गुजरात में ED की बड़ी कार्रवाई, फर्जी दफ्तर और रियल एस्टेट केस में 152 करोड़ की संपत्ति अटैच
गुजरात में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने फर्जी सरकारी दफ्तर और रियल एस्टेट धोखाधड़ी से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने कुल 152.5 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है।
गुजरात में ED ने 152.5 करोड़ की संपत्ति अटैच की
प्रवर्तन निदेशालय ने गुजरात में दो अलग-अलग मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच के दौरान कुल 152.5 करोड़ रुपये की संपत्तियों पर कार्रवाई की है। इनमें दाहोद का फर्जी सरकारी कार्यालय मामला और अहमदाबाद से जुड़ा रियल एस्टेट धोखाधड़ी मामला शामिल है।
ED के मुताबिक, दाहोद मामले में करीब 22.70 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की गई हैं, जबकि अहमदाबाद के हाउसिंग फ्रॉड मामले में लगभग 129.8 करोड़ रुपये की संपत्तियां कार्रवाई के दायरे में आई हैं। इनमें जमीन, म्यूचुअल फंड निवेश और बैंक खातों में जमा रकम जैसी संपत्तियां शामिल हैं।
यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब गुजरात में सरकारी योजनाओं और रियल एस्टेट से जुड़े वित्तीय अपराधों की जांच एजेंसियों की निगरानी बढ़ी हुई है।
दाहोद में बनाए गए थे छह फर्जी सरकारी दफ्तर
दाहोद का मामला बेहद गंभीर इसलिए है क्योंकि आरोपियों ने कथित तौर पर सिंचाई और जल संसाधन विभाग के छह फर्जी सरकारी कार्यालय तैयार किए थे। इन कार्यालयों को वास्तविक सरकारी दफ्तर जैसा दिखाने के लिए कथित तौर पर सरकारी अधिकारियों की पहचान, फर्जी मुहर, हस्ताक्षर और दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।
ED की जांच के अनुसार, इन फर्जी कार्यालयों के माध्यम से सरकारी योजनाओं और कामों के नाम पर अनुदान हासिल किया गया। आरोप है कि आरोपियों ने 121 फर्जी कार्यों को मंजूरी दिलाई और इसके जरिए सरकारी धन प्राप्त किया।
जांच एजेंसी का कहना है कि सरकारी अधिकारियों का रूप धारण करने और नकली दस्तावेज तैयार करने के बाद सरकारी व्यवस्था को धोखा देकर रकम हासिल की गई।
सरकारी धन को बैंक खातों के जरिए घुमाने का आरोप
ED के अनुसार, फर्जी तरीके से हासिल किए गए सरकारी धन को कई बैंक खातों के नेटवर्क के जरिए इधर-उधर किया गया। इसके बाद इस रकम का इस्तेमाल कथित तौर पर जमीन खरीदने, निवेश करने और दूसरी संपत्तियां बनाने में किया गया।
जांच में ऐसे बैंक खातों का भी उल्लेख सामने आया है जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर अवैध रकम को प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया गया। ऐसे खातों को आम तौर पर मनी म्यूल अकाउंट कहा जाता है।
ED ने आरोपी अबुबकर जकिराली सैयद, उसके परिवार और सहयोगियों से जुड़ी सात जमीनों, म्यूचुअल फंड निवेश और बैंक बैलेंस को अटैच किया है। इन संपत्तियों की कुल कीमत करीब 22.70 करोड़ रुपये बताई गई है।
मामले में पूर्व IAS अधिकारी का नाम भी सामने आया
दाहोद के फर्जी सरकारी कार्यालय मामले में कई लोगों के खिलाफ जांच चल रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, इस मामले में पूर्व IAS अधिकारी बीडी निनामा समेत कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। हालांकि, किसी आरोपी पर लगे आरोपों को अदालत में अंतिम रूप से साबित होना अभी बाकी है।
ED ने पुलिस की ओर से दर्ज मामले के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। एजेंसी ने Prevention of Money Laundering Act यानी PMLA के तहत कार्रवाई करते हुए संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है।
यहां यह समझना जरूरी है कि ED द्वारा किसी संपत्ति को अटैच किया जाना जांच प्रक्रिया का हिस्सा है। अंतिम जब्ती या संपत्ति पर स्थायी अधिकार का फैसला संबंधित कानूनी प्रक्रिया और सक्षम न्यायिक प्राधिकरण के निर्णय के बाद होता है।
अहमदाबाद में रियल एस्टेट धोखाधड़ी का मामला
दूसरा मामला अहमदाबाद के रियल एस्टेट कारोबार से जुड़ा है। ED ने नवरंगपुरा और बोपल पुलिस थानों में दर्ज पांच FIR के आधार पर जांच आगे बढ़ाई थी। आरोप है कि कुछ लोगों ने घर और दुकान खरीदने के इच्छुक लोगों से आकर्षक योजनाओं के नाम पर पैसा लिया।
जांच के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर फ्लैट और दुकानें शुरुआती कीमतों पर उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। कुछ मामलों में खरीदारों को 54 से 100 प्रतिशत तक सुनिश्चित रिटर्न का वादा किए जाने की बात भी सामने आई है।
