कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ के लिए साय सरकार और UNICEF मिलकर बनाएंगे मास्टर प्लान, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दिए अहम निर्देश
छत्तीसगढ़ को कुपोषण मुक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर राज्य सरकार और यूनिसेफ (UNICEF) मिलकर एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार करेंगे। इस योजना का उद्देश्य बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं में कुपोषण की समस्या को कम करना, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाना और पोषण संबंधी योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाना है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राज्य में कुपोषण के खिलाफ चल रहे सभी कार्यक्रमों की समीक्षा कर एक समन्वित रणनीति तैयार की जाए। सरकार का लक्ष्य केवल कुपोषण के मामलों को कम करना ही नहीं, बल्कि दीर्घकालिक और टिकाऊ समाधान विकसित करना भी है।
कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान को मिलेगी नई दिशा
राज्य सरकार का मानना है कि कुपोषण केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास से भी जुड़ा हुआ मुद्दा है। इसी सोच के साथ सरकार ने यूनिसेफ जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्था के सहयोग से एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने का निर्णय लिया है।
यह मास्टर प्लान विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगा और पोषण से जुड़ी योजनाओं को अधिक प्रभावी तरीके से लागू करने में मदद करेगा। इसके तहत स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, पंचायत और ग्रामीण विकास जैसे विभाग मिलकर काम करेंगे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में कहा कि राज्य के प्रत्येक बच्चे को बेहतर पोषण और स्वस्थ जीवन का अधिकार है। उन्होंने निर्देश दिए कि कुपोषण से प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां विशेष अभियान चलाए जाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने समय-समय पर निगरानी और मूल्यांकन की व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया।
UNICEF की क्या होगी भूमिका?
यूनिसेफ इस मास्टर प्लान को तैयार करने में तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा। संस्था पोषण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, व्यवहार परिवर्तन, डेटा विश्लेषण और निगरानी प्रणाली को मजबूत बनाने में अपनी विशेषज्ञता साझा करेगी।
इसके अलावा यूनिसेफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाए गए सफल मॉडल और सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को भी राज्य सरकार के साथ साझा करेगा, ताकि उन्हें स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार लागू किया जा सके।
मास्टर प्लान में किन क्षेत्रों पर रहेगा फोकस?
सरकार द्वारा तैयार किए जाने वाले मास्टर प्लान में कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी।
इनमें शामिल हैं—
- बच्चों में कुपोषण की समय पर पहचान।
- गर्भवती और धात्री महिलाओं के पोषण में सुधार।
- आंगनबाड़ी सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना।
- संतुलित आहार और पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाना।
- स्वास्थ्य जांच और नियमित निगरानी।
- दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में विशेष अभियान।
- डेटा आधारित योजना और मूल्यांकन प्रणाली।
इन उपायों का उद्देश्य राज्य में कुपोषण की दर को लगातार कम करना है।
कुपोषण से निपटना क्यों है जरूरी?
कुपोषण बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर गंभीर प्रभाव डालता है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा भविष्य की उत्पादकता पर भी असर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शुरुआती वर्षों में बच्चों को उचित पोषण मिल जाए तो कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है। इसलिए सरकार का यह कदम दीर्घकालिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राज्य सरकार की मौजूदा योजनाएं
छत्तीसगढ़ सरकार पहले से ही पोषण सुधार के लिए कई योजनाएं संचालित कर रही है। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और महिलाओं को पूरक पोषण उपलब्ध कराया जा रहा है।
इसके अलावा नियमित स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण, आयरन और फोलिक एसिड की उपलब्धता, पोषण अभियान और जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। नया मास्टर प्लान इन सभी प्रयासों को और अधिक संगठित रूप देगा।
ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान
राज्य के कई दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में कुपोषण की चुनौती अपेक्षाकृत अधिक है। ऐसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने, पोषण आहार की उपलब्धता सुनिश्चित करने और स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का कोई भी बच्चा या महिला पोषण संबंधी सुविधाओं से वंचित न रहे।
विशेषज्ञों की राय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कुपोषण से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए केवल चिकित्सा सुविधाएं पर्याप्त नहीं होतीं। इसके लिए स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल, शिक्षा, पोषण जागरूकता और सामाजिक भागीदारी भी आवश्यक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार और यूनिसेफ मिलकर दीर्घकालिक रणनीति लागू करते हैं, तो इसका सकारात्मक असर आने वाले वर्षों में देखने को मिल सकता है।
आगे की रणनीति
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद संबंधित विभाग यूनिसेफ के साथ मिलकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेंगे। इसके बाद विभिन्न जिलों की जरूरतों के अनुसार चरणबद्ध तरीके से इसे लागू किया जाएगा।
नियमित समीक्षा, डेटा विश्लेषण और जमीनी स्तर पर निगरानी के जरिए योजना की प्रगति का मूल्यांकन किया जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर समय रहते सुधार किए जा सकें।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए राज्य सरकार और यूनिसेफ का संयुक्त मास्टर प्लान एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशों के बाद इस दिशा में व्यापक रणनीति तैयार करने की प्रक्रिया तेज हो गई है।
यदि यह योजना प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ राज्य के समग्र सामाजिक विकास को भी नई गति मिल सकती है।

