मध्य प्रदेश UCC ड्राफ्ट को कैबिनेट की मंजूरी, बहुविवाह और ‘निकाह हलाला’ पर रोक; ST समुदाय रहेगा दायरे से बाहर
मध्य प्रदेश UCC ड्राफ्ट को राज्य मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है। सरकार का कहना है कि प्रस्तावित यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक कानूनों में समानता लाना है। ड्राफ्ट में बहुविवाह और ‘निकाह हलाला’ जैसी प्रथाओं पर रोक लगाने का प्रावधान किया गया है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित कानून के दायरे से अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय को बाहर रखा गया है। अब इस ड्राफ्ट को आगे की विधायी प्रक्रिया के लिए विधानसभा में पेश किया जाएगा।
मध्य प्रदेश UCC ड्राफ्ट में क्या हैं प्रमुख प्रावधान?
कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद प्रस्तावित ड्राफ्ट के कई प्रमुख बिंदु सामने आए हैं। सरकार का दावा है कि यह कानून सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक अधिकार सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।
प्रमुख प्रस्ताव
- बहुविवाह पर प्रतिबंध।
- ‘निकाह हलाला’ जैसी प्रथाओं पर रोक।
- विवाह और तलाक से जुड़े समान नियम।
- उत्तराधिकार और संपत्ति के मामलों में समान व्यवस्था।
- लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण का प्रावधान।
- महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को मजबूत करने पर जोर।
ST समुदाय को क्यों रखा गया दायरे से बाहर?
सरकार ने कहा है कि संविधान में अनुसूचित जनजातियों के पारंपरिक रीति-रिवाजों और सामाजिक व्यवस्थाओं को विशेष संरक्षण प्राप्त है। इसी कारण ST समुदाय को प्रस्तावित UCC के दायरे से बाहर रखा गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय संविधान के प्रावधानों और जनजातीय परंपराओं को ध्यान में रखकर लिया गया है।
बहुविवाह और ‘निकाह हलाला’ पर प्रस्तावित रोक
क्या होगा असर?
ड्राफ्ट में बहुविवाह और ‘निकाह हलाला’ पर रोक लगाने का प्रस्ताव शामिल है। यदि यह कानून विधानसभा से पारित होकर लागू होता है, तो इन प्रावधानों का पालन राज्य में कानून के अनुसार अनिवार्य होगा।
सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और समान नागरिक व्यवस्था को मजबूत करना है।
लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी प्रावधान
प्रस्तावित ड्राफ्ट में लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण से संबंधित प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। सरकार का तर्क है कि इससे ऐसे संबंधों में रहने वाले लोगों के अधिकारों और कानूनी सुरक्षा को स्पष्ट किया जा सकेगा।
हालांकि, अंतिम स्वरूप विधानसभा में चर्चा और पारित होने की प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।
सरकार का क्या कहना है?
राज्य सरकार के अनुसार UCC का उद्देश्य किसी धर्म विशेष को प्रभावित करना नहीं, बल्कि नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था उपलब्ध कराना है। सरकार ने इसे सामाजिक न्याय और समान अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
सरकार का यह भी कहना है कि ड्राफ्ट तैयार करते समय विभिन्न कानूनी पहलुओं और विशेषज्ञों की राय को ध्यान में रखा गया है।
आगे क्या होगी प्रक्रिया?
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब प्रस्तावित UCC ड्राफ्ट को विधानसभा में पेश किया जाएगा। वहां इस पर विस्तृत चर्चा होगी और विधेयक पारित होने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
यदि विधानसभा से इसे मंजूरी मिलती है और राज्यपाल की स्वीकृति प्राप्त होती है, तब यह कानून लागू किया जा सकेगा।
UCC को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा
देश के कई राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर बहस जारी है। कुछ राज्य इस दिशा में कदम उठा चुके हैं, जबकि अन्य राज्यों में भी इस विषय पर चर्चा हो रही है।
मध्य प्रदेश का यह फैसला राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक और कानूनी चर्चा का विषय बन सकता है।
विपक्ष और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
कैबिनेट के फैसले के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों और कानूनी विशेषज्ञों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। कुछ इसे समान नागरिक अधिकारों की दिशा में सकारात्मक कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ पक्ष इसके विभिन्न प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा की आवश्यकता जता रहे हैं।
अंतिम कानूनी स्थिति विधानसभा की बहस और विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश UCC ड्राफ्ट को कैबिनेट की मंजूरी मिलना राज्य की विधायी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रस्तावित ड्राफ्ट में बहुविवाह और ‘निकाह हलाला’ पर रोक, लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण और समान नागरिक व्यवस्था जैसे प्रावधान शामिल हैं, जबकि ST समुदाय को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। अब सभी की नजर विधानसभा की कार्यवाही पर होगी, जहां इस विधेयक पर चर्चा और अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

