भोपाल में शिक्षक भर्ती में पदवृद्धि की मांग पर धरना, 4 दिन से निर्जल अनशन पर बैठे अभ्यर्थी की तबीयत बिगड़ी; अस्पताल जाने से इनकार
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शिक्षक भर्ती-2025 में पद बढ़ाने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार जारी है। नीलम पार्क में चल रहे अनिश्चितकालीन धरने के दौरान ब्यावरा निवासी नरेंद्र राजपूत की तबीयत बिगड़ गई। वह चार दिन से अन्न-जल त्यागकर अनशन पर बैठे हैं और अस्पताल जाने से इनकार कर रहे हैं।
अभ्यर्थियों की मांग है कि वर्ग-2 और वर्ग-3 शिक्षक भर्ती में रिक्त पदों को शामिल कर पदों की संख्या बढ़ाई जाए और बढ़े हुए पदों पर दूसरी काउंसलिंग कराई जाए। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक सरकार इस संबंध में ठोस आदेश जारी नहीं करती, तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।
नीलम पार्क में चौथे दिन भी जारी रहा धरना
भोपाल के नीलम पार्क में शिक्षक भर्ती-2025 के अभ्यर्थी 21 अगस्त से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से अभ्यर्थी यहां पहुंचे हैं और वर्ग-2 माध्यमिक तथा वर्ग-3 प्राथमिक शिक्षक भर्ती में पदवृद्धि की मांग कर रहे हैं।
आंदोलनकारियों के मुताबिक, यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने पद बढ़ाने की मांग को लेकर भोपाल में प्रदर्शन किया हो। उनका कहना है कि नवंबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच भी अलग-अलग चरणों में प्रदर्शन और धरने किए जा चुके हैं।
अब अभ्यर्थियों ने आंदोलन को अनिश्चितकालीन कर दिया है। उनका कहना है कि इस बार वे लिखित आदेश मिलने के बाद ही धरना समाप्त करेंगे।
चार दिन से निर्जल अनशन पर नरेंद्र राजपूत
धरने में शामिल ब्यावरा निवासी नरेंद्र राजपूत पिछले चार दिनों से अन्न और पानी का त्याग कर अनशन कर रहे हैं। सोमवार रात करीब 3 बजे उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें चक्कर आने और कमजोरी की शिकायत हुई।
साथी अभ्यर्थियों ने प्रशासन को इसकी सूचना दी। पुलिस और प्रशासन की टीम ने नरेंद्र को अस्पताल ले जाने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने अस्पताल जाने से इनकार कर दिया।
नरेंद्र का कहना है कि जब तक शिक्षक भर्ती में पदवृद्धि को लेकर सरकार कोई ठोस आदेश जारी नहीं करती, तब तक वह आंदोलन स्थल से नहीं हटेंगे। उन्होंने मांग की है कि डॉक्टरों की टीम को धरना स्थल पर बुलाकर उनकी स्वास्थ्य जांच कराई जाए।
तबीयत बिगड़ने के बावजूद मांग पर अड़े
नरेंद्र राजपूत ने धरना स्थल पर कहा कि उन्होंने कई दिनों से पानी की एक घूंट तक नहीं ली है। उन्होंने सरकार से तत्काल उनकी मांग पर निर्णय लेने की अपील की है।
उनका कहना है कि अभ्यर्थियों की मांग केवल नौकरी पाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में उपलब्ध रिक्त पदों को शामिल करने की है। उन्होंने मुख्यमंत्री से भी धरना स्थल पर आकर अभ्यर्थियों की बात सुनने की अपील की है।
अनशन के कारण उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद आंदोलन की स्थिति और गंभीर हो गई है। प्रशासन की ओर से उन्हें अस्पताल ले जाने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने अपनी मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है।
वर्ग-2 और वर्ग-3 में पद बढ़ाने की मांग
आंदोलनकारी अभ्यर्थियों ने शिक्षक भर्ती में अलग-अलग वर्गों के लिए पदों की संख्या बढ़ाने की मांग रखी है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अभ्यर्थी वर्ग-2 में प्रत्येक विषय में 3 हजार अतिरिक्त पद और वर्ग-3 में कुल 25 हजार पद किए जाने की मांग कर रहे हैं।
इसके साथ ही बढ़े हुए पदों पर दूसरी काउंसलिंग कराने की मांग भी की जा रही है। अभ्यर्थियों का तर्क है कि इससे ऐसे उम्मीदवारों को भी नियुक्ति का अवसर मिल सकता है, जिन्होंने परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन किया है लेकिन सीमित पदों के कारण चयन से बाहर रह गए।
उनका कहना है कि अगर रिक्त पदों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया जाता है तो बड़ी संख्या में योग्य अभ्यर्थियों को रोजगार का अवसर मिल सकता है।
