पटना में पेट्रोल-डीजल को लेकर बढ़ी चिंता, पेट्रोल पंपों पर सीमित मात्रा में मिल रहा ईंधन
पटना में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच लोगों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। राजधानी के कई पेट्रोल पंपों पर इन दिनों वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। लोग भविष्य में ईंधन की कमी और कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका को देखते हुए अपनी गाड़ियों की फुल टंकी कराने पहुंच रहे हैं। हालांकि इस बढ़ती भीड़ और अफवाहों के माहौल के बीच पेट्रोल पंप संचालकों ने बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने तय किया है कि फिलहाल सीमित मात्रा में ही पेट्रोल और डीजल दिया जाएगा ताकि सभी लोगों तक ईंधन पहुंच सके।
पेट्रोलियम कंपनियों की ओर से अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर पेट्रोल पंप मालिकों ने हालात को संभालने के लिए यह कदम उठाया है। उनका कहना है कि अगर कुछ लोग बड़ी मात्रा में ईंधन भरवा लेते हैं, तो बाकी लोगों को परेशानी हो सकती है और इससे अफवाहें और तेज फैल सकती हैं।
अफवाहों के बीच पेट्रोल पंप संचालकों का फैसला
पटना के पेट्रोल पंप संचालक अरविंद कुमार ने बताया कि तेल कंपनियों की तरफ से फुल टंकी भरने पर किसी तरह की रोक नहीं लगाई गई है। न ही कम मात्रा में पेट्रोल या डीजल बेचने का कोई निर्देश मिला है। इसके बावजूद पेट्रोल पंप संचालकों ने आपसी सहमति से सीमित मात्रा में ईंधन देने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि इस फैसले का मकसद केवल यह सुनिश्चित करना है कि हर जरूरतमंद व्यक्ति तक पेट्रोल और डीजल पहुंच सके। अगर कुछ लोग जरूरत से ज्यादा ईंधन जमा करने लगेंगे तो आम लोगों के बीच घबराहट फैल सकती है। ऐसे हालात में अफवाहें तेजी से फैलती हैं और स्थिति और खराब हो सकती है।
अरविंद कुमार के अनुसार, बाइक, कार, ट्रैक्टर, ट्रक, बस और अन्य बड़े वाहनों को उनकी जरूरत के हिसाब से पेट्रोल और डीजल दिया जा रहा है। पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि अभी ईंधन की सप्लाई पूरी तरह बंद नहीं हुई है, लेकिन लोगों से अपील की जा रही है कि वे घबराहट में जरूरत से ज्यादा पेट्रोल-डीजल न भरवाएं।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से बढ़ी परेशानी
हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3-3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। इसके बाद लोगों को डर है कि आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ सकती हैं। यही वजह है कि लोग पहले से ज्यादा मात्रा में ईंधन खरीदने की कोशिश कर रहे हैं।
एक रिपोर्ट के मुताबिक तेल कंपनियों को अभी भी पेट्रोल और डीजल बेचने में भारी नुकसान हो रहा है। बताया जा रहा है कि कंपनियों को प्रति लीटर करीब 17 से 18 रुपये तक का घाटा उठाना पड़ रहा है। सरकार मार्च में एक्साइज ड्यूटी कम कर चुकी है, लेकिन इसके बावजूद तेल कंपनियों पर आर्थिक दबाव बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी नहीं की गई तो कंपनियों को इस तिमाही में हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। इसी कारण बाजार में भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
कच्चे तेल और महंगाई ने बढ़ाई चिंता
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। पहले जहां क्रूड ऑयल लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, वहीं अब इसकी कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच चुकी है। वैश्विक तनाव और युद्ध जैसे हालात के कारण तेल बाजार में दबाव बढ़ गया है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है। पेट्रोल और डीजल महंगे होने से ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ता है, जिसका असर रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी पड़ता है।
इसी बीच अमूल और मदर डेयरी ने दूध की कीमतों में भी 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। माना जा रहा है कि दूसरी डेयरी कंपनियां भी जल्द दाम बढ़ा सकती हैं।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि पेट्रोल, डीजल, घरेलू गैस सिलेंडर और दूध जैसी जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ने से महंगाई दर पर असर पड़ सकता है। आने वाले समय में आम लोगों के घरेलू बजट पर इसका अतिरिक्त बोझ बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
