आयोजन पर अंतरिम रोक लगा दी। अदालत के आदेश के बाद छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल ने प्रस्तावित परीक्षाओं को स्थगित कर दिया।

अदालत के सामने क्या सवाल उठा?

इस मामले का मुख्य सवाल यह है कि क्या भर्ती प्रक्रिया में दिव्यांगों की सभी पात्र श्रेणियों को निर्धारित आरक्षण का लाभ मिला है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पूर्ण दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को शामिल नहीं करने से उनके अवसर प्रभावित हुए।

उन्होंने संबंधित सरकारी दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए भर्ती व्यवस्था पर सवाल उठाए। अब राज्य सरकार को अदालत के सामने अपना पक्ष रखना होगा।

हालांकि, अभी इसे अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। हाई कोर्ट ने अंतरिम आदेश दिया है। मामले में आगे की सुनवाई और सरकार के जवाब के बाद अगली स्थिति स्पष्ट होगी।

11 और 25 अक्टूबर की परीक्षाओं का क्या हुआ?

भर्ती परीक्षा पर रोक का सीधा असर अक्टूबर में निर्धारित परीक्षा कार्यक्रम पर पड़ा है। सहायक शिक्षक और शिक्षक पदों के लिए अलग-अलग तारीखों पर लिखित परीक्षाएं होनी थीं।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार:

  • 11 अक्टूबर 2026: सहायक शिक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा।
  • 25 अक्टूबर 2026: शिक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा।

हाई कोर्ट के आदेश के बाद इन परीक्षाओं को स्थगित कर दिया गया है। इसलिए अभ्यर्थियों को पुराने कार्यक्रम के आधार पर परीक्षा होने की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए।

फिलहाल, नई परीक्षा तारीखों को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना जरूरी है। अभ्यर्थियों को छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल की सूचनाओं पर नजर रखनी चाहिए।

क्या भर्ती पूरी तरह रद्द हो गई है?

नहीं, परीक्षा पर रोक लगने का अर्थ यह नहीं है कि पूरी भर्ती हमेशा के लिए रद्द हो गई है। फिलहाल अदालत ने परीक्षा के आयोजन पर रोक लगाई है।

भर्ती प्रक्रिया आगे किस तरह बढ़ेगी, यह अदालत के आदेश और राज्य सरकार के जवाब पर निर्भर करेगा। आरक्षण व्यवस्था में जरूरी बदलाव होने पर परीक्षा की अगली प्रक्रिया को लेकर नई जानकारी सामने आ सकती है।

इसलिए अभ्यर्थियों को किसी भी अपुष्ट खबर पर भरोसा करने से बचना चाहिए। परीक्षा की नई तारीख, प्रवेश पत्र और दूसरे निर्देशों के लिए आधिकारिक सूचना ही मान्य होगी।

2,292 पदों पर सहायक शिक्षकों की भर्ती

इस मामले में सहायक शिक्षक भर्ती के कुल 2,292 पद शामिल हैं। इन पदों पर नियुक्ति के लिए बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था।

पदों का विवरण इस प्रकार है:

  • ई-संवर्ग में 795 पद।
  • टी-संवर्ग में 1,497 पद।
  • कुल 2,292 सहायक शिक्षक पद।

इन पदों पर भर्ती स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत होनी है। परीक्षा स्थगित होने से अभ्यर्थियों को अब आगे के निर्देशों का इंतजार करना पड़ेगा।

वहीं, शिक्षक पदों के लिए 1,654 पदों पर भर्ती प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है। इन पदों की परीक्षा 25 अक्टूबर को निर्धारित थी। अदालत की रोक के बाद इस परीक्षा का कार्यक्रम भी आगे बढ़ गया है।

अभ्यर्थियों की तैयारी पर क्या असर पड़ेगा?

