तृषा पर कथित टिप्पणी मामले में उदयनिधि स्टालिन से पूछताछ, मद्रास हाई कोर्ट ने रिहाई के दिए निर्देश
छह धाराओं में मामला दर्ज, पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया
तमिलनाडु की राजनीति में मंगलवार को उस समय हलचल मच गई, जब डीएमके नेता और तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन को अभिनेत्री तृषा पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े मामले में पुलिस ने पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। इस मामले में उनके खिलाफ छह अलग-अलग धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जा रही है और सभी तथ्यों की विस्तार से पड़ताल की जाएगी।
उदयनिधि स्टालिन को हिरासत में लिए जाने के बाद मामला मद्रास हाई कोर्ट पहुंचा। अदालत में सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। इसके बाद हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि जांच एजेंसियां आवश्यक पूछताछ कर सकती हैं, लेकिन पूछताछ पूरी होने के बाद उदयनिधि स्टालिन को रिहा कर दिया जाना चाहिए।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल उन्हें न्यायिक हिरासत या रिमांड पर भेजने की आवश्यकता नहीं दिखाई देती। यह आदेश सरकारी वकील की ओर से अदालत में दी गई जानकारी के आधार पर दिया गया।
सरकार का पक्ष: जांच के लिए पूछताछ जरूरी, गिरफ्तारी की योजना नहीं
सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि पुलिस का उद्देश्य उदयनिधि स्टालिन को औपचारिक रूप से गिरफ्तार करना नहीं है। उन्होंने कहा कि यह मामला एक महिला की गरिमा और सम्मान से जुड़ा हुआ है, इसलिए कानूनी प्रक्रिया के तहत उनसे पूछताछ करना आवश्यक माना गया।
सरकारी पक्ष ने यह भी बताया कि घटना तंजावुर जिले से संबंधित है। इसी वजह से जांच एजेंसियां उन्हें वहां ले जाकर मामले से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटा रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ का उद्देश्य केवल जांच को आगे बढ़ाना है और इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने की कोई योजना नहीं है।
सरकारी वकील ने अदालत को भरोसा दिलाया कि पूरी प्रक्रिया कानून के दायरे में रहकर की जाएगी और जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि पुलिस केवल मामले के सभी पहलुओं को स्पष्ट करना चाहती है ताकि जांच सही दिशा में पूरी हो सके।
हाई कोर्ट ने जांच और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच बनाया संतुलन
सरकारी पक्ष की दलीलें सुनने के बाद मद्रास हाई कोर्ट ने कहा कि पुलिस को जांच करने और आवश्यक पूछताछ करने का अधिकार है, लेकिन यह प्रक्रिया अनावश्यक रूप से लंबी नहीं होनी चाहिए। अदालत ने निर्देश दिया कि पूछताछ समाप्त होने के बाद उदयनिधि स्टालिन को तुरंत रिहा किया जाए।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान परिस्थितियों में उन्हें रिमांड पर भेजने की आवश्यकता नहीं है। अदालत का मानना था कि यदि जांच के लिए जरूरी जानकारी पूछताछ के दौरान प्राप्त हो जाती है, तो आगे की कानूनी कार्रवाई कानून के अनुसार की जा सकती है।
इस पूरे मामले ने तमिलनाडु की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। एक ओर विपक्ष इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर जांच एजेंसियों का कहना है कि वे केवल कानून के अनुसार अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं।
अब इस मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस जांच और उससे सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामले में आगे कौन-कौन से कानूनी कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल मद्रास हाई कोर्ट के निर्देश के अनुसार पूछताछ समाप्त होने के बाद उदयनिधि स्टालिन को रिहा किया जाएगा, जबकि जांच प्रक्रिया कानून के मुताबिक जारी रहेगी।

