नेतन्याहू के बयान से भारत-इजरायल रिश्तों की वैश्विक चर्चा तेज, जानिए क्यों मजबूत हो रही है यह रणनीतिक साझेदारी
नई दिल्ली/यरुशलम
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के एक हालिया बयान ने भारत और इजरायल के रिश्तों को फिर से अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के अलावा भारत भी इजरायल का एक मजबूत और भरोसेमंद मित्र है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब मध्य पूर्व में तनाव, ईरान के साथ टकराव और वैश्विक आलोचनाओं के बीच इजरायल को नए रणनीतिक सहयोगियों की आवश्यकता महसूस हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नेतन्याहू का यह बयान दोनों देशों के बीच लगातार मजबूत हो रहे रक्षा, व्यापार और तकनीकी सहयोग को भी दर्शाता है।
नेतन्याहू ने भारत को लेकर क्या कहा?
फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल के पास अमेरिका के अलावा भारत जैसा मजबूत दोस्त भी है। उन्होंने भारतीयों के समर्थन का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में इजरायल के प्रति सकारात्मक भावना देखने को मिलती है।
इससे पहले भी वेस्ट बैंक में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने भारत को “एक बड़ी वैश्विक शक्ति” बताते हुए दोनों देशों के बीच मजबूत जनसमर्थन की बात कही थी।
मोदी-नेतन्याहू की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी
यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के कुछ महीनों बाद सामने आया है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” के स्तर तक मजबूत करने पर सहमति जताई।
बैठक के दौरान रक्षा, व्यापार, कृषि, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्टार्टअप, नवाचार और तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। साथ ही मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
भारत-इजरायल संबंधों का इतिहास
1950 से 1992 तक का सफर
भारत ने 1950 में इजरायल को मान्यता दे दी थी, लेकिन दोनों देशों के बीच पूर्ण राजनयिक संबंध 1992 में स्थापित हुए। इसके बाद द्विपक्षीय सहयोग लगातार बढ़ता गया।
रक्षा क्षेत्र में सबसे मजबूत साझेदारी
आज इजरायल भारत के प्रमुख रक्षा साझेदारों में शामिल है। मिसाइल सिस्टम, ड्रोन, रडार, साइबर सुरक्षा, खुफिया सहयोग और आतंकवाद विरोधी अभियानों में दोनों देशों का सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
कारगिल युद्ध के दौरान इजरायल की रक्षा सहायता ने दोनों देशों के संबंधों को नई मजबूती दी थी। वर्तमान में दोनों देश रक्षा उपकरणों के संयुक्त उत्पादन और “मेक इन इंडिया” परियोजनाओं पर भी काम कर रहे हैं।
व्यापार, कृषि और तकनीक में बढ़ता सहयोग
भारत और इजरायल के बीच व्यापार पिछले तीन दशकों में कई गुना बढ़ चुका है। दोनों देश हीरा व्यापार, रसायन, मशीनरी, कृषि, जल प्रबंधन और हाई-टेक उद्योगों में सहयोग कर रहे हैं।
इजरायल की ड्रिप इरिगेशन और आधुनिक जल प्रबंधन तकनीक ने भारतीय कृषि को नई दिशा दी है। वहीं AI, साइबर सुरक्षा, स्पेस टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप इकोसिस्टम में भी साझेदारी तेजी से मजबूत हो रही है।
वैश्विक राजनीति में भारत की संतुलित भूमिका
मध्य पूर्व में जारी संघर्षों के बीच भारत संतुलित विदेश नीति अपनाता रहा है। भारत एक ओर फिलिस्तीन के लिए दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता है, वहीं दूसरी ओर इजरायल के साथ रक्षा और रणनीतिक संबंधों को भी मजबूत बनाए हुए है।
यही संतुलन भारत को वैश्विक कूटनीति में एक महत्वपूर्ण और विश्वसनीय साझेदार बनाता है।
भविष्य में किन क्षेत्रों में बढ़ सकता है सहयोग?
आने वाले वर्षों में भारत और इजरायल इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा सकते हैं—
- रक्षा और रक्षा निर्माण
- साइबर सुरक्षा
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
- सेमीकंडक्टर
- स्पेस टेक्नोलॉजी
- नवीकरणीय ऊर्जा
- कृषि एवं जल प्रबंधन
- मुक्त व्यापार समझौता (FTA)
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि FTA पर सहमति बनती है, तो दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश में बड़ी वृद्धि हो सकती है।
निष्कर्ष
बेंजामिन नेतन्याहू का हालिया बयान केवल एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि भारत और इजरायल के बीच गहराते रणनीतिक संबंधों का संकेत माना जा रहा है। रक्षा, व्यापार, तकनीक, कृषि और वैश्विक कूटनीति में दोनों देशों का सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। आने वाले वर्षों में यह साझेदारी न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को नई मजबूती देगी, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति में भी अहम भूमिका निभा सकती है।

