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सुप्रीम कोर्ट की AI पर सख्त चेतावनी: बिना सत्यापन AI का इस्तेमाल न्याय के लिए ‘अदृश्य और खतरनाक’

कानूनी प्रक्रिया और न्याय व्यवस्था में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई चेतावनी को दर्शाता News Critic का एक न्यूज़ इंफोग्राफिक।
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नई दिल्ली

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर बेहद अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि AI से तैयार सामग्री का बिना सत्यापन उपयोग किया गया तो यह न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। अदालत ने इसे “अदृश्य, खतरनाक और विनाशकारी” बताते हुए कहा कि AI द्वारा तैयार नकली या मनगढ़ंत कानूनी उद्धरण न्यायिक निर्णयों की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

यह टिप्पणी उस समय आई जब सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के एक फैसले को रद्द कर दिया। अदालत ने पाया कि निर्णय में ऐसे कई कानूनी उद्धरण शामिल थे जो वास्तविक रूप से मौजूद ही नहीं थे।

NCLT का फैसला क्यों रद्द किया गया?

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने Essel Infraprojects Limited के दिवालियापन मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि NCLT ने छह ऐसे कानूनी फैसलों का हवाला दिया था जो या तो अस्तित्व में नहीं थे या फिर उनका संदर्भ पूरी तरह गलत था।

याचिकाकर्ता पूजा रमेश सिंह ने आरोप लगाया था कि AI-जनरेटेड सामग्री पर भरोसा करके ट्रिब्यूनल ने गलत फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को गंभीरता से लेते हुए NCLT और NCLAT दोनों के आदेश निरस्त कर दिए।

AI हेलुसिनेशन क्या है?

AI हेलुसिनेशन का मतलब

AI हेलुसिनेशन वह स्थिति होती है जब ChatGPT जैसे बड़े भाषा मॉडल (LLMs) ऐसी जानकारी तैयार कर देते हैं जो देखने में पूरी तरह सही लगती है, लेकिन वास्तव में वह गलत, काल्पनिक या अस्तित्वहीन होती है।

कानूनी मामलों में यदि ऐसे नकली उद्धरण या फैसलों का इस्तेमाल हो जाए तो इससे गलत न्यायिक निर्णय दिए जाने का खतरा बढ़ जाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम Court ने कहा कि AI का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन इसका इस्तेमाल केवल सहायक (Assistant Tool) के रूप में होना चाहिए।

अदालत ने स्पष्ट किया कि—

  • अंतिम निर्णय हमेशा इंसान ही ले।
  • हर AI आउटपुट का स्वतंत्र सत्यापन किया जाए।
  • AI पर आंख बंद करके भरोसा नहीं किया जा सकता।
  • न्यायिक प्रक्रिया में मानवीय निगरानी (Human Oversight) अनिवार्य रहेगी।

कोर्ट ने AI से तैयार नकली सामग्री की तुलना मिथाइल आइसोसाइनेट गैस रिसाव से करते हुए कहा कि इसका प्रभाव दिखाई नहीं देता, लेकिन यह न्याय व्यवस्था को अंदर से नुकसान पहुंचा सकता है।

AI के फायदे भी माने सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि AI कई क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो सकता है।

AI कहां मदद कर सकता है?

  • कानूनी रिसर्च
  • दस्तावेज तैयार करना
  • अनुवाद
  • केस मैनेजमेंट
  • प्रशासनिक कार्य
  • पुराने फैसलों की खोज

कोर्ट ने कहा कि बढ़ते मामलों के बीच AI कार्यक्षमता बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है, लेकिन इसे न्यायाधीश की जगह नहीं दी जा सकती।

AI के इस्तेमाल के लिए क्या होंगे नियम?

सुप्रीम कोर्ट पहले ही अदालतों में AI के उपयोग के लिए प्रारंभिक दिशा-निर्देश जारी कर चुका है।

इनमें प्रमुख बातें शामिल हैं—

AI आउटपुट केवल सलाहकारी होगा

AI द्वारा तैयार सामग्री अंतिम निर्णय का आधार नहीं बनेगी।

Human-in-the-loop अनिवार्य

हर स्तर पर इंसानी निगरानी जरूरी होगी।

Verification जरूरी

AI द्वारा दी गई हर जानकारी का स्वतंत्र सत्यापन करना होगा।

Disclosure आवश्यक

यदि किसी पक्ष ने AI का उपयोग किया है तो इसकी जानकारी देना आवश्यक हो सकता है।

सजा और फैसला AI नहीं देगा

Adjudication और Sentencing पूरी तरह मानवीय प्रक्रिया ही रहेगी।

दुनिया भर में बढ़ रही है चिंता

भारत अकेला ऐसा देश नहीं है जहां AI हेलुसिनेशन चिंता का विषय बना है।

अमेरिका, ब्रिटेन और कई अन्य देशों में ऐसे मामले सामने आए हैं जहां वकीलों ने AI द्वारा तैयार फर्जी केस लॉ अदालत में पेश कर दिए, जिसके बाद उन पर जुर्माना भी लगाया गया।

यही कारण है कि दुनिया भर की न्यायपालिकाएं AI के जिम्मेदार उपयोग पर नए नियम तैयार कर रही हैं।

विशेषज्ञ क्या मानते हैं?

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार AI न्यायिक प्रक्रिया को तेज बना सकता है, लेकिन इसके साथ कई चुनौतियां भी जुड़ी हैं।

इनमें शामिल हैं—

  • डेटा बायस
  • गलत जानकारी
  • गोपनीयता
  • जवाबदेही
  • पारदर्शिता

विशेषज्ञों का कहना है कि AI को केवल एक सहायक तकनीक के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए, न कि अंतिम निर्णय लेने वाले सिस्टम के रूप में।

भविष्य में क्या बदल सकता है?

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आने वाले समय में भारतीय न्यायपालिका में AI के उपयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।

संभावना है कि भविष्य में अदालतों, ट्रिब्यूनलों और वकीलों के लिए AI उपयोग संबंधी स्पष्ट दिशानिर्देश और सख्त नियम लागू किए जाएं ताकि तकनीक न्याय को मजबूत बनाए, कमजोर नहीं।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट का संदेश साफ है कि AI एक उपयोगी तकनीक है, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया में अंतिम भरोसा केवल मानव विवेक और सत्यापन पर ही होना चाहिए। बिना जांचे-परखे AI से तैयार सामग्री का उपयोग न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।

तकनीक का जिम्मेदार उपयोग ही भविष्य की न्यायिक व्यवस्था को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाएगा।

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