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विशाखापत्तनम में RSS की अखिल भारतीय समन्वय बैठक आज से, 32 संगठन करेंगे मंथन

RSS की तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक विशाखापट्टनम में आज से होगी शुरू, देखिए News Critic पर विशेष रिपोर्ट।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक आज, 19 अगस्त से आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में शुरू हो रही है। बैठक में संघ से प्रेरित 32 संगठनों के वरिष्ठ पदाधिकारी हिस्सा लेंगे।
गुड़िलोवा स्थित विज्ञान विहार परिसर में होने वाली इस बैठक में देश की मौजूदा सामाजिक परिस्थितियों, जनसांख्यिकीय बदलाव, युवाओं में नशे की समस्या और भारतीय विकास मॉडल जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा। बैठक 21 अगस्त तक चलेगी।

आज से शुरू होगी RSS की अहम बैठक

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वार्षिक अखिल भारतीय समन्वय बैठक इस बार आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम जिले के गुड़िलोवा में आयोजित की जा रही है। यह बैठक 19 अगस्त से शुरू होकर 21 अगस्त तक चलेगी। इसके लिए संघ और उससे जुड़े विभिन्न संगठनों के वरिष्ठ पदाधिकारी विशाखापत्तनम पहुंच चुके हैं।

संघ की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, बैठक में समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे संघ से प्रेरित 32 संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी शामिल होंगे। इन संगठनों के राष्ट्रीय अध्यक्ष, महामंत्री, संगठन मंत्री और चयनित पदाधिकारी बैठक में अपने-अपने क्षेत्रों के अनुभव साझा करेंगे।

बैठक का उद्देश्य केवल संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा करना नहीं है, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर विभिन्न संगठनों के बीच बेहतर तालमेल विकसित करना भी है।

मोहन भागवत और दत्तात्रेय होसबाले होंगे मौजूद

इस तीन दिवसीय बैठक में RSS के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले समेत संघ के शीर्ष पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। सभी सह सरकार्यवाह और अखिल भारतीय स्तर के प्रमुख पदाधिकारियों के भी बैठक में शामिल होने की जानकारी सामने आई है।

संघ परिवार से जुड़े विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों के एक साथ जुटने के कारण इस बैठक को संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में चल रहे कार्यों की जानकारी साझा की जाएगी और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर अनुभवों का आदान-प्रदान होगा।

हालांकि संघ की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि अखिल भारतीय समन्वय बैठक किसी कार्यकारी निर्णय लेने वाली बैठक के तौर पर नहीं होती। इसका मुख्य उद्देश्य विचारों और अनुभवों को साझा करना तथा विभिन्न संगठनों के बीच समन्वय को मजबूत करना है।

जनसांख्यिकीय बदलाव और जनसंख्या असंतुलन पर चर्चा

इस बार बैठक के प्रमुख विषयों में जनसांख्यिकीय बदलाव और जनसंख्या असंतुलन शामिल हैं। देश में बदलती जनसांख्यिकी का सामाजिक प्रभाव, इसके कारण और भविष्य की चुनौतियां बैठक में चर्चा का हिस्सा रहेंगी।

RSS के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बैठक से पहले जानकारी दी थी कि देश की वर्तमान स्थिति और सामाजिक परिवर्तन से जुड़े कई मुद्दों पर प्रतिनिधि विचार-विमर्श करेंगे। इनमें जनसांख्यिकीय असंतुलन को प्रमुख विषय के रूप में रखा गया है।

यह विषय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जनसंख्या में बदलाव का असर शिक्षा, रोजगार, संसाधनों, सामाजिक संरचना और विकास की योजनाओं पर पड़ता है। बैठक में इस विषय को सामाजिक दृष्टिकोण से समझने और उससे जुड़ी चुनौतियों पर विचार करने की कोशिश की जाएगी।

युवाओं में नशे की समस्या भी एजेंडे में

बैठक में युवाओं को नशे से दूर रखने और नशामुक्ति को लेकर भी चर्चा होगी। संघ से जुड़े संगठनों की ओर से अलग-अलग क्षेत्रों में चलाए जा रहे सामाजिक अभियानों और उनके अनुभवों को साझा किया जाएगा।

युवाओं में नशीली दवाओं के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर सामाजिक संगठनों के स्तर पर लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है। ऐसे में बैठक में नशामुक्ति के लिए जागरूकता, सामाजिक भागीदारी और युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने के उपायों पर चर्चा होने की संभावना है।

बैठक के प्रमुख मुद्दों में शामिल विषयों को इस तरह समझा जा सकता है:

  • जनसांख्यिकीय बदलाव और जनसंख्या असंतुलन
  • युवाओं में नशे की समस्या और नशामुक्ति
  • सामाजिक परिवर्तन और मौजूदा राष्ट्रीय परिस्थितियां
  • भारतीय विकास मॉडल
  • संघ के ‘पंच परिवर्तन’ अभियान को आगे बढ़ाना
  • विभिन्न संगठनों के बीच बेहतर समन्वय

Gen Z से जुड़ाव पर भी नजर

इस बैठक को लेकर सामने आई जानकारी में नई पीढ़ी, खासकर Gen Z के साथ संवाद और जुड़ाव को लेकर भी विशेष चर्चा की बात कही गई है। संघ और उससे जुड़े संगठनों के लिए युवा वर्ग तक पहुंच बढ़ाना आने वाले समय में महत्वपूर्ण संगठनात्मक विषय माना जा रहा है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, युवाओं से जुड़ाव बढ़ाने, डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करने और सामाजिक गतिविधियों के जरिए नई पीढ़ी को जोड़ने की रणनीति पर विचार किया जा सकता है। हालांकि इन विषयों से जुड़े कई बिंदु संभावित एजेंडे के तौर पर सामने आए हैं, इसलिए अंतिम निर्णय के बारे में आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना होगा।

