G7 सम्मेलन 2026: पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की अहम मुलाकात पर दुनिया की नजर, व्यापार से लेकर वैश्विक सुरक्षा तक कई मुद्दों पर होगी चर्चा
एवियन-ले-बैंस (फ्रांस), 15 जून 2026। फ्रांस के खूबसूरत शहर एवियन-ले-बैंस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच होने वाली बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय बैठक वैश्विक चर्चा का केंद्र बनी हुई है। करीब 16 महीने बाद दोनों नेताओं की आमने-सामने होने वाली यह मुलाकात भारत-अमेरिका संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, 17 जून को होने वाली इस बैठक में व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी सहयोग, क्षेत्रीय स्थिरता, H-1B वीजा और इंडो-पैसिफिक रणनीति जैसे कई अहम विषयों पर चर्चा हो सकती है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने के लिए यह मुलाकात निर्णायक साबित हो सकती है।
व्यापार समझौते पर रहेगा सबसे ज्यादा फोकस
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ रहा है और इसका आकार 200 अरब डॉलर से अधिक पहुंच चुका है। हालांकि, टैरिफ, कृषि उत्पादों की बाजार पहुंच, डेयरी सेक्टर और डिजिटल सेवाओं से जुड़े कई मुद्दे अभी भी लंबित हैं।
बैठक के दौरान दोनों पक्ष भविष्य के व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ने पर विचार कर सकते हैं। भारत जहां अमेरिकी बाजार में अधिक अवसर और H-1B वीजा प्रक्रिया में राहत चाहता है, वहीं अमेरिका भारतीय बाजार में बेहतर पहुंच की मांग कर रहा है।
ऊर्जा और सप्लाई चेन सहयोग पर भी चर्चा संभव
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों नेता स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals), सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन और नई तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर भी विचार करेंगे। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सुरक्षा और सप्लाई चेन की मजबूती वर्तमान समय की प्रमुख जरूरत बन चुकी है।
इंडो-पैसिफिक और QUAD पर रणनीतिक बातचीत
भारत और अमेरिका इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण साझेदार माने जाते हैं। QUAD समूह के माध्यम से दोनों देश क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार सहयोग कर रहे हैं।
बैठक में चीन की बढ़ती गतिविधियों, क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और रक्षा सहयोग को लेकर भी विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। दोनों देशों के बीच रक्षा तकनीक और उभरती तकनीकों में साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया जा सकता है।
मध्य पूर्व और वैश्विक सुरक्षा मुद्दे भी रहेंगे एजेंडे में
हाल के महीनों में मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की स्थिति ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से पूरा करता है, इस मुद्दे पर अपनी चिंताओं को अमेरिकी नेतृत्व के सामने रख सकता है।
इसके अलावा रूस-यूक्रेन संघर्ष, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) गवर्नेंस, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक आर्थिक स्थिरता जैसे विषय भी चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं।
मोदी और ट्रंप के व्यक्तिगत समीकरण पर भी रहेगी नजर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच वर्षों से मजबूत व्यक्तिगत संबंध देखने को मिले हैं। दोनों नेताओं ने अपने पिछले कार्यकालों में कई बार एक-दूसरे को महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह व्यक्तिगत विश्वास लंबित मुद्दों को सुलझाने में सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।
G7 सम्मेलन में भारत की भूमिका
हालांकि भारत G7 का स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीति में उसकी बढ़ती भूमिका को देखते हुए उसे विशेष आमंत्रित देश के रूप में बुलाया गया है। प्रधानमंत्री मोदी सम्मेलन में ग्लोबल साउथ की चिंताओं, आतंकवाद, जलवायु वित्त और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाने वाले हैं।
निष्कर्ष
G7 सम्मेलन के दौरान होने वाली मोदी-ट्रंप मुलाकात भारत-अमेरिका संबंधों के अगले चरण को तय करने वाली महत्वपूर्ण बैठक मानी जा रही है। व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और वैश्विक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं के बीच पूरी दुनिया इस बैठक के नतीजों पर नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि दोनों देश अपने रणनीतिक संबंधों को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं।
G7 सम्मेलन के दौरान 17 जून 2026 को दोनों नेताओं की द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना है
व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, H-1B वीजा, इंडो-पैसिफिक रणनीति, रक्षा सहयोग और वैश्विक सुरक्षा प्रमुख विषय रहेंगे।
दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 200 अरब डॉलर से अधिक का बताया जाता है।
भारत विशेष आमंत्रित देश के रूप में शामिल हो रहा है और ग्लोबल साउथ की आवाज को प्रमुखता से उठाएगा।
यह बैठक भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने और लंबित व्यापारिक व भू-राजनीतिक मुद्दों पर प्रगति का अवसर प्रदान कर सकती है।

