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PM मोदी का बड़ा ऐलान: इंडोनेशिया में खुलेगा IIM बेंगलुरु का पहला विदेशी कैंपस, ASEAN छात्रों को मिलेगा बड़ा फायदा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशियाई राष्ट्रपति की तस्वीर के साथ 'IIM बेंगलुरु का पहला विदेशी परिसर इंडोनेशिया में खुलेगा' की बड़ी घोषणा दर्शाता न्यूज़ ग्राफ़िक, जिसमें IIMB की इमारत, दोनों देशों का नक्शा और इस ऐतिहासिक सहयोग के लाभ बताए गए हैं। (News Critic)
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जकार्ता | 8 जुलाई 2026

भारत की उच्च शिक्षा को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया में IIM बेंगलुरु के पहले विदेशी कैंपस की घोषणा की है। यह ऐतिहासिक पहल भारत की नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के अंतरराष्ट्रीयकरण के लक्ष्य को मजबूती देगी और ASEAN देशों के छात्रों को विश्वस्तरीय भारतीय प्रबंधन शिक्षा उपलब्ध कराएगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा कि IIM बेंगलुरु का नया परिसर पूरे ASEAN क्षेत्र के युवाओं के लिए उच्च गुणवत्ता वाली प्रबंधन शिक्षा का नया केंद्र बनेगा।

इंडोनेशिया में कहां बनेगा IIM बेंगलुरु का कैंपस?

IIM बेंगलुरु का पहला विदेशी परिसर सिंगहासारी स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ), मलंग, पूर्वी जावा में स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना को लेकर IIM बेंगलुरु और SEZ सिंगहासारी के बीच पहले ही समझौता (MoU) हो चुका है।

यह पहल भारत और इंडोनेशिया के बीच शिक्षा, तकनीक और कौशल विकास सहयोग को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।

दो चरणों में शुरू होगा कैंपस

पहला चरण: Executive Education Programmes

शुरुआत में वरिष्ठ अधिकारियों, उद्योग जगत के पेशेवरों और नेतृत्व भूमिकाओं में कार्यरत लोगों के लिए अल्पकालिक Executive Education Programmes शुरू किए जाएंगे।

इन कार्यक्रमों में शामिल होंगे—

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
  • डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन
  • ग्लोबल सप्लाई चेन
  • क्लाइमेट और सस्टेनेबिलिटी
  • हेल्थकेयर मैनेजमेंट
  • लीडरशिप और बिजनेस स्ट्रैटेजी

दूसरा चरण: डिग्री प्रोग्राम

दूसरे चरण में पूर्णकालिक डिग्री कोर्स शुरू किए जाएंगे। छात्रों को IIM बेंगलुरु के ऑनलाइन पाठ्यक्रमों और SWAYAM प्लेटफॉर्म की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिलेगी नई मजबूती

प्रधानमंत्री मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच AI, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, टेलीकॉम, स्टार्टअप, स्पेस रिसर्च और शिक्षा समेत कई क्षेत्रों में समझौते हुए।

विशेषज्ञों का मानना है कि IIM बेंगलुरु का विदेशी कैंपस दोनों देशों के बीच People-to-People Connect को और मजबूत करेगा तथा संयुक्त शोध, फैकल्टी एक्सचेंज और छात्र आदान-प्रदान को बढ़ावा देगा।

NEP 2020 के लक्ष्य को मिलेगी रफ्तार

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का प्रमुख उद्देश्य भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। IIM बेंगलुरु का यह विदेशी परिसर उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

इससे भारतीय शिक्षा प्रणाली की अंतरराष्ट्रीय पहचान बढ़ेगी और भारत की सॉफ्ट पावर भी मजबूत होगी।

ASEAN छात्रों को क्या होगा फायदा?

विश्वस्तरीय भारतीय मैनेजमेंट शिक्षा

ASEAN देशों के छात्रों को भारत आए बिना IIM बेंगलुरु की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी।

रोजगार के बेहतर अवसर

उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तैयार किए गए पाठ्यक्रम छात्रों को वैश्विक नौकरी बाजार के लिए तैयार करेंगे।

स्टार्टअप और नवाचार को मिलेगा बढ़ावा

भारत और इंडोनेशिया के बीच स्टार्टअप सहयोग, डिजिटल इकोनॉमी और उद्यमिता को नई गति मिलेगी।

IIM बेंगलुरु क्यों है खास?

1973 में स्थापित IIM बेंगलुरु भारत के सबसे प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थानों में शामिल है। यह संस्थान रिसर्च, इनोवेशन, मैनेजमेंट एजुकेशन और नेतृत्व विकास के क्षेत्र में वैश्विक पहचान रखता है।

IIM बेंगलुरु लगातार अंतरराष्ट्रीय बिजनेस स्कूल रैंकिंग में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराता रहा है और SWAYAM प्लेटफॉर्म पर मैनेजमेंट शिक्षा का प्रमुख संस्थान भी है।

भारत की शिक्षा को मिलेगा वैश्विक विस्तार

विशेषज्ञों का मानना है कि इंडोनेशिया में IIM बेंगलुरु का कैंपस भारत की शिक्षा को वैश्विक स्तर पर नई पहचान देगा। आने वाले समय में अन्य भारतीय प्रबंधन संस्थान भी विदेशी परिसरों की स्थापना पर विचार कर सकते हैं।

यह पहल भारत को वैश्विक शिक्षा केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

निष्कर्ष

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इंडोनेशिया में IIM बेंगलुरु के पहले विदेशी कैंपस की घोषणा भारत की उच्च शिक्षा के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे न केवल भारत और इंडोनेशिया के रिश्ते मजबूत होंगे, बल्कि ASEAN क्षेत्र के हजारों छात्रों को विश्वस्तरीय भारतीय प्रबंधन शिक्षा का लाभ मिलेगा। यह कदम शिक्षा, नवाचार, कौशल विकास और आर्थिक सहयोग के नए अवसर भी पैदा करेगा।

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