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धामी सरकार का बड़ा फैसला: यूसीसी नियमावली में संशोधन, विवाह और लिव-इन के नियमों में क्या बदलेगा?

उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा यूसीसी नियमावली में संशोधन का फैसला - न्यूज़ क्रिटिक

उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) नियमावली में संशोधन को मंजूरी दी गई। यह फैसला 22 अक्टूबर 2026 को हुई बैठक में लिया गया। सरकार का उद्देश्य कानून लागू करने के दौरान सामने आई व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करना है। <Cite refs={[“turn221270search0”]}/>

यूसीसी के तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े मामलों के लिए समान कानूनी व्यवस्था बनाई गई है। नए फैसले के बाद लोगों की नजर इस बात पर है कि पंजीकरण और संबंधित प्रक्रियाओं में क्या बदलाव होंगे।

हालांकि, कैबिनेट की मंजूरी और नियमों की अंतिम अधिसूचना अलग-अलग चरण हैं। इसलिए प्रत्येक बदलाव की सटीक प्रक्रिया समझने के लिए संशोधित नियमों का आधिकारिक विवरण महत्वपूर्ण होगा।

यूसीसी नियमावली में संशोधन को कैबिनेट की मंजूरी

उत्तराखंड सरकार ने 22 अक्टूबर की कैबिनेट बैठक में यूसीसी नियमावली में बदलाव के प्रस्ताव को मंजूरी दी। यह संशोधन समान नागरिक संहिता, उत्तराखंड (संशोधन) अधिनियम, 2026 के प्रावधान लागू करने के लिए किया जा रहा है। <Cite refs={[“turn221270search0”]}/>

सरकारी जानकारी के अनुसार, मूल कानून लागू होने के बाद कुछ प्रावधानों को लागू करने में व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आई थीं। इसके अलावा, नियमावली में मौजूद कुछ लिपिकीय त्रुटियों को भी ठीक करने की जरूरत थी। नए संशोधनों का उद्देश्य इन समस्याओं को दूर करना है।

इस फैसले का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यूसीसी के नियम सीधे नागरिकों के निजी और पारिवारिक जीवन से जुड़े हैं। विवाह का पंजीकरण कराने वाले दंपती और लिव-इन संबंध में रहने वाले लोग इन प्रक्रियाओं से प्रभावित हो सकते हैं।

उत्तराखंड में यूसीसी कब लागू हुआ था?

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता 27 जनवरी 2025 को लागू हुई थी। इसके साथ ही उत्तराखंड स्वतंत्र भारत में यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य बना। कानून के तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों से जुड़े कई मामलों के लिए साझा कानूनी ढांचा तैयार किया गया। <Cite refs={[“turn221270search2″,”turn221270search18”]}/>

इस व्यवस्था के तहत विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया को ऑनलाइन बनाने पर भी जोर दिया गया। इससे लोगों को संबंधित सेवाओं तक पहुंचने में सुविधा मिली। हालांकि, कानून लागू होने के बाद कुछ नियमों को लेकर निजता और दस्तावेजों से जुड़े सवाल भी उठे।

इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने नियमों की समीक्षा की। पहले भी लिव-इन पंजीकरण, पहचान प्रमाण और जानकारी साझा करने की प्रक्रिया में बदलाव किए गए थे। अब कैबिनेट की नई मंजूरी संशोधन कानून को लागू करने की दिशा में अगला कदम है। <Cite refs={[“turn221270news5″,”turn221270search9”]}/>

विवाह पंजीकरण से जुड़े नियमों में क्या बदलेगा?

यूसीसी के तहत विवाह पंजीकरण एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य विवाह से जुड़े रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखना और कानूनी दस्तावेज उपलब्ध कराना है। नए संशोधन नियमों के क्रियान्वयन को स्पष्ट करने के लिए लाए गए हैं।

फिलहाल, 22 अक्टूबर की कैबिनेट मंजूरी से जुड़ी उपलब्ध जानकारी में विवाह पंजीकरण के हर नए नियम का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि विवाह की उम्र, पंजीकरण की अनिवार्यता या सभी दस्तावेजों की शर्तों में बदलाव हो गया है।

लोगों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे वर्तमान में लागू नियमों के अनुसार ही आवेदन करें। संशोधित नियमों की आधिकारिक अधिसूचना आने पर ही यह स्पष्ट होगा कि कौन-सी प्रक्रिया बदली है और कौन-सी पहले जैसी रहेगी।

लिव-इन रिलेशनशिप के नियम क्यों चर्चा में हैं?

