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वक्फ संशोधन बिल 2024 पर संसद में आर पार, विपक्ष बिल के विरोध में एकजुट

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आज 2 अप्रैल 2025 को लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा हुई। यह विधेयक वक्फ अधिनियम 1995 में संशोधन करने का प्रस्ताव करता है, जिसमे वक्फ बोर्ड में मुस्लिम महिलाओं और गैर-मुस्लिम को शामिल करने जैसे प्रमुख परिवर्तन शामिल हैं। विधेयक को लेकर संसद में तीव्र बहस हुई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि यह मुस्लिम सम्पत्तियों को नहीं छीनता है और इसका उद्देश्य वक्फ सम्पतियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और दक्षता लाना है।

विपक्षी दलों, विशेष रूप से कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने विधेयक का विरोध किया। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि यह विधेयक संविधान को कमजोर करता है और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हनन करता है। इसी बीच जद (यू) और तेलुगु देशम पार्टी जैसे एनडीए सहयोगी दलों ने विधेयक का समर्थन किया है, यह कहते हुए कि यह पारदर्शिता लाने में मदद करेगा और मस्जिदों के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा।

विधेयक पर विभिन्न दलों की प्रतिक्रियाएं

सरकार का पक्ष – अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि यह वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार समाप्त करने में मदद करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह विधेयक किसी भी धार्मिक प्रणाली या प्रथा में हस्तक्षेप नहीं करता है।

विपक्ष का विरोध – कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि यह विधेयक संविधान को कमजोर करता है। अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हनन करता है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बैनर्जी ने भी विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि सरकार की मंशा वक्फ संपत्तियों पर कब्ज़ा करने की है।

समाजवादी पार्टी का दृष्टिकोण – समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार से पूछा कि जब अधिकांश राजनितिक दल इस विधेयक के खिलाफ हैं तो इसे आगे बढ़ाने की आवश्यकता क्यों है।

विधेयक पर चर्चा के दौरान विभिन्न दलों के बीच तीव्र बहस देखी गई। सरकार का दावा है कि यह विधेयक वक्फ की संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार लाने के लिए आवश्यक है, जबकि विपक्ष इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला मानता है।

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