कई अभ्यर्थी महीनों से परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। परीक्षा की तारीख नजदीक होने के कारण वे अंतिम चरण में अभ्यास कर रहे होंगे। ऐसे में स्थगन से उनकी योजना प्रभावित हो सकती है।

हालांकि, अभ्यर्थियों को अपनी तैयारी जारी रखनी चाहिए। नई तारीख घोषित होने तक विषयवार अध्ययन और प्रश्नों का अभ्यास उपयोगी रहेगा।

इसके अलावा, आवेदन से जुड़े दस्तावेजों को भी व्यवस्थित रखना चाहिए। आधिकारिक वेबसाइट पर जारी सूचनाओं की नियमित जांच करने से नई तारीख और आगे की प्रक्रिया की जानकारी मिल सकती है।

पूर्ण दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को लेकर क्या है विवाद?

भर्ती विवाद की जड़ दिव्यांग आरक्षण की श्रेणियों और उनके लिए निर्धारित अवसरों से जुड़ी है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि विज्ञापन में अन्य दिव्यांग श्रेणियों का उल्लेख था, लेकिन पूर्ण दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को उचित अवसर नहीं मिला।

उनके अनुसार, इस व्यवस्था के कारण पात्र उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने के अवसर से वंचित रह सकते हैं। इसी वजह से उन्होंने अदालत से हस्तक्षेप की मांग की।

यहां यह समझना जरूरी है कि याचिकाकर्ताओं के आरोप और अदालत का अंतिम निष्कर्ष अलग-अलग बातें हैं। फिलहाल, अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार से जवाब मांगा है और परीक्षाओं पर रोक लगाई है।

अब सरकार को बताना होगा कि भर्ती विज्ञापन तैयार करते समय आरक्षण से जुड़े नियमों का पालन किस तरह किया गया। इसके बाद अदालत मामले में आगे निर्देश दे सकती है।

सितंबर में जारी अधिसूचना भी चर्चा में

इस मामले में दिव्यांग आरक्षण से संबंधित अधिसूचना का समय भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, समाज कल्याण विभाग ने 11 सितंबर 2026 को संशोधित अधिसूचना जारी की थी। इसमें सहायक शिक्षक पद के लिए पूर्ण दृष्टिबाधित श्रेणी को शामिल किया गया।

हालांकि, भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तारीख 21 अगस्त 2026 थी। यानी संशोधित अधिसूचना आवेदन की समयसीमा समाप्त होने के बाद आई।

यही स्थिति विवाद का एक प्रमुख हिस्सा बनी। याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाया कि पात्र श्रेणी को भर्ती में अवसर दिए बिना परीक्षा कैसे आयोजित की जा सकती है।

राज्य सरकार की ओर से यह पक्ष रखा गया कि आवेदन प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी थी। अदालत को अब यह देखना है कि मौजूदा भर्ती में सभी पात्र अभ्यर्थियों को अवसर देने के लिए क्या कदम जरूरी हैं।

आगे क्या होगा?

अब इस मामले में राज्य सरकार के जवाब और हाई कोर्ट की अगली सुनवाई पर नजर रहेगी। अदालत यह तय करेगी कि भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए किन निर्देशों की जरूरत है।

यदि भर्ती विज्ञापन या आरक्षण व्यवस्था में बदलाव जरूरी माना जाता है, तो संबंधित विभाग को आगे की प्रक्रिया पर निर्णय लेना होगा। इसमें पात्र अभ्यर्थियों को आवेदन का अवसर देने और परीक्षा कार्यक्रम में बदलाव जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं।

हालांकि, नई तारीख या आवेदन दोबारा शुरू होने की कोई निश्चित जानकारी आधिकारिक घोषणा के बिना नहीं मानी जानी चाहिए। इसलिए अभ्यर्थियों को कर्मचारी चयन मंडल और संबंधित विभाग के निर्देशों का इंतजार करना होगा।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ शिक्षक भर्ती परीक्षा पर हाई कोर्ट की रोक का मुख्य कारण दिव्यांग आरक्षण में पूर्ण दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को अवसर नहीं मिलने से जुड़ा विवाद है। अदालत ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है और सहायक शिक्षक तथा शिक्षक भर्ती की प्रस्तावित परीक्षाएं स्थगित हो गई हैं।

अब अभ्यर्थियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात नई परीक्षा तारीख और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े आधिकारिक निर्देश होंगे। छत्तीसगढ़ शिक्षक भर्ती परीक्षा को लेकर आगे की स्थिति सरकार के जवाब और अदालत की अगली कार्रवाई के बाद स्पष्ट होगी।

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