उत्तराखंड यूसीसी में लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण और समाप्ति से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं। इन नियमों को लेकर पहले निजता, पहचान और अधिकारियों के साथ जानकारी साझा करने जैसे मुद्दों पर बहस हुई थी। इसके बाद सरकार ने कुछ प्रक्रियाओं में बदलाव प्रस्तावित किए थे। <Cite refs={[“turn221270news5″,”turn221270news7”]}/>

लिव-इन संबंधों से जुड़े नियमों में पंजीकरण की प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारियां महत्वपूर्ण हैं। ऐसे मामलों में निजी जानकारी की सुरक्षा और कानून के पालन के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

हालांकि, नए कैबिनेट फैसले के बाद लिव-इन संबंधों के हर नियम में बदलाव होने की पुष्टि उपलब्ध विवरण से नहीं होती। संशोधित नियमों की अधिसूचना से ही यह पता चलेगा कि पंजीकरण, आवेदन या अन्य प्रक्रियाओं में कौन-से विशिष्ट बदलाव लागू होंगे।

पहचान प्रमाण और निजता पर पहले भी हुए बदलाव

यूसीसी नियमों में पहले किए गए संशोधनों का एक प्रमुख उद्देश्य पंजीकरण प्रक्रिया को आसान बनाना था। नवंबर 2025 में उत्तराखंड सरकार ने पहचान प्रमाण से जुड़े नियमों में बदलाव किए थे। इसके तहत आधार कार्ड के अलावा पासपोर्ट, मतदाता पहचान पत्र, राशन कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेजों को भी पहचान प्रमाण के रूप में स्वीकार करने का प्रावधान किया गया। <Cite refs={[“turn221270search9”]}/>

इसके अलावा, लिव-इन संबंधों के पंजीकरण में निजता को लेकर भी सवाल उठे थे। सरकार ने पुलिस के साथ जानकारी साझा करने की प्रक्रिया को स्पष्ट करने और व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा पर जोर देने के लिए बदलाव प्रस्तावित किए थे। <Cite refs={[“turn221270news7”]}/>

इन पुराने संशोधनों और अक्टूबर 2026 के नए फैसले में अंतर समझना जरूरी है। पहले के बदलावों को ही नए कैबिनेट फैसले का परिणाम मानना सही नहीं होगा। नई नियमावली की अधिसूचना सामने आने पर ही सभी बदलावों की स्थिति स्पष्ट होगी।

विवाह और लिव-इन संबंधों में अंतर समझना जरूरी

विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप अलग-अलग प्रकार के संबंध हैं। यूसीसी में दोनों के लिए संबंधित प्रावधान बनाए गए हैं। इसलिए इनकी पंजीकरण प्रक्रिया और कानूनी शर्तों को एक जैसा मानना उचित नहीं है।

विवाह के मामलों में पंजीकरण से जुड़े दस्तावेज और निर्धारित प्रक्रिया महत्वपूर्ण होते हैं। वहीं, लिव-इन संबंधों में पंजीकरण, पात्रता और संबंध समाप्त करने की प्रक्रिया से जुड़े अलग नियम लागू होते हैं।

यदि किसी व्यक्ति को नए नियमों के तहत आवेदन करना है, तो उसे आधिकारिक पोर्टल या संबंधित पंजीकरण अधिकारी से जानकारी लेनी चाहिए। इससे पुराने और नए नियमों को लेकर भ्रम से बचा जा सकता है।

सरकार के फैसले का आम लोगों पर क्या असर होगा?

नियमावली में संशोधन का सीधा असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतिम रूप से कौन-से बदलाव अधिसूचित किए जाते हैं। यदि किसी प्रक्रिया को सरल बनाया जाता है, तो नागरिकों को आवेदन करने और दस्तावेज जमा करने में सुविधा मिल सकती है।

वहीं, यदि अधिकारियों की जिम्मेदारियों या आवेदन निपटाने की समयसीमा में बदलाव होता है, तो पंजीकरण प्रक्रिया पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, इन संभावित प्रभावों को अंतिम बदलाव मानने से पहले आधिकारिक नियम देखना जरूरी है।

इसके अलावा, लोगों को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों की सही जानकारी मिलना भी महत्वपूर्ण है। स्पष्ट नियम नागरिकों और प्रशासन, दोनों के लिए प्रक्रिया को समझना आसान बना सकते हैं।

अब आगे क्या होगा?

कैबिनेट की मंजूरी के बाद संशोधित नियमों को लागू करने के लिए संबंधित सरकारी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। आधिकारिक अधिसूचना में नियमों का सटीक विवरण सामने आने के बाद उनकी प्रभावी तारीख और लागू होने की शर्तें स्पष्ट होंगी। <Cite refs={[“turn221270search0”]}/>

इसके बाद विवाह और लिव-इन पंजीकरण से जुड़े आवेदकों को नए निर्देशों के अनुसार प्रक्रिया पूरी करनी होगी। संबंधित विभागों को भी संशोधित नियमों के आधार पर काम करना होगा।

फिलहाल, नागरिकों को किसी बदलाव के बारे में अपुष्ट जानकारी के आधार पर निर्णय नहीं लेना चाहिए। नियमों की आधिकारिक प्रति और सरकारी निर्देश ही सबसे भरोसेमंद आधार होंगे।

निष्कर्ष

धामी सरकार ने यूसीसी नियमावली में संशोधन को मंजूरी देकर कानून लागू करने से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं को दूर करने की दिशा में कदम उठाया है। यह फैसला विवाह, लिव-इन संबंधों और संबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

हालांकि, विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप के नियमों में हुए प्रत्येक बदलाव की पुष्टि संशोधित नियमों की आधिकारिक अधिसूचना से ही होगी। इसलिए नागरिकों को अंतिम नियमों की जानकारी लेकर ही आवेदन करना चाहिए।

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