पुणे में कर्फ्यू के बीच राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ को मंजूरी, पुलिस ने लगाईं 30 शर्तें
पुणे में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल थमता दिख रहा है। पुलिस ने 22 अगस्त को होने वाले कार्यक्रम को मंजूरी दे दी है।
हालांकि, अनुमति के साथ पुलिस ने आयोजकों के सामने 30 शर्तें रखी हैं। इनमें ड्रोन पर रोक, सीसीटीवी, सुरक्षा, पार्किंग और धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखने जैसे नियम शामिल हैं।
कर्फ्यू के बीच कार्यक्रम को मिली मंजूरी
पुणे में 18 अगस्त से 31 अगस्त तक सार्वजनिक व्यवस्था को लेकर कई प्रतिबंध लागू हैं। इस दौरान धरना, प्रदर्शन और जुलूस जैसी गतिविधियों पर रोक लगाई गई है।
इसी अवधि में राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम 22 अगस्त को प्रस्तावित है। कर्फ्यू जैसे प्रतिबंधों के कारण कार्यक्रम को लेकर पहले असमंजस की स्थिति बनी हुई थी।
कांग्रेस की ओर से कार्यक्रम कराने की अनुमति को लेकर प्रशासन से संपर्क किया गया था। अब पुणे पुलिस ने कुछ शर्तों के साथ कार्यक्रम को मंजूरी दे दी है।
22 अगस्त को होगा ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम
राहुल गांधी का कार्यक्रम पुणे के आरटीओ चौक के पास स्थित एसएसपीएमएस कॉलेज मैदान में होगा। पुलिस की अनुमति के अनुसार कार्यक्रम शाम 4:30 बजे से रात 9:30 बजे तक चल सकता है।
इस कार्यक्रम में करीब 8 हजार से 10 हजार लोगों के पहुंचने का अनुमान है। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर कई नियम तय किए हैं।
कार्यक्रम खास तौर पर छात्राओं से जुड़ा बताया गया है। इसमें शिक्षा, सुरक्षा, समानता, प्रतियोगी परीक्षाओं और करियर के अवसर जैसे मुद्दों पर चर्चा की जानी है।
पुलिस ने लगाईं 30 शर्तें
पुणे पुलिस ने कार्यक्रम की अनुमति देते हुए कुल 30 शर्तें रखी हैं। इनका पालन करना आयोजकों के लिए जरूरी होगा।
पुलिस का मकसद कार्यक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए सुरक्षा व्यवस्था पर खास जोर दिया गया है।
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष मोहन जोशी ने कहा है कि आयोजक पुलिस की सभी शर्तों का पालन करेंगे।
आपत्तिजनक बैनर और तस्वीरों पर रोक
पुलिस ने कार्यक्रम में आपत्तिजनक तस्वीर, चित्र या बैनर लगाने पर रोक लगाई है। आयोजकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कार्यक्रम स्थल पर ऐसा कोई कंटेंट प्रदर्शित न हो, जिससे विवाद पैदा हो।
इसके अलावा किसी भी व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए। पुलिस ने इसकी जिम्मेदारी भी आयोजकों पर डाली है।
इस शर्त का उल्लंघन होने पर कार्यक्रम की अनुमति पर सवाल उठ सकता है। इसलिए आयोजकों को मंच और कार्यक्रम स्थल पर प्रदर्शित होने वाली सभी सामग्री की निगरानी करनी होगी।
ड्रोन और फोटोग्राफी पर भी पाबंदी
पुलिस ने कार्यक्रम में ड्रोन के इस्तेमाल पर रोक लगाई है। कार्यक्रम की फोटोग्राफी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।
बड़ी भीड़ वाले राजनीतिक कार्यक्रमों में ड्रोन से सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसलिए पुलिस ने इस पर पहले ही रोक लगा दी है।
आयोजकों को पुलिस की ओर से तय सुरक्षा व्यवस्था का पालन करना होगा। कार्यक्रम स्थल की निगरानी के लिए सीसीटीवी व्यवस्था भी जरूरी की गई है।
पूरे कार्यक्रम स्थल पर सीसीटीवी जरूरी
पुलिस ने कार्यक्रम स्थल को सीसीटीवी कैमरों से कवर करने की शर्त रखी है। कैमरे दिन और रात लगातार चालू रखने होंगे।
इससे कार्यक्रम के दौरान भीड़ और गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिलेगी। किसी घटना की स्थिति में रिकॉर्डिंग जांच के लिए भी उपयोगी हो सकती है।
