अनुच्छेद 370 हटने की 7वीं बरसी पर जम्मू-कश्मीर में प्रदर्शन, मेहबूबा मुफ्ती समेत कई नेताओं ने निकाला कैंडल मार्च
अनुच्छेद 370 हटने की 7वीं बरसी के मौके पर जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों ने अपने-अपने तरीके से कार्यक्रम आयोजित किए। इस दौरान पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) प्रमुख मेहबूबा मुफ्ती समेत कई नेताओं ने प्रदर्शन और कैंडल मार्च में हिस्सा लिया। संभावित विरोध-प्रदर्शनों को देखते हुए प्रशासन ने कई संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी।
5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए के अधिकांश प्रावधानों को समाप्त करने का निर्णय लिया था। इसके बाद राज्य का पुनर्गठन करते हुए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया गया। इस फैसले की सातवीं बरसी पर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई।
7वीं बरसी पर विभिन्न दलों ने किए अलग-अलग कार्यक्रम
जम्मू-कश्मीर में कई राजनीतिक दलों ने इस दिन को अलग-अलग तरीके से मनाया। कुछ दलों ने इसे ऐतिहासिक फैसला बताते हुए विकास और एकीकरण का प्रतीक कहा, जबकि कुछ विपक्षी दलों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा बताते हुए विरोध दर्ज कराया।
इसी क्रम में कई स्थानों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन, सभाएं और कैंडल मार्च आयोजित किए गए। प्रशासन ने कार्यक्रमों पर नजर बनाए रखी ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।
मेहबूबा मुफ्ती ने किया प्रदर्शन
पीडीपी प्रमुख मेहबूबा मुफ्ती ने समर्थकों के साथ प्रदर्शन किया और कैंडल मार्च में भाग लिया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर अपनी राजनीतिक राय दोहराई और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की।
उनके अलावा अन्य क्षेत्रीय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी विभिन्न स्थानों पर विरोध कार्यक्रम आयोजित किए।
सुरक्षा व्यवस्था क्यों की गई कड़ी?
अनुच्छेद 370 हटने की 7वीं बरसी को देखते हुए प्रशासन ने पहले से ही व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई।
मुख्य बाजारों, सार्वजनिक स्थलों और महत्वपूर्ण सरकारी परिसरों के आसपास निगरानी बढ़ाई गई। कई स्थानों पर वाहनों की जांच भी की गई ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी
सुरक्षा एजेंसियों ने प्रमुख चौक-चौराहों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह एहतियाती कदम के रूप में की गई थी।
प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील भी की।
अनुच्छेद 370 क्या था?
अनुच्छेद 370 भारतीय संविधान का एक विशेष प्रावधान था, जिसके तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्राप्त था। इसके तहत राज्य को कुछ मामलों में अलग संवैधानिक अधिकार और विशेष व्यवस्थाएं मिली हुई थीं।
5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने इस विशेष दर्जे को समाप्त करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही अनुच्छेद 35ए के अधिकांश प्रावधान भी प्रभावहीन हो गए।
पुनर्गठन के बाद क्या बदलाव हुए?
अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन किया गया। इसके तहत—
- जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया।
- लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिला।
- कई केंद्रीय कानून जम्मू-कश्मीर में लागू हुए।
- प्रशासनिक ढांचे में बदलाव किए गए।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं फिर हुईं तेज
बरसी के अवसर पर विभिन्न राजनीतिक दलों ने अलग-अलग बयान जारी किए। कुछ दलों ने इसे राष्ट्रीय एकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
वहीं कुछ क्षेत्रीय दलों ने कहा कि वे जम्मू-कश्मीर से जुड़े संवैधानिक और राजनीतिक मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाते रहेंगे।
केंद्र और विपक्ष के अलग-अलग दृष्टिकोण
इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और विपक्षी दलों के विचार पहले की तरह अलग-अलग बने हुए हैं। जहां सरकार इसे विकास, निवेश और बेहतर प्रशासन से जोड़कर देखती है, वहीं कुछ विपक्षी दल इसे राजनीतिक और संवैधानिक अधिकारों के संदर्भ में उठाते हैं।
पिछले सात वर्षों में क्या बदलाव देखने को मिले?
अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में कई प्रशासनिक और विकास संबंधी परियोजनाएं शुरू की गईं। सड़क, रेलवे, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यटन क्षेत्र में कई योजनाओं पर काम हुआ।
इसके साथ ही निवेश, रोजगार और बुनियादी ढांचे को लेकर भी कई सरकारी पहलें सामने आईं। हालांकि राजनीतिक दल इन बदलावों को लेकर अलग-अलग राय रखते हैं।
विकास और राजनीति दोनों बने चर्चा का विषय
पिछले सात वर्षों में विकास परियोजनाओं और राजनीतिक प्रक्रिया दोनों को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। चुनाव, स्थानीय निकायों की भूमिका और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर भी समय-समय पर बहस होती रही है।
प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की
बरसी के दौरान प्रशासन ने नागरिकों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी प्रकार की अफवाह पर विश्वास न करें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।
सुरक्षा एजेंसियां पूरे दिन हालात पर नजर बनाए रहीं और किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहीं।
प्रमुख घटनाक्रम एक नजर में
- अनुच्छेद 370 हटने की 7वीं बरसी पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित हुए।
- मेहबूबा मुफ्ती समेत कई नेताओं ने प्रदर्शन और कैंडल मार्च किया।
- संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई।
- प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया।
- राजनीतिक दलों ने अपने-अपने दृष्टिकोण सामने रखे।
- कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए निगरानी बढ़ाई गई।
निष्कर्ष
अनुच्छेद 370 हटने की 7वीं बरसी पर जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक गतिविधियां और सुरक्षा व्यवस्था दोनों चर्चा के केंद्र में रहीं। एक ओर विभिन्न दलों ने अपने-अपने विचारों के साथ कार्यक्रम आयोजित किए, तो दूसरी ओर प्रशासन ने एहतियात के तौर पर व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए। यह मुद्दा आज भी भारतीय राजनीति और जम्मू-कश्मीर के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों में शामिल है। आने वाले समय में भी इस पर राजनीतिक और संवैधानिक स्तर पर चर्चा जारी रहने की संभावना है।

