May 23, 2026

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एनपीटी सम्मेलन बिना समझौते के खत्म, ईरान ने अमेरिका पर लगाया बाधा डालने का आरोप

 

संयुक्त राष्ट्र में परमाणु अप्रसार संधि यानी एनपीटी को लेकर आयोजित तीसरे समीक्षा सम्मेलन का समापन बिना किसी अंतिम समझौते के हो गया। इस असफलता के बाद ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ईरान का कहना है कि अमेरिका की सख्त नीतियों और दबाव की वजह से सम्मेलन किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सका। इसी कारण लगातार तीसरी बार यह वैश्विक बैठक बिना संयुक्त दस्तावेज के समाप्त हो गई।

ईरान ने कहा कि अमेरिका की अत्यधिक मांगों और राजनीतिक दबाव ने एनपीटी व्यवस्था को कमजोर कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी मिशन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी करते हुए कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का रवैया इस महत्वपूर्ण संधि के भविष्य के लिए खतरा बनता जा रहा है। ईरान ने यह भी चेतावनी दी कि अगर दुनिया में परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो एनपीटी की विश्वसनीयता पर गंभीर असर पड़ सकता है।

न्यूयॉर्क में हुई बैठक, लेकिन नहीं बनी सहमति

परमाणु अप्रसार संधि की यह समीक्षा बैठक 27 अप्रैल से न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में चल रही थी। सम्मेलन का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच परमाणु हथियारों को लेकर सहमति बनाना और भविष्य की रणनीति तय करना था। हालांकि कई दौर की बातचीत और मसौदे में बदलाव के बावजूद सदस्य देश अंतिम दस्तावेज पर एकमत नहीं हो सके।

रिपोर्टों के अनुसार सम्मेलन के अंतिम दस्तावेज में चार बार बदलाव किए गए, ताकि सभी देशों की सहमति मिल सके। इसके बावजूद कई अहम मुद्दों पर मतभेद बने रहे। सम्मेलन के अध्यक्ष डो हंग वियेत ने भी माना कि किसी निष्कर्ष तक न पहुंच पाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बढ़ा विवाद

इस सम्मेलन में सबसे बड़ा विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सामने आया। अंतिम दस्तावेज में एक लाइन शामिल की गई थी, जिसमें कहा गया था कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता, न उनका विकास कर सकता है और न ही उनकी तलाश कर सकता है। ईरान ने इस वाक्य का कड़ा विरोध किया और इसे हटाने की मांग की।

दूसरी तरफ अमेरिका इस लाइन को दस्तावेज में बनाए रखने पर अड़ा रहा। इसी मुद्दे को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय तक बातचीत चली, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी। माना जा रहा है कि यही विवाद सम्मेलन की असफलता की सबसे बड़ी वजह बना।

इसके अलावा यूक्रेन के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों और उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण से जुड़े मुद्दे भी विवाद का कारण बने। सहमति बनाने के लिए कई विवादित शब्दों को मसौदे से हटाया गया, लेकिन इसके बावजूद सदस्य देश एकमत नहीं हो पाए।

लगातार तीसरी बार असफल रहा एनपीटी सम्मेलन

एनपीटी समीक्षा सम्मेलन हर पांच साल में आयोजित किया जाता है। इसका मकसद परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना और वैश्विक सुरक्षा को मजबूत बनाना होता है। लेकिन यह लगातार तीसरी बार है जब सदस्य देश किसी साझा अंतिम दस्तावेज को स्वीकार नहीं कर पाए हैं।

पिछले कुछ वर्षों में दुनिया में बढ़ते तनाव, क्षेत्रीय संघर्ष और परमाणु हथियारों की होड़ ने इस संधि के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध, उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण और ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दों ने देशों के बीच अविश्वास बढ़ाया है।

क्या है परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी)?

परमाणु अप्रसार संधि दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संधियों में गिनी जाती है। इसका उद्देश्य परमाणु हथियारों और तकनीक के प्रसार को रोकना, शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना और वैश्विक स्तर पर परमाणु निरस्त्रीकरण को आगे बढ़ाना है।

यह संधि साल 1968 में हस्ताक्षर के लिए खोली गई थी और 1970 में लागू हुई। बाद में 1995 में इसे अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया गया। वर्तमान में दुनिया के 191 देश इस संधि का हिस्सा हैं, जिनमें पांच आधिकारिक परमाणु हथियार संपन्न देश भी शामिल हैं।

हालांकि सम्मेलन की असफलता ने यह साफ कर दिया है कि दुनिया में परमाणु हथियारों को लेकर मतभेद अभी भी गहरे हैं और भविष्य में इस दिशा में सहमति बनाना आसान नहीं होगा।

 

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