लाड़ली बहना योजना पर MP सरकार की बड़ी कवायद, 3 साल बाद मूल्यांकन
मध्य प्रदेश में महिलाओं को आर्थिक सहायता देने वाली लाड़ली बहना योजना अब सरकार की समीक्षा के दायरे में है। योजना के तीन साल पूरे होने के बाद इसके प्रभाव का अलग से मूल्यांकन कराया जा रहा है।
इसके अलावा राज्य सरकार ने कई जनकल्याणकारी और हितग्राही योजनाओं की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। समिति यह देखेगी कि योजनाओं का क्रियान्वयन किस तरह हो रहा है और उनका लाभ पात्र लोगों तक कितना पहुंच रहा है।
लाड़ली बहना योजना का तीन साल बाद मूल्यांकन
लाड़ली बहना योजना की शुरुआत मध्य प्रदेश में महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन, स्वास्थ्य और पोषण में सुधार तथा परिवार के निर्णयों में उनकी भूमिका मजबूत करने के उद्देश्य से की गई थी। सरकारी योजना पोर्टल के अनुसार योजना की शुरुआत वर्ष 2023 में हुई थी।
अब योजना के तीन साल पूरे होने के बाद सरकार इसके असर को समझने की कोशिश कर रही है। इसके लिए अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन संस्थान की ओर से अलग मूल्यांकन कराया जा रहा है।
सरकार किन पहलुओं पर नजर रख रही है?
मूल्यांकन का उद्देश्य योजना के प्रभाव को समझना है। इसके तहत यह देखा जा रहा है कि योजना से महिलाओं को किस तरह का लाभ मिल रहा है और योजना का जमीनी असर क्या है।
सरकार की व्यापक समीक्षा में योजनाओं की स्थिति, कामकाज और लाभार्थियों तक पहुंच जैसे पहलुओं पर जानकारी जुटाई जा रही है।
1.25 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को मिल रहा लाभ
सरकार के अनुसार लाड़ली बहना योजना के तहत हर महीने 1.25 करोड़ से ज्यादा महिलाओं के बैंक खातों में राशि भेजी जाती है। यह योजना मध्य प्रदेश की प्रमुख महिला-केंद्रित कल्याणकारी योजनाओं में शामिल है।
योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर वर्तमान में 1,25,22,542 पात्र आवेदकों का आंकड़ा दर्ज है। पोर्टल पर कुल प्राप्त आवेदनों की संख्या 1,31,35,985 बताई गई है।
वर्तमान व्यवस्था के अनुसार पात्र महिला को 1,500 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जाती है। राशि महिला के स्वयं के आधार लिंक और डीबीटी सक्रिय बैंक खाते में भेजी जाती है।
योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
लाड़ली बहना योजना केवल मासिक आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। आधिकारिक पोर्टल पर इसके प्रमुख उद्देश्यों में महिलाओं का आर्थिक स्वावलंबन, स्वास्थ्य और पोषण स्तर में सुधार तथा परिवार के निर्णयों में उनकी भूमिका मजबूत करना शामिल है।
सरकार का मौजूदा मूल्यांकन इसी व्यापक उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे योजना के वास्तविक प्रभाव को समझने में मदद मिल सकती है।
हाईलेवल कमेटी भी करेगी योजनाओं की समीक्षा
लाड़ली बहना योजना के अलग मूल्यांकन के साथ ही राज्य सरकार ने कई विभागों की प्रमुख योजनाओं की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाई है। समिति में वित्त, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अपर मुख्य सचिव शामिल हैं।
इसके अलावा लोक निर्माण विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव भी समिति में शामिल हैं। योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के अधिकारी को समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है।
एक महीने में देनी होगी रिपोर्ट
उच्चस्तरीय समिति को अपनी रिपोर्ट एक महीने के भीतर सरकार को सौंपनी है। रिपोर्ट के आधार पर योजनाओं की स्थिति और आगे की जरूरतों को लेकर सरकार निर्णय ले सकती है।
इस समीक्षा का दायरा केवल महिलाओं से जुड़ी योजनाओं तक सीमित नहीं रखा गया है। अलग-अलग विभागों की कई प्रमुख योजनाओं को इसमें शामिल किया गया है।
लाड़ली लक्ष्मी योजना भी समीक्षा के दायरे में
महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं में लाड़ली बहना योजना, लाड़ली लक्ष्मी योजना और सक्षम आंगनवाड़ी योजना को समीक्षा में शामिल किया गया है।