खाली पदों को भर्ती में शामिल करने की मांग
अभ्यर्थियों का दावा है कि मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद खाली हैं। इसके बावजूद भर्ती प्रक्रिया में अपेक्षाकृत कम पद शामिल किए गए हैं।
आंदोलनकारी इसी आधार पर सरकार से पदों की संख्या बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि विभाग में रिक्त पद मौजूद हैं तो उन्हें मौजूदा भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए।
अभ्यर्थियों के अनुसार, इससे सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने में मदद मिलेगी और लंबे समय से नौकरी का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों को भी अवसर मिलेगा।
दूसरी काउंसलिंग की मांग भी प्रमुख
पदवृद्धि के साथ अभ्यर्थी दूसरी काउंसलिंग की मांग भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर नए पद जोड़े जाते हैं तो उन पदों के लिए पात्र उम्मीदवारों को दोबारा काउंसलिंग का अवसर दिया जाना चाहिए।
आंदोलनकारियों का मानना है कि इससे भर्ती प्रक्रिया में अधिक उम्मीदवारों को शामिल किया जा सकेगा। खासकर ऐसे अभ्यर्थियों को इसका फायदा मिल सकता है जो अच्छे अंक होने के बावजूद उपलब्ध पदों की सीमित संख्या के कारण चयनित नहीं हो पाए।
दूसरी काउंसलिंग की मांग अब आंदोलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल हो गई है।
बच्चों के साथ धरने पर बैठी महिला अभ्यर्थी
नीलम पार्क में चल रहे आंदोलन में कई महिला अभ्यर्थी अपने छोटे बच्चों के साथ धरने पर बैठी हैं। उनका कहना है कि लंबे समय तक पार्क में रहना आसान नहीं है, लेकिन भर्ती में पदवृद्धि का फैसला होने तक वे आंदोलन जारी रखना चाहती हैं।
महिला अभ्यर्थियों ने धरना स्थल पर पानी, शौचालय और मच्छरों से जुड़ी परेशानियों की भी बात कही है। छोटे बच्चों के साथ खुले स्थान पर रहने के कारण उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
इसके बावजूद उनका कहना है कि यह उनके भविष्य और रोजगार से जुड़ा मुद्दा है, इसलिए वे आंदोलन से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं।
21 अगस्त से शुरू हुआ था आंदोलन
प्रदेशभर के शिक्षक अभ्यर्थी 21 अगस्त को भोपाल पहुंचे थे। उन्होंने लोक शिक्षण संचालनालय के सामने प्रदर्शन और ज्ञापन देने के बाद रैली निकाली और नीलम पार्क पहुंचकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया।
अभ्यर्थियों का कहना है कि पिछले कई महीनों में वे अलग-अलग स्तर पर अपनी मांग सरकार और विभाग के सामने रख चुके हैं। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, पहले भी कई बार आंदोलन और ज्ञापन दिए गए, लेकिन अब तक पदवृद्धि को लेकर उनकी मांग पर ठोस फैसला नहीं हुआ।
इसी कारण इस बार आंदोलन को अनिश्चितकालीन रूप दिया गया है।
प्रशासन के सामने बढ़ी चुनौती
नरेंद्र राजपूत की तबीयत बिगड़ने के बाद प्रशासन के सामने आंदोलन को संभालने की चुनौती बढ़ गई है। एक तरफ अभ्यर्थी अपनी मांगों पर अड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ लंबे समय तक अन्न-जल त्यागने के कारण अनशनकारी की स्वास्थ्य स्थिति चिंता का विषय बन गई है।
पुलिस प्रशासन ने उन्हें अस्पताल ले जाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। उनकी मांग है कि चिकित्सकीय जांच धरना स्थल पर ही कराई जाए।
आंदोलन के दौरान किसी भी तरह की स्वास्थ्य संबंधी गंभीर स्थिति न बने, इसके लिए प्रशासन और अभ्यर्थियों के बीच संवाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अभ्यर्थियों का कहना- कई बार कर चुके हैं आंदोलन
आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का दावा है कि पदवृद्धि की मांग को लेकर यह उनका कई चरणों में चल रहा आंदोलन है। इससे पहले वे ज्ञापन, प्रदर्शन और अन्य तरीकों से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का प्रयास कर चुके हैं।
