उत्तराखंड में बारिश का अलर्ट, लैंडस्लाइड में 3 की मौत; कैलाश मानसरोवर मार्ग बंद
उत्तराखंड में मानसून ने एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मौसम विभाग ने राज्य के आठ जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है, जबकि लगातार बारिश के बीच लैंडस्लाइड और सड़कें बंद होने से जनजीवन प्रभावित हुआ है।
पौड़ी गढ़वाल में भूस्खलन की चपेट में आने से तीन लोगों की मौत की सूचना है। वहीं पिथौरागढ़ में पहाड़ से गिरे बड़े बोल्डर की चपेट में आने से BRO का कुलागाड़ वैली ब्रिज ध्वस्त हो गया, जिसके बाद धारचूला-गुंजी कैलाश मानसरोवर मार्ग बंद हो गया है।
आठ जिलों में बारिश का अलर्ट
उत्तराखंड में मौसम का मिजाज लगातार खराब बना हुआ है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के देहरादून केंद्र ने आज राज्य के आठ जिलों के लिए बारिश का अलर्ट जारी किया है।
देहरादून और बागेश्वर में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं पौड़ी, चंपावत, टिहरी, पिथौरागढ़, नैनीताल और ऊधम सिंह नगर में यलो अलर्ट जारी किया गया है।
मौसम विभाग की चेतावनी ऐसे समय में आई है जब पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के कारण पहले से ही भूस्खलन और सड़क बाधित होने की घटनाएं सामने आ रही हैं।
बारिश के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक मलबा और बोल्डर गिरने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों और यात्रियों से संवेदनशील इलाकों में विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।
पौड़ी में लैंडस्लाइड से 3 की मौत
पौड़ी गढ़वाल के महरगांव में भारी बारिश के दौरान भूस्खलन ने एक परिवार को अपनी चपेट में ले लिया। मलबा गिरने से एक मकान दब गया और चार लोग इसकी चपेट में आ गए।
रेस्क्यू अभियान के दौरान तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई, जबकि एक व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। लगातार बारिश के कारण राहत और बचाव अभियान में भी चुनौतियां सामने आईं।
इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में मानसून के दौरान भूस्खलन के खतरे को सामने ला दिया है। ढलान वाले क्षेत्रों में लगातार बारिश होने पर मिट्टी और चट्टानों के खिसकने की आशंका बढ़ जाती है।
प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
BRO का वैली ब्रिज बोल्डर की चपेट में आया
पिथौरागढ़ जिले के धारचूला क्षेत्र में बारिश के बीच पहाड़ से गिरा एक बड़ा बोल्डर BRO के कुलागाड़ वैली ब्रिज से टकरा गया। बोल्डर की चपेट में आने से पुल ध्वस्त हो गया।
पुल टूटने के बाद धारचूला-गुंजी कैलाश मानसरोवर मोटर मार्ग पर आवाजाही बाधित हो गई है। यह मार्ग सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है।
पुल के क्षतिग्रस्त होने का असर व्यास, दारमा और चौदास घाटियों के सड़क संपर्क पर भी पड़ा है। सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क संपर्क का महत्व काफी ज्यादा होता है, क्योंकि स्थानीय लोगों के साथ सुरक्षा और जरूरी सेवाओं की आवाजाही भी इन्हीं मार्गों पर निर्भर रहती है।
कैलाश मानसरोवर मार्ग बंद होने से बढ़ी परेशानी
कैलाश मानसरोवर मार्ग उत्तराखंड के पिथौरागढ़ क्षेत्र से होकर गुजरने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। धारचूला से आगे गुंजी और अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंच के लिए इस मार्ग की अहम भूमिका है।
बारिश और पुल के क्षतिग्रस्त होने से मार्ग बंद होने के कारण स्थानीय लोगों और अन्य यात्रियों की आवाजाही प्रभावित हुई है। प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के सामने अब सड़क संपर्क बहाल करना बड़ी चुनौती है।
हालांकि मौसम खराब होने की स्थिति में क्षतिग्रस्त पुल और सड़क पर तत्काल आवाजाही शुरू करना जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए पहले सुरक्षा का आकलन और जरूरी मरम्मत के बाद ही यातायात बहाल किया जाना संभव होगा।
124 सड़कें बंद, कई इलाकों का संपर्क प्रभावित
लगातार बारिश और भूस्खलन का असर पूरे राज्य के सड़क नेटवर्क पर दिखाई दे रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उत्तराखंड में 124 सड़कें बंद हैं।
सड़कें बंद होने से कई पहाड़ी इलाकों में लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क संपर्क टूटने का सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं, खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही पर पड़ता है।
प्रशासन और संबंधित विभाग बंद सड़कों को खोलने के लिए काम कर रहे हैं। लेकिन लगातार बारिश होने पर नए स्थानों पर मलबा आने की वजह से बहाली का काम प्रभावित हो सकता है।
पौड़ी में स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद
भारी बारिश और खराब मौसम की आशंका को देखते हुए पौड़ी गढ़वाल में स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने सरकारी, गैर-सरकारी और निजी स्कूलों के लिए छुट्टी घोषित की है।