इससे साफ है कि सरकार अब प्रमुख हितग्राही योजनाओं की प्रभावशीलता को एक व्यापक नजरिए से देख रही है। योजनाओं के लाभ, क्रियान्वयन और जरूरतों का आकलन इसके प्रमुख हिस्से होंगे।
किसान और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की भी समीक्षा
सरकार की बनाई समिति कृषि और किसान कल्याण विभाग की कई योजनाओं की भी समीक्षा करेगी। इनमें मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना, मुख्यमंत्री कृषक फसल उपार्जन सहायता योजना और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शामिल हैं। सिंचाई के लिए दी जाने वाली बिजली सब्सिडी भी समीक्षा के दायरे में है।
सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी मुख्यमंत्री संबल योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और वृद्धावस्था पेंशन की भी समीक्षा की जाएगी। इस तरह सरकार ने समीक्षा का दायरा काफी व्यापक रखा है।
आवास और पेयजल योजनाएं भी शामिल
प्रधानमंत्री आवास योजना के ग्रामीण और शहरी हिस्से को भी समीक्षा में शामिल किया गया है। इसके साथ जल जीवन मिशन, अटल गृह ज्योति योजना और स्वामित्व योजना की भी समीक्षा होगी।
इसका उद्देश्य अलग-अलग योजनाओं के क्रियान्वयन और लाभार्थियों तक पहुंच की स्थिति को समझना है।
स्वास्थ्य और शिक्षा योजनाओं पर भी नजर
सरकार की उच्चस्तरीय समिति स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र की योजनाओं की भी समीक्षा करेगी। आयुष्मान भारत, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, समग्र शिक्षा अभियान और विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाएं इसके दायरे में हैं।
इस समीक्षा से सरकार को अलग-अलग योजनाओं की मौजूदा स्थिति का एक व्यापक आकलन मिल सकता है। हालांकि, समीक्षा के बाद किन योजनाओं में क्या बदलाव होंगे, इसकी जानकारी रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
क्या लाड़ली बहना योजना में बदलाव होगा?
फिलहाल लाड़ली बहना योजना के मूल्यांकन को किसी बदलाव की घोषणा के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सरकार अभी योजना के असर और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं की स्थिति का आकलन कर रही है।
इसलिए लाभार्थियों के लिए राशि में बदलाव, पात्रता में संशोधन या योजना बंद करने जैसे किसी भी दावे को आधिकारिक घोषणा के बिना सही नहीं माना जाना चाहिए।
लाभार्थियों के लिए क्या जरूरी है?
वर्तमान आधिकारिक पोर्टल पर योजना के तहत पात्र महिलाओं के लिए 1,500 रुपये प्रतिमाह की सहायता का प्रावधान दर्ज है। पात्रता और भुगतान से संबंधित जानकारी भी पोर्टल पर उपलब्ध है।
लाभार्थियों को किसी भी बदलाव की जानकारी के लिए सरकारी पोर्टल और आधिकारिक आदेशों पर ही भरोसा करना चाहिए। सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट खबरों से बचना जरूरी है।
सरकार के मूल्यांकन से क्या तस्वीर सामने आएगी?
तीन साल का समय किसी भी बड़ी जनकल्याणकारी योजना के प्रभाव को समझने के लिए महत्वपूर्ण अवधि हो सकती है। अब सरकार यह जानना चाहती है कि योजना का लाभ महिलाओं के जीवन में किस तरह का बदलाव ला रहा है।
मूल्यांकन की रिपोर्ट से योजना की जमीनी स्थिति को समझने में मदद मिल सकती है। इसके आधार पर सरकार आगे की नीति और जरूरतों पर विचार कर सकती है।
निष्कर्ष
लाड़ली बहना योजना के तीन साल पूरे होने के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने इसके प्रभाव का अलग से मूल्यांकन शुरू कराया है। साथ ही, कई विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है, जिसे एक महीने में रिपोर्ट देने को कहा गया है।
फिलहाल सरकार की यह कवायद योजना में किसी बदलाव की घोषणा नहीं है। असली तस्वीर मूल्यांकन और समिति की रिपोर्ट के बाद सामने आएगी। तब यह स्पष्ट होगा कि लाड़ली बहना योजना का जमीनी असर क्या रहा और सरकार आगे इसे लेकर क्या कदम उठाती है।