उनका कहना है कि लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों के सामने अब उम्र और अवसर दोनों की चुनौती है। इसलिए वे चाहते हैं कि मौजूदा भर्ती में ही ज्यादा पद शामिल किए जाएं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर अभी फैसला नहीं हुआ तो कई योग्य उम्मीदवार सरकारी शिक्षक बनने के अवसर से वंचित हो सकते हैं।
सरकारी स्कूलों में रिक्त पदों का मुद्दा
शिक्षक भर्ती को लेकर चल रहे आंदोलन में सबसे बड़ा मुद्दा सरकारी स्कूलों में रिक्त पदों का है। अभ्यर्थियों का दावा है कि प्रदेश में शिक्षकों के हजारों पद खाली हैं और इसके बावजूद भर्ती में अपेक्षाकृत कम पद शामिल किए गए हैं।
यह मुद्दा केवल नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं है। शिक्षकों की कमी का सीधा असर सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों पर भी पड़ता है।
अगर रिक्त पदों को चरणबद्ध तरीके से भरा जाता है तो स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता बेहतर हो सकती है। हालांकि, कितने पद वास्तव में रिक्त हैं और उनमें से कितने पद भर्ती के लिए उपलब्ध हैं, इसका अंतिम आंकड़ा सरकार और संबंधित विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगा।
अब सरकार के फैसले पर टिकी नजर
भोपाल में आंदोलन के चौथे दिन सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि सरकार या शिक्षा विभाग की ओर से अभ्यर्थियों के साथ बातचीत के लिए कोई ठोस पहल होती है या नहीं।
अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें हैं:
- वर्ग-2 शिक्षक भर्ती में प्रत्येक विषय के पद बढ़ाना।
- वर्ग-3 शिक्षक भर्ती में पदों की संख्या बढ़ाना।
- रिक्त पदों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करना।
- बढ़े हुए पदों पर दूसरी काउंसलिंग कराना।
- सरकार की ओर से पदवृद्धि को लेकर लिखित आदेश जारी करना।
आंदोलनकारियों का कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन से वे धरना समाप्त नहीं करेंगे। वे लिखित आदेश की मांग पर अड़े हुए हैं।
स्वास्थ्य को लेकर भी बढ़ी चिंता
चार दिन तक निर्जल अनशन के बाद नरेंद्र राजपूत की तबीयत बिगड़ना आंदोलन का सबसे संवेदनशील पहलू बन गया है। ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय निगरानी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
अस्पताल जाने से इनकार के बाद धरना स्थल पर डॉक्टरों की टीम से जांच कराने की उनकी मांग सामने आई है। प्रशासन की ओर से आगे क्या कदम उठाया जाता है, इस पर भी नजर रहेगी।
आंदोलनकारी अपनी मांग को लेकर दृढ़ हैं, लेकिन अनशनकारी की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए तत्काल चिकित्सकीय हस्तक्षेप की जरूरत भी सामने आ रही है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल नीलम पार्क में धरना जारी है और अभ्यर्थी पदवृद्धि के आदेश की मांग पर अड़े हुए हैं। नरेंद्र राजपूत की तबीयत बिगड़ने के बाद आंदोलन का स्वास्थ्य पक्ष भी गंभीर हो गया है।
अगर सरकार की ओर से बातचीत या लिखित आश्वासन मिलता है तो आंदोलन की दिशा बदल सकती है। वहीं मांगों पर फैसला नहीं होने की स्थिति में अभ्यर्थियों के आंदोलन को और तेज करने की संभावना बनी हुई है।
निष्कर्ष
भोपाल के नीलम पार्क में शिक्षक भर्ती-2025 में पदवृद्धि की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन चौथे दिन गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। ब्यावरा निवासी नरेंद्र राजपूत चार दिन से अन्न-जल त्यागकर अनशन पर बैठे हैं और तबीयत बिगड़ने के बावजूद अस्पताल जाने से इनकार कर रहे हैं।
अभ्यर्थियों की मांग है कि वर्ग-2 और वर्ग-3 शिक्षक भर्ती में ज्यादा पद जोड़े जाएं, रिक्त पदों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया जाए और बढ़े हुए पदों पर दूसरी काउंसलिंग कराई जाए। प्रदेशभर से आए अभ्यर्थी 21 अगस्त से नीलम पार्क में अनिश्चितकालीन धरना दे रहे हैं।
अब पूरे मामले में सरकार और शिक्षा विभाग की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। खासकर नरेंद्र राजपूत की बिगड़ती तबीयत के बीच प्रशासन की ओर से संवाद और चिकित्सकीय सहायता को लेकर उठाए जाने वाले कदम पर सभी की नजर है।

