अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर: अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बाद ईरान का पलटवार, क्या दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ रही है?
अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर किया बड़ा हमला
वॉशिंगटन/तेहरान | 28 जून 2026
मध्य पूर्व में एक बार फिर हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की। यह कार्रवाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक सिंगापुर-ध्वज वाले कार्गो जहाज पर हुए कथित ईरानी ड्रोन हमले के जवाब में की गई।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, हमले में ईरान के मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज, एयर डिफेंस सिस्टम, कम्युनिकेशन नेटवर्क और निगरानी केंद्रों को निशाना बनाया गया। हमले मुख्य रूप से क़ेश्म द्वीप और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास किए गए।
ईरान ने भी किया जवाबी हमला
अमेरिकी कार्रवाई के कुछ ही घंटों बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी हमला किया।
ईरानी सेना ने कुवैत के अली अल सलेम एयरबेस और बहरीन स्थित अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन दागे।
ईरानी मीडिया ने दावा किया कि हमला सफल रहा, जबकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उनकी एयर डिफेंस प्रणाली ने अधिकांश मिसाइलों और ड्रोन को रास्ते में ही नष्ट कर दिया।
ट्रंप की कड़ी चेतावनी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर ईरान को सख्त संदेश देते हुए कहा कि यदि उसने संघर्ष विराम का उल्लंघन जारी रखा तो अमेरिका और भी कठोर कार्रवाई करेगा।
ट्रंप ने ईरान पर क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ाने का आरोप लगाया और कहा कि अमेरिका अपने हितों और सहयोगियों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा।
आखिर क्यों शुरू हुआ नया टकराव?
इस ताजा संघर्ष की जड़ हाल ही में हुए अमेरिका-ईरान संघर्ष विराम (Ceasefire) से जुड़ी है।
दोनों देशों के बीच कुछ सप्ताह पहले 60 दिनों के अंतरिम संघर्ष विराम पर सहमति बनी थी, जिसका उद्देश्य था—
- होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रखना
- तेल आपूर्ति सामान्य करना
- क्षेत्रीय तनाव कम करना
लेकिन अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने संघर्ष विराम का उल्लंघन करते हुए एक व्यापारी जहाज पर ड्रोन हमला किया, जिसके बाद यह सैन्य कार्रवाई की गई।
दुनिया भर में बढ़ी चिंता
इस संघर्ष ने कई देशों की चिंता बढ़ा दी है।
इजराइल
इजराइल ने अमेरिकी कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित नहीं करने दिए जाएंगे।
रूस और चीन
दोनों देशों ने संयम बरतने की अपील की। रूस ने अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना की जबकि चीन ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया।
भारत
भारत सरकार ने दोनों पक्षों से तनाव कम करने की अपील की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत अपने नागरिकों और ऊर्जा सुरक्षा पर लगातार नजर बनाए हुए है।
संयुक्त राष्ट्र
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने तत्काल तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
इस सैन्य टकराव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तुरंत दिखाई दिया।
- ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई।
- तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।
- भारतीय शेयर बाजार में दबाव देखने को मिला।
- रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ।
- निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ गई।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत समुद्री तेल व्यापार का प्रमुख मार्ग माना जाता है। यहां किसी भी प्रकार का व्यवधान वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
क्या तीसरे विश्व युद्ध का खतरा बढ़ गया है?
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्थिति बेहद संवेदनशील है।
यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई लगातार बढ़ती रही या ईरान समर्थित संगठन भी संघर्ष में शामिल हुए तो पूरे मध्य पूर्व में बड़ा युद्ध छिड़ सकता है।
हालांकि कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि अभी भी कूटनीतिक बातचीत के जरिए तनाव कम करने की संभावना बनी हुई है।
आगे क्या हो सकता है?
संभावित परिस्थितियां—
- नया कूटनीतिक समझौता
- अमेरिका और ईरान के बीच सीमित सैन्य संघर्ष
- ईरान समर्थित संगठनों की सक्रियता
- होर्मुज जलडमरूमध्य में संकट
- वैश्विक तेल संकट
- विश्व अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर
निष्कर्ष
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव केवल दो देशों का विवाद नहीं रह गया है। इसका सीधा असर मध्य पूर्व, वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ सकता है।
आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यदि दोनों पक्ष संयम नहीं बरतते, तो यह संघर्ष पूरे क्षेत्र को बड़े युद्ध की ओर धकेल सकता है। वहीं, यदि कूटनीतिक प्रयास सफल रहते हैं तो स्थिति दोबारा नियंत्रण में भी आ सकती है।
अमेरिका का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक व्यापारी जहाज पर हुए कथित ईरानी ड्रोन हमले के जवाब में यह सैन्य कार्रवाई की गई।
ईरान ने कुवैत और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन लगातार बढ़ता सैन्य तनाव वैश्विक चिंता का विषय बना हुआ है।
यदि होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावित होता है तो भारत के तेल आयात, ईंधन कीमतों और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में अनिश्चितता के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है।