आज की युवा पीढ़ी सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और तेजी से बदलती तकनीक से गहराई से जुड़ी हुई है। ऐसे में सामाजिक और संगठनात्मक संस्थाओं के लिए युवाओं के साथ संवाद का तरीका भी बदल रहा है। बैठक में इस बदलते माहौल को लेकर विचार-विमर्श महत्वपूर्ण हो सकता है।

32 संगठनों के बीच समन्वय पर जोर

अखिल भारतीय समन्वय बैठक की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक संघ से प्रेरित विभिन्न संगठनों का एक मंच पर आना है। ये संगठन शिक्षा, श्रमिक क्षेत्र, किसान, विद्यार्थी, सामाजिक सेवा और अन्य क्षेत्रों में सक्रिय हैं।

बैठक में इन संगठनों के वरिष्ठ पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में किए जा रहे कामों की जानकारी साझा करेंगे। इससे एक संगठन के अनुभवों को दूसरे क्षेत्रों में लागू करने और साझा प्रयासों को मजबूत करने के रास्ते तलाशे जा सकते हैं।

संघ से जुड़े संगठनों के बीच बेहतर तालमेल को लेकर इस बैठक की भूमिका इसलिए अहम हो जाती है क्योंकि अलग-अलग संस्थाएं समाज के अलग-अलग वर्गों और क्षेत्रों में काम करती हैं। इनके अनुभवों का आदान-प्रदान व्यापक सामाजिक अभियानों के लिए उपयोगी हो सकता है।

BJP की भी रहेगी मौजूदगी

बैठक में संघ से जुड़े संगठनों के साथ भारतीय जनता पार्टी की भी भागीदारी रहेगी। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष के बैठक में शामिल होने की जानकारी सामने आई है।

संघ और बीजेपी के बीच संगठनात्मक समन्वय को देखते हुए इन नेताओं की मौजूदगी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि अखिल भारतीय समन्वय बैठक का दायरा केवल राजनीतिक मुद्दों तक सीमित नहीं है और इसमें सामाजिक तथा राष्ट्रीय विषयों पर व्यापक चर्चा होती है।

कुछ रिपोर्टों में विभिन्न राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारियों और संगठन मंत्रियों की नियुक्ति जैसे विषयों पर चर्चा की संभावना भी जताई गई है। लेकिन इन विषयों को लेकर अंतिम आधिकारिक जानकारी बैठक के दौरान या उसके बाद ही स्पष्ट होगी।

‘पंच परिवर्तन’ और भारतीय विकास मॉडल पर मंथन

RSS की ओर से बैठक में भारतीय विकास मॉडल और ‘पंच परिवर्तन’ को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा की बात कही गई है। संघ के अनुसार सामाजिक परिवर्तन से जुड़े विभिन्न प्रयासों को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए अलग-अलग संगठनों के अनुभव उपयोगी हो सकते हैं।

भारतीय विकास मॉडल पर चर्चा का फोकस देश की सामाजिक आवश्यकताओं और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप विकास की सोच पर हो सकता है। वहीं ‘पंच परिवर्तन’ से जुड़े विषयों के जरिए सामाजिक जागरूकता और सकारात्मक बदलाव के प्रयासों को गति देने पर विचार किया जा सकता है।

बैठक से निकलने वाले संदेश पर रहेगी नजर

तीन दिन तक चलने वाली इस बैठक के दौरान अलग-अलग सत्रों में कई विषयों पर चर्चा होगी। देश की वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों और भविष्य की चुनौतियों को लेकर संघ और उससे जुड़े संगठनों के प्रतिनिधि अपने अनुभव साझा करेंगे।

बैठक में होने वाली चर्चाओं के बाद संघ की ओर से सामने आने वाले प्रमुख संदेशों पर भी नजर रहेगी। खासतौर पर जनसांख्यिकीय बदलाव, युवाओं में नशे की समस्या, नई पीढ़ी से जुड़ाव और सामाजिक समन्वय जैसे विषयों पर संघ का दृष्टिकोण महत्वपूर्ण हो सकता है।

इस बैठक की खासियत यह भी है कि इसमें किसी एक क्षेत्र के बजाय समाज के विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले संगठन शामिल होते हैं। इसलिए यहां होने वाला विचार-विमर्श संगठनात्मक गतिविधियों के साथ-साथ व्यापक सामाजिक मुद्दों को भी समेटता है।

निष्कर्ष

विशाखापत्तनम में RSS की तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक आज से शुरू हो रही है। 19 से 21 अगस्त तक चलने वाली इस बैठक में संघ से प्रेरित 32 संगठनों के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल होंगे। सरसंघचालक मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले समेत संघ के शीर्ष पदाधिकारी भी इसमें मौजूद रहेंगे।

बैठक में जनसांख्यिकीय बदलाव, जनसंख्या असंतुलन, युवाओं में नशे की समस्या, नई पीढ़ी से संवाद, भारतीय विकास मॉडल और सामाजिक समन्वय जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। तीन दिनों के इस मंथन से सामने आने वाले विचार और प्राथमिकताएं आने वाले समय में संघ तथा उससे जुड़े संगठनों की सामाजिक गतिविधियों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

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