उज्जैन भूमि विवाद: CM मोहन यादव के परिवार की 335 एकड़ जमीन पर कांग्रेस के आरोप, सियासत गरमाई
मध्य प्रदेश की राजनीति में नया भूचाल
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों उज्जैन भूमि विवाद चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिवार से जुड़ी कथित 335 एकड़ जमीन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि मुख्यमंत्री के परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों ने बीते कुछ वर्षों में बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी, जिन क्षेत्रों में बाद में सरकारी विकास योजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की घोषणा हुई।
दूसरी ओर, बीजेपी ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है। इस विवाद ने राज्य की राजनीति में नया घमासान पैदा कर दिया है।
क्या है उज्जैन भूमि विवाद का पूरा मामला?
एक राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट के सामने आने के बाद यह मामला सुर्खियों में आया। रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उनकी पत्नी सीमा यादव, परिवार के अन्य सदस्य और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों के पास उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में करीब 335 एकड़ जमीन होने का दावा किया गया है।
कांग्रेस के अनुसार प्रमुख आरोप
- वर्ष 2021 से 2025 के बीच लगभग 253 एकड़ जमीन खरीदी गई।
- इनमें से करीब 168 एकड़ जमीन वर्ष 2024-25 में खरीदी गई बताई जा रही है।
- कई जमीनें उन क्षेत्रों में स्थित हैं जहां बाद में सड़क, हाईवे, रिंग रोड और अन्य विकास परियोजनाओं की घोषणा हुई।
- कांग्रेस ने इसे संभावित “इनसाइडर ट्रेडिंग” और पद के दुरुपयोग से जोड़कर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस का आरोप – ‘महाकाल की जमीन की लूट’
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री पर निशाना साधा।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जब भी किसी क्षेत्र के विकास या मास्टर प्लान से जुड़ी जानकारी सामने आने वाली होती थी, उससे पहले संबंधित इलाकों में जमीन खरीदी जाती थी। पार्टी का दावा है कि यह मामला केवल सामान्य निवेश नहीं बल्कि प्रभाव और जानकारी के दुरुपयोग से जुड़ा हो सकता है।
कांग्रेस ने इस पूरे प्रकरण को “महाकाल की जमीन की लूट” बताते हुए न्यायिक जांच की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग
कांग्रेस ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी वाली समिति से कराई जाए।
कांग्रेस ने उठाए ये सवाल
- इतनी बड़ी मात्रा में जमीन खरीदने के लिए धन का स्रोत क्या था?
- जमीनों की खरीद किस दर पर की गई?
- बाजार मूल्य और रजिस्ट्री मूल्य में कितना अंतर था?
- क्या सरकारी परियोजनाओं की जानकारी का लाभ उठाया गया?
पार्टी का कहना है कि जांच पूरी होने तक मुख्यमंत्री को नैतिक आधार पर पद छोड़ देना चाहिए।
बीजेपी का जवाब – राजनीतिक बदले की कार्रवाई
बीजेपी ने कांग्रेस के सभी आरोपों को खारिज कर दिया है।
पार्टी नेताओं का कहना है कि:
- मोहन यादव का परिवार लंबे समय से व्यापार और रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।
- जमीन की खरीद-फरोख्त निजी व्यावसायिक गतिविधियों का हिस्सा है।
- मुख्यमंत्री बनने के बाद किसी भी सरकारी पद का उपयोग निजी लाभ के लिए नहीं किया गया।
- विपक्ष लोकप्रिय ओबीसी चेहरे को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है।
CMO ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की ओर से जारी स्पष्टीकरण में कहा गया कि दिसंबर 2023 में मुख्यमंत्री बनने के बाद डॉ. मोहन यादव और उनकी पत्नी सीमा यादव ने अपने नाम पर कोई नई जमीन नहीं खरीदी है।
सीएमओ का दावा है कि विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और केवल राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से प्रचारित किए जा रहे हैं।
सिंहस्थ 2028 और उज्जैन मास्टर प्लान 2035 से जुड़ रहा मामला
इस विवाद का एक बड़ा पहलू उज्जैन विकास योजना 2035 और आगामी सिंहस्थ 2028 से भी जुड़ा है।
विवाद की मुख्य वजह
कांग्रेस का आरोप है कि जिन इलाकों में भविष्य में:
- रिंग रोड
- हाईवे
- कमर्शियल जोन
- रेजिडेंशियल विस्तार
- सिंहस्थ से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट
प्रस्तावित हैं, उन्हीं क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी गई।
हालांकि इन आरोपों पर अभी तक किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
कंपनियों की भूमिका पर भी सवाल
कांग्रेस ने कुछ निजी कंपनियों का भी उल्लेख किया है, जिनमें कथित तौर पर मुख्यमंत्री परिवार की हिस्सेदारी बताई जा रही है।
विपक्ष का आरोप है कि कंपनियों के माध्यम से भूमि अधिग्रहण किया गया। वहीं बीजेपी का कहना है कि निजी कंपनियों के व्यवसायिक लेनदेन को राजनीतिक रंग देना गलत है।
आगे क्या होगा?
उज्जैन भूमि विवाद अब मध्य प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है। कांग्रेस इसे भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग का मामला बता रही है, जबकि बीजेपी इसे वैध व्यावसायिक गतिविधि कह रही है।
आने वाले दिनों में यदि किसी जांच एजेंसी या न्यायिक समिति की एंट्री होती है तो यह मामला और अधिक चर्चा में आ सकता है। फिलहाल जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की नजर मुख्यमंत्री के अगले बयान और विपक्ष की रणनीति पर टिकी हुई है।