आयोजकों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के लिए जरूरी रास्ते खुले रहें।
महिला और पुरुषों के लिए अलग व्यवस्था
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए पुलिस ने पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग व्यवस्था करने को कहा है।
प्रवेश और निकास के लिए पर्याप्त रास्ते रखने होंगे। इससे भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
आयोजकों को निजी सुरक्षा कर्मियों की तैनाती भी करनी होगी। इसमें महिला सुरक्षाकर्मियों को भी शामिल करना होगा।
महिला स्वयंसेवकों की भी होगी भूमिका
कार्यक्रम खास तौर पर छात्राओं से जुड़ा है। इसलिए पुलिस ने महिला स्वयंसेवकों की पर्याप्त संख्या रखने पर भी जोर दिया है।
स्वयंसेवक प्रवेश, बैठने की व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण में मदद कर सकते हैं। इससे पुलिस पर अतिरिक्त दबाव कम होगा।
कार्यक्रम के दौरान किसी छात्रा या महिला को परेशानी न हो, इसके लिए अलग सहायता व्यवस्था भी जरूरी होगी।
पानी, शौचालय और पार्किंग की व्यवस्था
पुलिस की शर्तों में कार्यक्रम स्थल पर पीने के पानी और शौचालय की पर्याप्त व्यवस्था भी शामिल है।
बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने पर इन सुविधाओं की जरूरत बढ़ जाती है। इसलिए आयोजकों को कार्यक्रम शुरू होने से पहले सभी इंतजाम पूरे करने होंगे।
पार्किंग की उचित व्यवस्था भी करनी होगी। इससे आसपास की सड़कों पर अनावश्यक जाम की स्थिति को कम किया जा सकेगा।
आपातकालीन रास्ता हमेशा खुला रखना होगा
कार्यक्रम स्थल पर पुलिस, मेडिकल और दमकल सेवाओं के लिए आपातकालीन रास्ता खुला रखना जरूरी होगा।
अगर किसी व्यक्ति की तबीयत बिगड़ती है या कोई दूसरी आपात स्थिति पैदा होती है, तो एंबुलेंस और दूसरी सेवाएं तुरंत पहुंच सकेंगी।
इसी कारण पुलिस ने आयोजन स्थल पर आपातकालीन रास्ते को किसी भी हालत में बाधित न करने की शर्त रखी है।
ध्वनि प्रदूषण के नियमों का पालन
कार्यक्रम के दौरान लाउडस्पीकर और दूसरे ध्वनि उपकरणों के इस्तेमाल को लेकर भी नियम लागू होंगे।
आयोजकों को ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों का पालन करना होगा। पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और तय ध्वनि सीमा का पालन करने को कहा है।
इसका मकसद आसपास रहने वाले लोगों को अनावश्यक परेशानी से बचाना है। साथ ही कार्यक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी इसका हिस्सा है।
कानून-व्यवस्था बिगड़ी तो आयोजक जिम्मेदार
पुलिस की अनुमति में एक अहम शर्त यह है कि कार्यक्रम के कारण कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है तो आयोजकों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
अगर कोई अवैध गतिविधि होती है या कार्यक्रम के दौरान ऐसी स्थिति पैदा होती है जिससे सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होती है, तो पुलिस कार्रवाई कर सकती है।
जरूरत पड़ने पर कार्यक्रम की अनुमति रद्द करने का अधिकार भी पुलिस के पास रहेगा।
ट्रैफिक व्यवस्था पर भी नजर
कार्यक्रम में हजारों लोगों के पहुंचने की संभावना है। ऐसे में पुणे पुलिस और ट्रैफिक विभाग के सामने यातायात व्यवस्था बनाए रखना भी बड़ी चुनौती होगी।
कार्यक्रम स्थल के आसपास वाहनों की आवाजाही बढ़ सकती है। इसलिए पार्किंग और प्रवेश-निकास व्यवस्था को सही तरीके से लागू करना जरूरी होगा।
पुलिस की अनुमति यातायात विभाग से जरूरी अनापत्ति प्रमाणपत्र जैसी औपचारिकताओं से भी जुड़ी है।
कांग्रेस के लिए क्यों अहम है कार्यक्रम?
