पुराने सरकारी शिक्षकों को मिलेगी TET परीक्षा में छूट? हाईकोर्ट ने सरकार को दिए ये निर्देश
पुराने सरकारी शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET से छूट मिलेगी या नहीं, इस पर मध्यप्रदेश में अहम घटनाक्रम सामने आया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इस मांग पर 60 दिनों के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया है।
यह मामला वर्ष 1997 से 1999 के बीच नियुक्त शिक्षाकर्मियों से जुड़ा है। इन शिक्षकों ने पदोन्नति के लिए TET अनिवार्य किए जाने के खिलाफ छूट की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने अभी शिक्षकों को सीधे छूट नहीं दी है। अब सरकार को उनके अभ्यावेदन पर कानून के अनुसार निर्णय लेना होगा।
पुराने शिक्षकों को TET से छूट पर हाईकोर्ट का निर्देश
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 12 अक्टूबर 2026 को शिक्षाकर्मियों की याचिका पर सुनवाई के बाद यह निर्देश दिया। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को लंबित अभ्यावेदनों पर 60 दिनों के भीतर फैसला लेने को कहा।
यह मामला अनिल कुमार तोमर और अन्य याचिकाकर्ताओं से जुड़ा है। उन्होंने अदालत से राहत की मांग करते हुए बताया कि उनकी नियुक्तियां वर्ष 1997 से 1999 के बीच हुई थीं।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, वे शिक्षाकर्मी वर्ग-दो और वर्ग-तीन के पदों पर नियुक्त हुए थे। बाद में राज्य सरकार ने पदोन्नति के लिए TET पास करना अनिवार्य कर दिया।
इसके बाद पुराने शिक्षकों के सामने नई परीक्षा पास करने की चुनौती खड़ी हुई। उन्होंने अपनी नियुक्ति के समय लागू नियमों और लंबे सेवाकाल का हवाला देते हुए छूट की मांग की।
अदालत ने इस मामले में सरकार को निर्णय लेने का निर्देश दिया है। इसका मतलब यह नहीं है कि सभी पुराने शिक्षकों को TET से छूट मिल गई है।
सरकार को 60 दिन में क्या करना होगा?
हाईकोर्ट ने सरकार के सक्षम अधिकारी को शिक्षकों की मांग पर विचार करने के लिए कहा है। अधिकारी को संबंधित कानून, नियमों और दूसरे न्यायिक फैसलों को ध्यान में रखना होगा।
सरकार को केवल औपचारिक जवाब देने के बजाय अपने निर्णय के कारण भी स्पष्ट करने होंगे। इससे शिक्षकों को पता चलेगा कि उनकी मांग स्वीकार हुई या खारिज की गई।
इस मामले में मुख्य निर्देश ये हैं:
- शिक्षकों के लंबित अभ्यावेदनों पर विचार किया जाए।
- संबंधित कानूनी प्रावधानों और न्यायिक फैसलों को ध्यान में रखा जाए।
- 60 दिनों के भीतर निर्णय लिया जाए।
- आदेश स्पष्ट और तर्कसंगत होना चाहिए।
इस तरह अदालत ने सरकार के सामने समयसीमा तय कर दी है। अब संबंधित विभाग को तय अवधि में शिक्षकों की मांग पर फैसला करना होगा।
हालांकि, सरकार का निर्णय क्या होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। जब तक सक्षम अधिकारी आदेश जारी नहीं करता, तब तक शिक्षकों को छूट मिलने की पुष्टि नहीं की जा सकती।
किन शिक्षकों ने TET से छूट की मांग की है?
यह मामला खास तौर पर उन शिक्षाकर्मियों से संबंधित है, जिनकी नियुक्तियां वर्ष 1997 से 1999 के बीच हुई थीं। उन्होंने वर्ग-दो और वर्ग-तीन के पदों पर काम शुरू किया था।
याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि उनकी नियुक्ति उस समय हुई थी, जब वर्तमान TET संबंधी व्यवस्था लागू नहीं थी। इसलिए उन्होंने बाद में पदोन्नति के लिए इस परीक्षा की अनिवार्यता पर सवाल उठाया।
उनकी मांग थी कि पुराने शिक्षकों को उनकी नियुक्ति की तारीख और लागू नियमों के आधार पर राहत दी जाए। उन्होंने दूसरे मामलों में दिए गए न्यायिक आदेशों का भी उल्लेख किया।
दूसरी ओर, शिक्षकों की नियुक्ति और सेवा से जुड़े नियमों का पालन भी जरूरी है। इसलिए इस मामले में सरकार को संबंधित कानूनों और अदालतों के फैसलों के आधार पर निर्णय लेना होगा।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि हाईकोर्ट का निर्देश सभी सरकारी शिक्षकों को अपने आप राहत नहीं देता। फिलहाल, आदेश का संबंध याचिका में उठाई गई मांग और संबंधित अभ्यावेदनों से है।
TET परीक्षा क्यों जरूरी मानी जाती है?
