भोपाल में बिजली कर्मचारियों का ई-अटेंडेंस विरोध: पुरानी बायोमेट्रिक व्यवस्था बहाल करने की मांग
भोपाल में मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (MPMKVVCL) के करीब 20 हजार कर्मचारियों ने नई ई-अटेंडेंस व्यवस्था का विरोध शुरू कर दिया है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मोबाइल आधारित फिंगरप्रिंट वेरिफिकेशन सिस्टम कई कर्मचारियों के लिए व्यावहारिक नहीं है। उनका आरोप है कि इससे हजारों कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाएगी और वेतन कटने का खतरा पैदा हो गया है।
कर्मचारी संगठनों ने कंपनी प्रबंधन से पुरानी बायोमेट्रिक मशीनों को दोबारा चालू करने और नई व्यवस्था तत्काल वापस लेने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
नई ई-अटेंडेंस व्यवस्था पर क्यों बढ़ा विवाद?
कर्मचारी संगठनों के अनुसार कंपनी ने मोबाइल आधारित फिंगरप्रिंट वेरिफिकेशन प्रणाली लागू कर दी है। इस व्यवस्था में केवल उन्हीं कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज होगी जिनके पास फिंगरप्रिंट सपोर्ट करने वाला नया एंड्रॉयड स्मार्टफोन उपलब्ध है।
संगठन का कहना है कि पुराने एंड्रॉयड 9 और 10 संस्करण वाले मोबाइल अब स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। ऐसे में जिन कर्मचारियों के पास नया स्मार्टफोन नहीं है, उनकी हाजिरी दर्ज नहीं होगी।
कर्मचारियों की सबसे बड़ी चिंता
वेतन कटने का खतरा
आउटसोर्स कर्मचारियों का कहना है कि यदि उपस्थिति दर्ज नहीं होगी तो उनके वेतन पर सीधा असर पड़ेगा। अधिकांश कर्मचारी सीमित वेतन पर कार्य करते हैं और नया स्मार्टफोन खरीदना उनके लिए आसान नहीं है।
बिना लिखित आदेश लागू हुआ नियम
संगठन का आरोप है कि नई व्यवस्था किसी आधिकारिक लिखित आदेश के बजाय केवल मौखिक निर्देशों के आधार पर लागू की गई है। इससे कर्मचारियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
65 लाख रुपये की बायोमेट्रिक मशीनें क्यों नहीं हो रहीं इस्तेमाल?
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि कंपनी पहले ही करीब 65 लाख रुपये खर्च कर बायोमेट्रिक थंब इम्प्रेशन और आई-स्कैन मशीनें खरीद चुकी है। ये मशीनें विभिन्न कार्यालयों और उपकेंद्रों में उपलब्ध हैं, लेकिन वर्तमान में उनका उपयोग नहीं किया जा रहा।
संगठन की मांग है कि नई मोबाइल आधारित व्यवस्था लागू करने के बजाय इन्हीं मशीनों को दोबारा शुरू किया जाए।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
नई ई-अटेंडेंस व्यवस्था वापस ली जाए
मोबाइल आधारित उपस्थिति प्रणाली को तत्काल समाप्त किया जाए।
पुरानी बायोमेट्रिक मशीनें दोबारा चालू हों
पहले से उपलब्ध बायोमेट्रिक मशीनों का उपयोग फिर से शुरू किया जाए।
कर्मचारियों पर आर्थिक बोझ न डाला जाए
नया मोबाइल खरीदने की अनिवार्यता समाप्त की जाए।
लिखित आदेश के बिना नियम लागू न हों
भविष्य में किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले स्पष्ट लिखित आदेश जारी किए जाएं।
आउटसोर्स कर्मचारियों को सबसे ज्यादा परेशानी
बिजली विभाग में बड़ी संख्या में आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें लाइनमैन, मीटर रीडर और कार्यालय कर्मचारी शामिल हैं।
फील्ड में कार्य करने वाले कर्मचारियों का कहना है कि कई ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट नेटवर्क कमजोर रहता है। ऐसे में मोबाइल आधारित उपस्थिति दर्ज करना व्यावहारिक नहीं है।
पहले भी हो चुका है विरोध
मध्य प्रदेश में ई-अटेंडेंस को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुके हैं। स्कूल शिक्षा विभाग में “हमारे शिक्षक” ऐप को लेकर भी शिक्षकों ने नेटवर्क, मोबाइल और डेटा खर्च जैसी समस्याएं उठाई थीं।
अब बिजली कर्मचारियों ने भी लगभग वही समस्याएं सामने रखी हैं।
कंपनी का क्या है पक्ष?
फिलहाल बिजली कंपनी की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
सूत्रों के अनुसार, ई-अटेंडेंस व्यवस्था पारदर्शिता बढ़ाने और अनुपस्थिति पर नियंत्रण रखने के उद्देश्य से लागू की गई है। हालांकि कर्मचारी संगठन इसे कर्मचारी हितों के खिलाफ बता रहे हैं।
आगे क्या होगा?
कर्मचारी संगठनों ने कंपनी प्रबंधन को ज्ञापन सौंप दिया है।
यदि अगले 7 से 10 दिनों में उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो भोपाल में बड़ा धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जा सकता है। अन्य बिजली वितरण कंपनियों के कर्मचारी भी इस आंदोलन में शामिल हो सकते हैं।
निष्कर्ष
भोपाल में बिजली कर्मचारियों का ई-अटेंडेंस विवाद केवल उपस्थिति दर्ज करने तक सीमित नहीं है। यह कर्मचारियों की सुविधा, तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता और कार्यस्थल की व्यवहारिक चुनौतियों से जुड़ा मुद्दा बन गया है।
यदि कंपनी प्रबंधन और कर्मचारी संगठनों के बीच जल्द सहमति नहीं बनती है तो इसका असर बिजली व्यवस्था और विभागीय कार्यप्रणाली पर भी पड़ सकता है।

