अमित शाह का कोलकाता दौरा: श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर होंगे शामिल, 125 फीट प्रतिमा का शिलान्यास संभव
कोलकाता पहुंचे अमित शाह, आज कई अहम कार्यक्रमों में लेंगे हिस्सा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता पहुंचे, जहां वे भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर आयोजित भव्य कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं। यह दौरा राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, अमित शाह शाम करीब 4 बजे कोलकाता एयरपोर्ट पहुंचने के बाद सबसे पहले भवानीपुर स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पैतृक आवास जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद वे प्रस्तावित 125 फीट ऊंची प्रतिमा की आधारशिला रख सकते हैं। हालांकि, प्रतिमा के स्थान को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
मुख्य समारोह में देंगे संबोधन, भाजपा नेताओं के साथ करेंगे बैठक
अमित शाह बिस्वा बांग्ला कन्वेंशन सेंटर या बिस्वा बांग्ला मेला ग्राउंड में आयोजित मुख्य स्मृति समारोह में भी शामिल होंगे। यहां वे कार्यकर्ताओं और आम जनता को संबोधित करेंगे।
संगठनात्मक बैठक भी रहेगी अहम
समारोह के बाद गृह मंत्री भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और प्रदेश पदाधिकारियों के साथ संगठनात्मक बैठक करेंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों, बूथ प्रबंधन और संगठन विस्तार पर चर्चा होगी।
कौन थे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी?
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को कोलकाता में हुआ था। वे प्रसिद्ध शिक्षाविद् सर आशुतोष मुखर्जी के पुत्र थे। मात्र 33 वर्ष की आयु में वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने।
उन्होंने स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में भी कार्य किया। वर्ष 1951 में उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जिसे आज की भारतीय जनता पार्टी का वैचारिक आधार माना जाता है।
अनुच्छेद 370 के विरोध से जुड़ा रहा उनका नाम
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर में लागू विशेष प्रावधानों का खुलकर विरोध किया था। उनका प्रसिद्ध नारा “एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे” आज भी व्यापक रूप से याद किया जाता है।
1953 में जम्मू-कश्मीर में बिना परमिट प्रवेश के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया था। बाद में श्रीनगर में हिरासत के दौरान उनका निधन हो गया, जिसकी परिस्थितियां लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रहीं।
125वीं जयंती पर दो वर्षों तक होंगे विशेष कार्यक्रम
केंद्र सरकार ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती को दो वर्षीय राष्ट्रीय कार्यक्रम के रूप में मनाने की योजना बनाई है। इसके तहत देशभर में कई सांस्कृतिक, शैक्षणिक और स्मृति कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
पश्चिम बंगाल सरकार ने भी उनके पैतृक आवास के संरक्षण, स्मारक परिसर के विकास और विशाल प्रतिमा निर्माण जैसी योजनाओं की घोषणा की है।
प्रतिमा से जुड़ी घटना के बाद बढ़ाई गई सुरक्षा
जयंती समारोह से पहले कोलकाता में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा के साथ कथित तोड़फोड़ की घटना सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। अमित शाह के पूरे दौरे के दौरान संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में क्यों अहम है यह दौरा?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार अमित शाह का यह दौरा केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। इसे आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है।
भाजपा लंबे समय से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विरासत को अपने वैचारिक अभियान का प्रमुख आधार मानती रही है। ऐसे में यह दौरा कार्यकर्ताओं के मनोबल और चुनावी तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने भी दी श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए देश निर्माण में उनके योगदान को याद किया। भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें नमन किया।
निष्कर्ष
अमित शाह का कोलकाता दौरा केवल एक स्मृति समारोह नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीतिक तस्वीर और भाजपा की भविष्य की रणनीति का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों के जरिए उनकी विचारधारा और योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

