विजय शाह पर अभियोजन मंजूरी: आज कैबिनेट में फैसला, 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई
मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह से जुड़े मामले में आज बड़ा फैसला हो सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में विजय शाह अभियोजन मंजूरी के प्रस्ताव पर चर्चा होने की संभावना है।
अगर कैबिनेट मंजूरी देती है, तो प्रस्ताव राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 31 अगस्त को होनी है।
विजय शाह अभियोजन मंजूरी पर आज क्यों नजर?
विजय शाह के खिलाफ मामला करीब एक साल से कानूनी प्रक्रिया में है। यह मामला कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए उनके विवादित बयान से जुड़ा है।
मध्य प्रदेश सरकार के सामने अब अभियोजन की मंजूरी को लेकर फैसला करने की स्थिति है। कैबिनेट की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई से पहले सरकार का रुख सामने आ सकता है।
कैबिनेट के फैसले के बाद क्या होगा?
अगर कैबिनेट अभियोजन की मंजूरी देती है, तो प्रस्ताव राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। इसके बाद राज्यपाल की स्वीकृति मिलने पर आगे की कानूनी प्रक्रिया का रास्ता खुल सकता है।
हालांकि, कैबिनेट में क्या फैसला होगा, इसकी आधिकारिक जानकारी निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी। इसलिए फिलहाल इसे संभावित फैसला ही माना जा रहा है।
क्या है विजय शाह से जुड़ा पूरा मामला?
यह विवाद 11 मई 2025 को महू के रायकुंडा गांव में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिए गए बयान से शुरू हुआ था। विजय शाह ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी चर्चा के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर टिप्पणी की थी।
बयान सामने आने के बाद देशभर में इसकी आलोचना हुई। मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट तक पहुंचा और अदालत ने स्वतः संज्ञान लेते हुए एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था।
इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। शीर्ष अदालत ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT से जांच कराई।
SIT ने पूरी की जांच
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मामले की जांच के लिए SIT का गठन किया गया था। SIT ने जांच पूरी करने के बाद अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी और अभियोजन की मंजूरी मांगी।
रिपोर्ट में भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 के तहत अभियोजन की अनुमति का मुद्दा उठाया गया है। इस धारा के तहत मामले में अदालत द्वारा संज्ञान लेने के लिए आवश्यक सरकारी मंजूरी का सवाल सामने आया है।
यही वजह है कि SIT की जांच पूरी होने के बाद भी मामला आगे बढ़ने में सरकार की मंजूरी महत्वपूर्ण हो गई।
सरकार की मंजूरी क्यों जरूरी है?
मामला एक सरकारी मंत्री से जुड़ा है। ऐसे मामलों में संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत अभियोजन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए सरकार की मंजूरी जरूरी हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में मध्य प्रदेश सरकार को इस विषय पर निर्णय लेने के लिए समय दिया था। इसके बाद भी मामला लंबित रहने पर अदालत ने सरकार से अनुपालन की अपेक्षा जताई।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से क्या कहा था?
19 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को अभियोजन की मंजूरी पर दो सप्ताह के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया था। अदालत ने यह निर्देश SIT की जांच रिपोर्ट के बाद दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि SIT ने मामले की जांच की है और अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है। इसके बाद मंजूरी के मुद्दे पर सरकार के निर्णय का इंतजार था।
अदालत ने मामले में आगे की कार्रवाई और अनुपालन रिपोर्ट से जुड़ी प्रक्रिया भी तय की थी।
31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
विजय शाह मामले में सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई 31 अगस्त को होनी है। इससे पहले आज होने वाली कैबिनेट बैठक का फैसला काफी अहम माना जा रहा है।
अगर सरकार की ओर से अभियोजन मंजूरी को लेकर निर्णय हो जाता है, तो उसकी जानकारी सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी जा सकती है। इससे मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
अगर फैसला फिर टलता है, तो अदालत सरकार से देरी को लेकर सवाल कर सकती है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट का अगला रुख सुनवाई के दौरान ही स्पष्ट होगा।
विजय शाह ने मांगी थी माफी
विवाद बढ़ने के बाद विजय शाह ने अपने बयान को लेकर माफी मांगी थी। उन्होंने अपने बयान को लेकर सफाई भी दी थी और कहा था कि उनका उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं था।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी माफी को लेकर पहले नाराजगी जताई थी। जनवरी की सुनवाई में अदालत ने माफी को लेकर कड़ी टिप्पणी की थी।
इससे साफ है कि अदालत ने मामले को केवल बयान और माफी तक सीमित नहीं माना। कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच और अभियोजन की मंजूरी भी महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है।
मामले में अब तक क्या हुआ?
