मोहन भागवत का आरक्षण पर बड़ा बयान, बोले- सामाजिक भेदभाव खत्म होने तक जारी रहे व्यवस्था
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि आरक्षण का उद्देश्य समाज के पिछड़े और वंचित वर्गों को आगे बढ़ाना है, न कि इसे हमेशा के लिए लागू रखना। उनके अनुसार, यह व्यवस्था सामाजिक भेदभाव को कम करने और समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई थी। जब तक समाज में असमानता और भेदभाव मौजूद रहेगा, तब तक आरक्षण की आवश्यकता बनी रहेगी।
मोहन भागवत ने यह भी कहा कि जिन लोगों को आरक्षण का लाभ मिल चुका है और जो अब सामाजिक तथा आर्थिक रूप से आगे बढ़ चुके हैं, उन्हें इस बात पर विचार करना चाहिए कि वे भविष्य में मिलने वाले लाभ छोड़कर दूसरों को आगे आने का अवसर दें। उनका मानना है कि इससे उन लोगों तक भी आरक्षण का लाभ पहुंच सकेगा, जिन्हें अभी इसकी सबसे अधिक जरूरत है।
जेन जी और जेन अल्फा से बातचीत में रखी अपनी बात
मोहन भागवत ने यह बात ‘इंडियाज़ इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस’ की 15वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कही। इस कार्यक्रम में उन्होंने खास तौर पर जेन जी (Gen Z) और जेन अल्फा (Gen Alpha) के युवाओं से बातचीत की और उनके सवालों के जवाब दिए।
आरक्षण से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश में सकारात्मक कार्रवाई (Positive Action) की नीति इसलिए अपनाई गई थी ताकि समाज में समानता और सामाजिक एकता को मजबूत किया जा सके। उनका कहना था कि इस नीति का उद्देश्य किसी वर्ग को दूसरे के खिलाफ खड़ा करना नहीं था, बल्कि लंबे समय से चले आ रहे सामाजिक भेदभाव को दूर करना था।
भागवत ने कहा कि समय के साथ आरक्षण का मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया, जिससे समाज में मतभेद और कड़वाहट बढ़ी। उनके अनुसार, कुछ लोगों ने इस व्यवस्था के मूल उद्देश्य को गलत तरीके से पेश किया, जिसके कारण इसका वास्तविक संदेश लोगों तक सही रूप में नहीं पहुंच पाया। उन्होंने कहा कि जब तक इस स्थिति में सुधार नहीं होगा, तब तक इस विषय पर विवाद बना रह सकता है।
आरक्षण का उद्देश्य उत्थान, राजनीति से दूर रखने की अपील
आरएसएस प्रमुख ने अपने संबोधन में डॉ. भीमराव अंबेडकर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि समाज पूरी ईमानदारी से डॉ. अंबेडकर की सोच और सुझावों का पालन करे, तो आरक्षण को लेकर पैदा होने वाले कई विवाद अपने आप कम हो सकते हैं।
भागवत ने कहा कि आरक्षण सामाजिक भेदभाव के कारण शुरू किया गया था और जब तक यह भेदभाव समाप्त नहीं होता, तब तक इसकी जरूरत बनी रहेगी। उन्होंने यह भी बताया कि आरक्षण का लाभ लेने वाले कुछ लोग खुद मानते हैं कि उन्हें पर्याप्त अवसर मिल चुके हैं और अब यह लाभ उन लोगों तक पहुंचना चाहिए जो अभी भी पीछे हैं।
उन्होंने उप-वर्गीकरण (Sub-categorisation) की मांग का भी जिक्र किया और कहा कि इस विषय पर चर्चा चल रही है। उनके अनुसार, उच्चतम न्यायालय ने भी इस दिशा में विचार व्यक्त किया है। उनका कहना था कि यदि आरक्षण का लाभ सही लोगों तक पहुंचे और इसका ईमानदारी से क्रियान्वयन हो, तो समाज में समानता तेजी से बढ़ सकती है।
भागवत ने कहा कि आरक्षण का मूल उद्देश्य लोगों को आत्मनिर्भर और सक्षम बनाना है, न कि इसे स्थायी व्यवस्था के रूप में बनाए रखना। इसलिए समाज में ऐसी सोच विकसित होनी चाहिए, जिसमें जो लोग आगे बढ़ चुके हैं, वे दूसरों के लिए अवसर छोड़ने पर भी विचार करें।
उन्होंने अंत में कहा कि आरक्षण के मुद्दे को राजनीतिक लाभ के बजाय सामाजिक सुधार के नजरिए से देखा जाना चाहिए। यदि समाज में समान अवसर, शिक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के सभी प्रयास पूरी निष्ठा से किए जाएं, तो भविष्य में ऐसी स्थिति आ सकती है जब आरक्षण की आवश्यकता स्वाभाविक रूप से कम हो जाए। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सामाजिक भेदभाव पूरी तरह समाप्त नहीं होता, तब तक आरक्षण की व्यवस्था जारी रहनी चाहिए।