आरोप है कि रकम लेने के बाद कई परियोजनाओं को जरूरी मंजूरियां नहीं मिलीं और खरीदारों को वादा की गई संपत्ति नहीं मिल सकी।
करीब 250 खरीदारों से जुड़ी परियोजना
ED की जांच में छारोड़ी की एक परियोजना का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना में करीब 250 खरीदारों और निवेशकों को कथित तौर पर बताया गया था कि RERA पंजीकरण और आवश्यक एनए अनुमति की प्रक्रिया चल रही है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि बाद में परियोजना से जुड़ी जमीन को अन्य लोगों को बेचने या हस्तांतरित करने की कोशिश की गई। संपत्तियों को तीसरे पक्ष के नाम पर दिखावटी दस्तावेजों के माध्यम से ट्रांसफर करने के आरोप भी जांच में सामने आए हैं।
ऐसे मामलों में खरीदारों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि उन्होंने जिस परियोजना में पैसा लगाया, उसका स्वामित्व, मंजूरी और वास्तविक कानूनी स्थिति बाद में विवादित हो जाती है।
129.8 करोड़ की संपत्ति पर ED की कार्रवाई
अहमदाबाद के रियल एस्टेट मामले में ED ने लगभग 129.8 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अटैच किया है। यह रकम दाहोद मामले में अटैच की गई 22.70 करोड़ रुपये की संपत्तियों से काफी अधिक है।
रियल एस्टेट मामले में कार्रवाई से यह संकेत मिलता है कि जांच एजेंसी कथित धोखाधड़ी से प्राप्त रकम और उससे बनाई गई संपत्तियों के बीच संबंध की जांच कर रही है।
ED की कार्रवाई का उद्देश्य कथित अपराध से हासिल संपत्तियों को आगे बेचने या स्थानांतरित करने से रोकना भी होता है, ताकि जांच पूरी होने तक संबंधित संपत्तियों पर कानूनी नियंत्रण बना रहे।
दोनों मामलों में क्या है समानता?
दाहोद का मामला सरकारी धन से जुड़ा है, जबकि अहमदाबाद का मामला निजी खरीदारों और रियल एस्टेट परियोजनाओं से संबंधित है। दोनों मामलों की प्रकृति अलग होने के बावजूद जांच में कथित तौर पर एक समान पैटर्न दिखाई देता है—धोखाधड़ी के जरिए रकम हासिल करना और फिर उसे अलग-अलग माध्यमों से संपत्ति या निवेश में बदलना।
दाहोद मामले में कथित तौर पर सरकारी अनुदान हासिल करने के लिए फर्जी सरकारी कार्यालयों और दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। वहीं अहमदाबाद मामले में घर और दुकान देने के वादे के आधार पर खरीदारों से पैसा जुटाने का आरोप है।
दोनों मामलों में ED अब कथित अपराध से हासिल रकम और संपत्तियों के बीच वित्तीय कड़ी की जांच कर रही है।
ED की कार्रवाई का क्या मतलब है?
PMLA के तहत संपत्ति अटैच करने की कार्रवाई का उद्देश्य कथित अपराध से हासिल संपत्ति को सुरक्षित रखना है। यदि जांच में यह साबित होता है कि संपत्ति अपराध से अर्जित रकम से बनाई या खरीदी गई थी, तो आगे कानूनी प्रक्रिया के तहत उस पर कार्रवाई हो सकती है।
इस मामले में 152.5 करोड़ रुपये की संपत्तियों का अटैचमेंट जांच एजेंसी के लिए महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
आगे की जांच में क्या हो सकता है?
अब ED दोनों मामलों में पैसों के लेनदेन, बैंक खातों, संपत्तियों के स्वामित्व और कथित लाभार्थियों की भूमिका की आगे जांच कर सकती है। दाहोद मामले में सरकारी अनुदान से जुड़ी रकम और उसके इस्तेमाल की कड़ियों पर विशेष ध्यान रहेगा।
अहमदाबाद मामले में खरीदारों से प्राप्त रकम, रियल एस्टेट परियोजनाओं से जुड़े दस्तावेजों और संपत्तियों के कथित हस्तांतरण की जांच महत्वपूर्ण होगी।
जांच आगे बढ़ने पर एजेंसी को अन्य संपत्तियों या लेनदेन से जुड़े नए तथ्य मिलने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
निष्कर्ष
गुजरात में ED की 152.5 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच करने की कार्रवाई ने फर्जी सरकारी कार्यालय और रियल एस्टेट धोखाधड़ी से जुड़े मामलों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। दाहोद में छह कथित फर्जी सरकारी कार्यालयों के जरिए सरकारी अनुदान हासिल करने और अहमदाबाद में रियल एस्टेट परियोजनाओं के नाम पर खरीदारों से रकम लेने के आरोपों की जांच जारी है।
ED ने दोनों मामलों में कथित अपराध से जुड़ी संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। अब आगे की जांच में यह स्पष्ट होगा कि कथित तौर पर हासिल की गई रकम किस तरह अलग-अलग संपत्तियों और निवेशों में पहुंची तथा इस पूरे नेटवर्क में किन-किन लोगों की भूमिका रही।

