बंगाल चुनाव में बयानबाज़ी तेज, ममता बनर्जी ने अमित शाह के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की कही बात
हुगली की सभा में ममता का तीखा हमला
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले राजनीतिक माहौल काफी गरम हो गया है। इसी बीच राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। शनिवार, 25 अप्रैल 2026 को हुगली में आयोजित एक चुनावी रैली में बोलते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि एक केंद्रीय गृह मंत्री को इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि चुनाव के बाद लोगों को “उल्टा लटकाने” जैसी बातें करना पूरी तरह अस्वीकार्य है और यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। ममता बनर्जी ने यह भी घोषणा की कि वह अमित शाह के इस कथित “हिंसक बयान” के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगी।
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि इस तरह की धमकी भरी राजनीति से बंगाल के मतदाता प्रभावित नहीं होंगे। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि डर और दबाव की राजनीति यहां काम नहीं करेगी और जनता लोकतांत्रिक तरीके से ही जवाब देगी।
अमित शाह के बयान पर विवाद
दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बीरभूम जिले में एक जनसभा को संबोधित करते हुए राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में बम और हिंसा के जरिए लोगों को डराने की कोशिश की जा रही है।
शाह ने अपने संबोधन में कहा था कि बंगाल की जनता इस बार हिंसा का जवाब वोट के जरिए देगी और भारतीय जनता पार्टी को सत्ता में लाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि टीएमसी से जुड़े कथित गुंडे अब लोगों को डराने में सफल नहीं होंगे।
इसके अलावा उन्होंने ममता सरकार पर भ्रष्टाचार और “माफिया राज” चलाने का आरोप लगाया। शाह ने लोगों से अपील की कि वे इस सरकार को हटाकर भाजपा को मौका दें, ताकि राज्य में सिंडिकेट और रिश्वतखोरी खत्म की जा सके।
उनके बयान का सबसे विवादित हिस्सा वह था, जिसमें उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ी तो उन्हें जेल भेजा जाएगा। इसी बयान को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
चुनावी माहौल में बढ़ती बयानबाज़ी
पश्चिम बंगाल में चुनाव जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी तेज होते जा रहे हैं। एक तरफ भाजपा राज्य में बदलाव का दावा कर रही है, तो दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस अपनी सरकार के कामकाज को जनता के सामने रख रही है।
ममता बनर्जी ने अपने भाषण में कहा कि इस तरह की “आक्रामक सोच” के साथ कोई भी पार्टी बंगाल की जनता का दिल नहीं जीत सकती। उन्होंने यह भी दोहराया कि उनका विश्वास लोकतंत्र और शांति में है, न कि डर और धमकी में।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के तीखे बयान चुनावी रणनीति का हिस्सा होते हैं, लेकिन इससे माहौल और ज्यादा संवेदनशील हो जाता है। अब देखना होगा कि आने वाले चरणों में यह बयानबाज़ी किस दिशा में जाती है और इसका चुनाव परिणामों पर क्या असर पड़ता है।
