सनातन को लेकर दिए बयान पर उदयनिधि स्टालिन को किसी भी प्रकार की राहत का महाराष्ट्र सरकार ने किया विरोध
तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सितम्बर 2023 में सनातन धर्म की तुलना डेंगू और मलेरिया से करते हुए इसे समाप्त करने की बात कही थी। जिससे व्यापक विवाद उत्पन्न हुआ। स्टालिन के इस बयान के बाद महाराष्ट्र, बिहार, जम्मू-कश्मीर और कर्नाटक सहित कई राज्यों में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गयी थी।
अदालत द्वारा गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण
उदयनिधि स्टालिन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर विभिन्न राज्यों में दर्ज एफआईआर को एक साथ जोड़ने की मांग की थी। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि बिना उसकी अनुमति के उनके खिलाफ कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। साथ ही अदालत ने उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण भी प्रदान किया है।
सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उदयनिधि स्टालिन को किसी भी प्रकार की राहत देने का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि यदि किसी नेता ने इस्लाम को मिटाने की बात कही होती, तो अब तक गंभीर प्रतिक्रिया होती। उन्होंने कहा कि किसी समुदाय की शांतिप्रियता का यह मतलब नहीं होना चाहिए कि उसके खिलाफ कही गयी बातों को मांफ कर दिया जाये।
मांफी मांगने से किया इंकार
उदयनिधि स्टालिन ने अपने बयान पर मांफी मांगने से इंकार किया है। उन्होंने कहा कि उनके शब्दों का उद्देश्य महिलाओं के प्रति कथित दमनकारी प्रथाओं को सम्बोधित करना था और उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
उदयनिधि की तरफ से पेश वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल कोर्ट के बाहर के लोगों को सुनाने के लिए ऐसे बयान दे रहे हैं। उदयनिधि को राहत देने पर सिंघवी ने कहा कि नूपुर शर्मा ने भी एक धर्म के बारे में विवादित बातें कही थीं, कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी। मोहम्मद जुबैर और अर्णव गोस्वामी जैसे लोगों को भी सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। उसी तरह उदयनिधि को भी राहत मिलनी चाहिए।