TET का पूरा नाम Teacher Eligibility Test है। हिंदी में इसे शिक्षक पात्रता परीक्षा कहा जाता है। यह परीक्षा शिक्षकों की निर्धारित न्यूनतम योग्यता जांचने के लिए आयोजित की जाती है।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत आने वाले स्कूलों में शिक्षक नियुक्ति के लिए TET एक महत्वपूर्ण योग्यता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षक निर्धारित मानकों के अनुसार योग्य हों।
हालांकि, पुराने शिक्षकों का मामला कुछ अलग परिस्थितियों से जुड़ा है। इनमें कई शिक्षक ऐसे हैं, जिन्होंने TET व्यवस्था लागू होने से पहले सेवा शुरू की थी।
इसी वजह से लंबे समय से काम कर रहे शिक्षकों और परीक्षा की अनिवार्यता के बीच कानूनी सवाल उठे हैं। कुछ शिक्षक अपनी पुरानी नियुक्ति और सेवाकाल के आधार पर राहत चाहते हैं।
लेकिन केवल पुरानी नियुक्ति होने से हर स्थिति में छूट मिलना तय नहीं है। इसके लिए लागू नियमों और संबंधित अदालतों के निर्देशों को देखना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का क्या है महत्व?
TET की अनिवार्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को महत्वपूर्ण फैसला दिया था। इस फैसले में परीक्षा को संबंधित स्कूलों में शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता से जोड़ा गया।
इसके बाद 29 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने समीक्षा याचिकाओं पर फैसला देते हुए TET योग्यता प्राप्त करने की समयसीमा 31 अगस्त 2028 तक बढ़ा दी। इस बदलाव से प्रभावित शिक्षकों को तैयारी के लिए अतिरिक्त समय मिला।
सुप्रीम कोर्ट ने उन सेवारत शिक्षकों के मामले में भी राहत दी, जिनकी सेवानिवृत्ति में 1 सितंबर 2025 को पांच साल से कम समय बचा था। ऐसे शिक्षक TET पास किए बिना सेवानिवृत्ति की उम्र तक सेवा जारी रख सकते हैं।
हालांकि, इस राहत के साथ एक महत्वपूर्ण शर्त भी है। संबंधित शिक्षक TET पास किए बिना पदोन्नति के पात्र नहीं होंगे।
इसलिए पुराने शिक्षकों के मामले में अलग-अलग स्थितियों को समझना जरूरी है। सेवा जारी रखने, TET की अनिवार्यता और पदोन्नति की पात्रता के नियम एक जैसे नहीं हैं।
क्या पुराने शिक्षकों को पदोन्नति में राहत मिलेगी?
मध्यप्रदेश के शिक्षाकर्मियों का मामला मुख्य रूप से पदोन्नति के लिए TET की अनिवार्यता से जुड़ा है। वे चाहते हैं कि उनकी नियुक्ति के समय लागू परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाए।
हाईकोर्ट ने इस मांग पर सरकार को निर्णय लेने का निर्देश दिया है। अदालत ने फिलहाल यह घोषित नहीं किया कि याचिकाकर्ताओं को पदोन्नति मिलेगी या वे TET से मुक्त होंगे।
अब सरकार को संबंधित नियमों और न्यायिक फैसलों के आधार पर अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा। यदि शिक्षकों की मांग स्वीकार होती है, तो आदेश में राहत का दायरा और शर्तें महत्वपूर्ण होंगी।
वहीं, अगर सरकार मांग खारिज करती है, तो उसे अपने निर्णय के कारण बताने होंगे। इसके बाद संबंधित शिक्षक उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार कर सकते हैं।
इसलिए अभी पदोन्नति या परीक्षा से छूट को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। शिक्षकों को सरकार के आधिकारिक आदेश का इंतजार करना चाहिए।
आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब मध्यप्रदेश सरकार के संबंधित विभाग की भूमिका अहम हो गई है। विभाग को 60 दिनों के भीतर शिक्षकों की मांग पर निर्णय लेना है।
इस दौरान नियुक्ति संबंधी रिकॉर्ड, सेवा नियम और दूसरे न्यायिक आदेश महत्वपूर्ण होंगे। सरकार का फैसला बताएगा कि संबंधित शिक्षकों को कोई राहत मिल सकती है या नहीं।
इसके अलावा, यह मामला पुराने शिक्षकों की सेवा शर्तों और TET की अनिवार्यता पर चल रही चर्चा को भी प्रभावित कर सकता है। हालांकि, इस एक आदेश से सभी शिक्षकों के लिए नियम बदलने की पुष्टि नहीं होती।
जिन शिक्षकों की नियुक्ति अलग-अलग वर्षों में हुई है, उनकी परिस्थितियां भी अलग हो सकती हैं। इसलिए प्रत्येक मामले में लागू नियमों और आधिकारिक आदेशों को देखना जरूरी होगा।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पुराने शिक्षाकर्मियों को TET से छूट देने की मांग पर सरकार को 60 दिनों के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। यह मामला वर्ष 1997 से 1999 के बीच नियुक्त शिक्षकों की पदोन्नति से जुड़ा है।
पुराने शिक्षकों को TET से छूट मिलेगी या नहीं, इसका अंतिम फैसला अभी बाकी है। अदालत ने फिलहाल सीधे छूट नहीं दी है। अब शिक्षकों की नजर सरकार के निर्णय पर है, जिससे उनकी पदोन्नति और सेवा संबंधी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