‘छात्रों की गूंज’ कांग्रेस के छात्र और युवा संपर्क अभियान का हिस्सा है। राहुल गांधी इस कार्यक्रम के जरिए छात्राओं और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करेंगे।
शिक्षा, सुरक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और करियर के अवसर जैसे मुद्दे कार्यक्रम के केंद्र में रहेंगे। ऐसे में कांग्रेस इसे युवाओं के बीच अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने के अवसर के तौर पर भी देख सकती है।
कार्यक्रम को लेकर पहले अनुमति और प्रतिबंधों का मुद्दा सामने आने से इसकी राजनीतिक अहमियत और बढ़ गई है।
पहले कर्फ्यू को लेकर हुआ था विवाद
पुणे में लागू प्रतिबंधों के बीच कार्यक्रम की अनुमति को लेकर कांग्रेस और प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति बनी थी। कांग्रेस की ओर से यह चिंता भी सामने आई थी कि प्रतिबंधों के कारण कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है।
अब पुलिस की ओर से अनुमति मिलने के बाद कार्यक्रम का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि 30 शर्तों के कारण आयोजकों के सामने बड़ी जिम्मेदारी भी आ गई है।
उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से हो और किसी भी नियम का उल्लंघन न हो।
किन शर्तों का सबसे ज्यादा असर पड़ेगा?
कार्यक्रम के दौरान इन नियमों पर खास नजर रहेगी:
- आपत्तिजनक बैनर और तस्वीरों पर रोक।
- धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली गतिविधि नहीं।
- ड्रोन के इस्तेमाल पर रोक।
- पूरे कार्यक्रम स्थल पर सीसीटीवी।
- महिला और पुरुषों के लिए अलग व्यवस्था।
- पर्याप्त निजी सुरक्षा कर्मियों की तैनाती।
- महिला सुरक्षाकर्मियों और स्वयंसेवकों की व्यवस्था।
- पीने के पानी और शौचालय की पर्याप्त सुविधा।
- पार्किंग की उचित व्यवस्था।
- मेडिकल और दमकल सेवाओं के लिए रास्ता खुला रखना।
- ध्वनि प्रदूषण के नियमों का पालन।
- किसी अवैध गतिविधि की स्थिति में कार्रवाई का प्रावधान।
ये 30 शर्तों में से सामने आई प्रमुख शर्तें हैं। अनुमति पत्र में अन्य प्रशासनिक और सुरक्षा नियम भी शामिल हैं।
निष्कर्ष
पुणे में प्रतिबंधों के बीच राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को पुलिस की मंजूरी मिल गई है। 22 अगस्त को होने वाले इस कार्यक्रम के लिए पुलिस ने 30 शर्तें तय की हैं।
ड्रोन पर रोक, सीसीटीवी, सुरक्षा व्यवस्था, पार्किंग, शौचालय, ध्वनि सीमा और धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखने जैसी शर्तों का पालन आयोजकों को करना होगा। कार्यक्रम में 8 हजार से 10 हजार लोगों के पहुंचने का अनुमान है।
अब कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती कार्यक्रम को शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित कराने की है। पुलिस की शर्तों का पालन नहीं होने या कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति में अनुमति रद्द भी की जा सकती है।