विजय शाह मामले की प्रमुख घटनाओं को इस तरह समझा जा सकता है:
- 11 मई 2025 को महू में विजय शाह ने विवादित बयान दिया।
- बयान के बाद व्यापक विरोध और कानूनी कार्रवाई की मांग हुई।
- मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मामले में स्वतः संज्ञान लिया।
- एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हुई।
- मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
- सुप्रीम कोर्ट ने SIT से जांच कराने के निर्देश दिए।
- SIT ने जांच पूरी कर रिपोर्ट सरकार को भेजी।
- अभियोजन की मंजूरी का मुद्दा सरकार के सामने आया।
- सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को निर्णय लेने के निर्देश दिए।
- अब 25 अगस्त को कैबिनेट में इस पर चर्चा की संभावना है।
- 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई होनी है।
कैबिनेट के फैसले का राजनीतिक महत्व
विजय शाह मध्य प्रदेश सरकार में जनजातीय कार्य मंत्री हैं। ऐसे में उनके खिलाफ अभियोजन की मंजूरी का फैसला राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मामला पहले ही लंबे समय से अदालत में चल रहा है। अब कैबिनेट के फैसले से सरकार की स्थिति साफ हो सकती है।
विपक्ष की ओर से भी इस मामले को लेकर सरकार पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। ऐसे में 31 अगस्त की सुप्रीम कोर्ट सुनवाई से पहले सरकार का फैसला राजनीतिक चर्चा का विषय बन सकता है।
सरकार के सामने क्या विकल्प हैं?
सरकार के सामने फिलहाल अभियोजन मंजूरी से जुड़ा फैसला लेने का विकल्प है। मंजूरी दिए जाने पर प्रस्ताव राज्यपाल के पास भेजा जा सकता है।
दूसरी स्थिति में फैसला आगे बढ़ाने में देरी हो सकती है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई महत्वपूर्ण हो जाएगी।
फिलहाल किसी भी संभावित फैसले को लेकर अंतिम स्थिति कैबिनेट बैठक के बाद ही स्पष्ट होगी।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई क्यों अहम?
31 अगस्त की सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि अदालत पहले ही सरकार से अभियोजन मंजूरी के विषय में निर्णय लेने को कह चुकी है।
SIT की जांच पूरी हो चुकी है। अब सरकार का निर्णय मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सरकार की कार्रवाई और अब तक हुई प्रगति की जानकारी भी देख सकता है। हालांकि, सुनवाई में अदालत क्या आदेश देती है, यह उसी दिन स्पष्ट होगा।
आगे क्या होगा?
अब सबसे पहले कैबिनेट बैठक के फैसले का इंतजार है। यदि अभियोजन मंजूरी को हरी झंडी मिलती है, तो प्रस्ताव राज्यपाल के पास भेजा जाएगा।
इसके बाद राज्यपाल की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। मंजूरी मिलने पर आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।
दूसरी ओर, अगर आज कोई अंतिम फैसला नहीं होता है, तो 31 अगस्त की सुप्रीम कोर्ट सुनवाई में सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी पड़ सकती है।
निष्कर्ष
विजय शाह अभियोजन मंजूरी का मामला अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। 25 अगस्त को मध्य प्रदेश कैबिनेट में इस मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना है। मंजूरी मिलने पर प्रस्ताव राज्यपाल के पास भेजा जाएगा।
इस पूरे मामले में SIT की जांच पूरी हो चुकी है और अभियोजन की अनुमति का मुद्दा सरकार के सामने है। अब सबकी नजर कैबिनेट के फैसले और 31 अगस्त को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर है।
Short Description:
विजय शाह पर अभियोजन मंजूरी को लेकर आज MP कैबिनेट में फैसला हो सकता है। मंजूरी के बाद प्रस्ताव राज्यपाल के पास जाएगा, 31 अगस्त को SC सुनवाई।