बारिश के दौरान बच्चों को पहाड़ी और संवेदनशील रास्तों से स्कूल भेजना जोखिम भरा हो सकता है। खासकर उन इलाकों में जहां भूस्खलन का खतरा बना रहता है, वहां प्रशासन की ओर से स्कूल बंद करने का फैसला सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
अभिभावकों से भी मौसम की स्थिति पर नजर रखने और प्रशासन की सलाह का पालन करने की अपील की गई है।
नदियों का जलस्तर बढ़ा
उत्तराखंड में लगातार बारिश के कारण कई नदियों का जलस्तर भी बढ़ रहा है। अलकनंदा, मंदाकिनी, गंगा और भागीरथी समेत कई नदियां चेतावनी स्तर के करीब बताई गई हैं।
नदियों का जलस्तर बढ़ने के कारण नदी किनारे बसे इलाकों में खतरा बढ़ सकता है। प्रशासन ने निचले इलाकों और नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
यदि बारिश का दौर इसी तरह जारी रहता है तो नदियों के जलस्तर में और बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने की जरूरत है।
बिजली और पानी की सेवाओं पर भी असर
भारी बारिश और लैंडस्लाइड का असर सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं है। कई इलाकों में बिजली आपूर्ति और पेयजल सेवाएं भी प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।
पहाड़ी क्षेत्रों में बिजली की लाइनें और पानी की पाइपलाइन अक्सर भूस्खलन और मलबे की चपेट में आ सकती हैं। सड़क बंद होने की स्थिति में इन सेवाओं की मरम्मत के लिए टीमों को मौके तक पहुंचने में भी मुश्किल होती है।
ऐसे में प्रशासन के सामने एक साथ कई मोर्चों पर काम करने की चुनौती है। सड़क संपर्क बहाल करने के साथ बिजली और पानी की जरूरी सेवाओं को सामान्य करना भी प्राथमिकता होगी।
यात्रियों के लिए बढ़ा खतरा
उत्तराखंड में बारिश के दौरान यात्रा करने वाले लोगों के लिए लैंडस्लाइड सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। पहाड़ी मार्गों पर अचानक मलबा या बोल्डर गिरने की घटनाएं हो सकती हैं।
मौजूदा परिस्थितियों में संवेदनशील और बंद मार्गों पर जाने से बचना जरूरी है। यात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले संबंधित जिला प्रशासन और सड़क एजेंसियों से मार्ग की स्थिति की जानकारी लेनी चाहिए।
विशेष रूप से कैलाश मानसरोवर मार्ग और सीमावर्ती घाटियों की ओर जाने वाले यात्रियों को सड़क और मौसम की स्थिति स्पष्ट होने तक अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
उत्तराखंड में हर साल मानसून के दौरान भूस्खलन और सड़क बंद होने की घटनाएं सामने आती हैं। इस बार भी लगातार बारिश के कारण कई इलाकों में ऐसी स्थिति बनी हुई है।
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाने और बंद सड़कों को जल्द से जल्द खोलने की है। लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के बीच सड़क खोलने का काम भी जोखिम से भरा होता है।
BRO और लोक निर्माण विभाग जैसी एजेंसियों को क्षतिग्रस्त मार्गों और पुलों की स्थिति का आकलन कर बहाली का काम करना होगा। साथ ही संवेदनशील स्थानों पर दोबारा मलबा गिरने की आशंका को भी ध्यान में रखना होगा।
अगले कुछ दिन महत्वपूर्ण
मौसम विभाग के अलर्ट के बीच अगले कुछ दिन उत्तराखंड के लिए महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। खासकर देहरादून और बागेश्वर में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
वहीं पिथौरागढ़, चंपावत, टिहरी और अन्य पहाड़ी जिलों में यलो अलर्ट के बावजूद स्थानीय स्तर पर भारी बारिश हो सकती है। पहाड़ी क्षेत्रों में थोड़े समय की तेज बारिश भी भूस्खलन और अचानक जलभराव जैसी स्थिति पैदा कर सकती है।
इसलिए प्रशासन के साथ आम लोगों को भी मौसम संबंधी चेतावनियों को गंभीरता से लेने की जरूरत है।
इन इलाकों पर रहेगी खास नजर
मौजूदा स्थिति में इन क्षेत्रों और मुद्दों पर विशेष नजर रहेगी:
- देहरादून और बागेश्वर में भारी से बहुत भारी बारिश
- पौड़ी में भूस्खलन और राहत-बचाव अभियान
- पिथौरागढ़ में BRO का क्षतिग्रस्त वैली ब्रिज
- धारचूला-गुंजी कैलाश मानसरोवर मार्ग
- व्यास, दारमा और चौदास घाटियों का सड़क संपर्क
- राज्य में बंद 124 सड़कें
- गंगा, अलकनंदा, मंदाकिनी और भागीरथी का जलस्तर
- बिजली और पेयजल सेवाओं की स्थिति
निष्कर्ष
उत्तराखंड में मानसून के बीच बारिश और भूस्खलन ने एक बार फिर मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राज्य के आठ जिलों में मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है, जबकि पौड़ी में लैंडस्लाइड की घटना में तीन लोगों की मौत हुई है।
पिथौरागढ़ में पहाड़ से गिरे बोल्डर की चपेट में आने से BRO का कुलागाड़ वैली ब्रिज ध्वस्त हो गया है। इसके चलते धारचूला-गुंजी कैलाश मानसरोवर मार्ग बंद हो गया और व्यास, दारमा तथा चौदास घाटियों का संपर्क प्रभावित हुआ है।
बारिश का दौर जारी रहने के कारण आने वाले दिनों में भूस्खलन, सड़क बंद होने और नदियों का जलस्तर बढ़ने का खतरा बना रहेगा। ऐसे में प्रशासन की निगरानी, समय पर राहत-बचाव और लोगों की सतर्कता बेहद जरूरी होगी।

