उत्तर प्रदेश में स्मार्ट बिजली मीटर पर लगी रोक, तकनीकी जांच के बाद होगा आगे का फैसला
उत्तर प्रदेश में इन दिनों स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। आम उपभोक्ताओं की ओर से मीटर की रीडिंग और बिजली बिल में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आ रही थीं, जिसके कारण लोगों में असंतोष बढ़ गया था। इसी स्थिति को देखते हुए प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बड़ा फैसला लेते हुए राज्य में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोकने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक तकनीकी जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक नए स्मार्ट मीटर नहीं लगाए जाएंगे।
तकनीकी समिति करेगी पूरे मामले की जांच
सोमवार, 20 अप्रैल को लखनऊ स्थित शक्ति भवन में ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बिजली विभाग के वरिष्ठ और क्षेत्रीय अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में स्मार्ट प्रीपेड मीटर से जुड़ी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। मंत्री ने निर्देश दिया कि मीटरों में आ रही तकनीकी खामियों की जांच के लिए एक विशेष तकनीकी समिति बनाई जाए। यह समिति सभी शिकायतों और तकनीकी मुद्दों का परीक्षण करेगी और अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
जब तक यह जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक पुराने मीटरों को हटाकर नए स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने की प्रक्रिया को रोक दिया गया है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं को किसी भी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े और बिजली व्यवस्था पारदर्शी बनी रहे।
उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए नए निर्देश
बैठक में ऊर्जा मंत्री ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कई अहम फैसले भी लिए। जिन स्थानों पर पहले से स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं, वहां बिजली कटौती को लेकर नए नियम लागू किए गए हैं। अब यदि किसी उपभोक्ता का बैलेंस शून्य हो जाता है, तो भी तुरंत बिजली नहीं काटी जाएगी। उपभोक्ता को तीन दिन तक या फिर दो किलोवाट तक के कनेक्शन पर 200 रुपये तक के नकारात्मक बैलेंस की सुविधा दी जाएगी।
इसके अलावा यह भी निर्देश दिया गया कि रविवार, त्योहारों और अन्य अवकाश के दिनों में किसी भी स्थिति में बिजली आपूर्ति बंद नहीं की जाएगी। उपभोक्ताओं को समय रहते सतर्क करने के लिए स्मार्ट मीटर में बैलेंस कम होने पर एसएमएस और कॉल के माध्यम से सूचना देने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
शिकायतों के त्वरित समाधान और बेहतर सेवा पर जोर
ऊर्जा मंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि स्मार्ट मीटर से जुड़ी सभी शिकायतों का जल्द से जल्द समाधान किया जाए। यदि किसी उपभोक्ता द्वारा बिल का भुगतान कर दिया जाता है, तो तुरंत बिजली आपूर्ति बहाल की जानी चाहिए। इस कार्य में किसी भी प्रकार की देरी होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इसके लिए विभाग को 24 घंटे सक्रिय रहने वाली टीम बनाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि तकनीकी और प्रशासनिक समस्याओं का समाधान तुरंत किया जा सके। खासकर गर्मी के मौसम को देखते हुए यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि लोगों को बिजली से जुड़ी कोई परेशानी न हो।
कुल मिलाकर, राज्य सरकार ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए उपभोक्ताओं के हित में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। अब सभी की नजर तकनीकी समिति की रिपोर्ट पर है, जिसके आधार पर आगे स्मार्ट मीटर योजना को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
