100 किमी पियर वर्क, 7 माउंटेन टनल, 36 ब्रिज… बुलेट ट्रेन के महाराष्ट्र सेक्शन ने पकड़ी रफ्तार
भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना ने अब महाराष्ट्र में भी रफ्तार पकड़ ली है। बुलेट ट्रेन महाराष्ट्र सेक्शन के 135.45 किलोमीटर लंबे हिस्से में पियर, सुरंगों, पुलों और स्टेशनों का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। ठाणे और पालघर के चुनौतीपूर्ण इलाकों में आधुनिक तकनीक के जरिए बड़े पैमाने पर काम चल रहा है।
बुलेट ट्रेन महाराष्ट्र सेक्शन में 100 किमी से ज्यादा पियर वर्क
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का महाराष्ट्र वाला 135.45 किलोमीटर हिस्सा शिलफाटा से महाराष्ट्र-गुजरात सीमा के पास जारोली गांव तक है। इस पूरे हिस्से को एलिवेटेड बनाया जा रहा है।
ताजा अपडेट के अनुसार इस सेक्शन में 100 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में पियर निर्माण का काम पूरा हो चुका है। वहीं करीब 74 किलोमीटर पियर वायाडक्ट के गर्डर लॉन्चिंग के लिए तैयार हो चुके हैं।
पियर बुलेट ट्रेन के एलिवेटेड ट्रैक को सहारा देने वाली प्रमुख संरचना है। इसके ऊपर गर्डर और वायाडक्ट तैयार किए जाते हैं, जिन पर आगे हाई-स्पीड रेल ट्रैक बिछाया जाएगा।
135.45 किमी का यह हिस्सा क्यों खास है?
महाराष्ट्र का यह सेक्शन इंजीनियरिंग के लिहाज से काफी चुनौतीपूर्ण है। यहां घनी आबादी, पहाड़ी क्षेत्र, नदियां, रेलवे लाइन और प्रमुख सड़क मार्ग रास्ते में आते हैं।
इसलिए परियोजना में केवल सामान्य एलिवेटेड वायाडक्ट ही नहीं, बल्कि कई विशेष पुल और सुरंगें भी बनाई जा रही हैं। यही वजह है कि इस हिस्से में निर्माण तकनीक और योजना दोनों महत्वपूर्ण हैं।
7 माउंटेन टनल पर चल रहा काम
बुलेट ट्रेन महाराष्ट्र सेक्शन में सात पर्वतीय सुरंगें बनाई जा रही हैं। इनमें से तीन सुरंगों का ब्रेकथ्रू पूरा हो चुका है।
ब्रेकथ्रू का मतलब सुरंग के दोनों सिरों से चल रहा खुदाई का काम आपस में जुड़ जाना है। इसके बाद ड्रेनेज, वॉटरप्रूफिंग और टनल लाइनिंग जैसे दूसरे महत्वपूर्ण काम किए जाते हैं।
महाराष्ट्र की सात पर्वतीय सुरंगों की कुल लंबाई करीब 6.05 किलोमीटर बताई गई है। इस तरह का निर्माण पहाड़ी इलाकों में हाई-स्पीड रेल के लिए विशेष इंजीनियरिंग की मांग करता है।
पहाड़ों के बीच हाई-स्पीड रेल का निर्माण
सामान्य रेलवे लाइन की तुलना में हाई-स्पीड रेल के लिए ट्रैक की डिजाइन और ढलान पर ज्यादा नियंत्रण जरूरी होता है। इसी कारण कुछ स्थानों पर सुरंग का निर्माण व्यावहारिक विकल्प बनता है।
महाराष्ट्र के पहाड़ी क्षेत्र में सुरंगों का निर्माण इसी जरूरत को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। इससे ट्रेन के लिए निर्धारित और सुरक्षित रेल कॉरिडोर तैयार करने में मदद मिलेगी।
36 पुल और क्रॉसिंग भी बन रहे
इस सेक्शन में अलग-अलग स्थानों पर कुल 36 पुल और क्रॉसिंग का निर्माण किया जा रहा है। इनमें रेलवे लाइन, हाईवे और नदी जैसे महत्वपूर्ण अवरोधों को पार करने वाली संरचनाएं शामिल हैं।
इनमें कुछ पुल विशेष रूप से बड़े हैं। उल्हास नदी पर करीब 460 मीटर और जगनी नदी पर करीब 510 मीटर लंबा पुल बनाया जा रहा है।
सबसे महत्वपूर्ण संरचनाओं में वैतरणा नदी पर बनने वाला करीब 2.32 किलोमीटर लंबा पुल शामिल है। यह परियोजना के प्रमुख नदी पुलों में से एक है।
नदी के ऊपर बनेगा विशाल वायाडक्ट
वैतरणा नदी का क्षेत्र बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण माना जाता है। यहां लंबे स्पैन वाली संरचना तैयार की जा रही है।
ऐसे पुलों में डिजाइन, नींव और निर्माण के दौरान नदी के पर्यावरण तथा जल प्रवाह का भी ध्यान रखना पड़ता है। इसलिए यहां सामान्य वायाडक्ट की तुलना में अलग इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।
ठाणे, विरार और बोइसर में बन रहे स्टेशन
महाराष्ट्र सेक्शन में तीन प्रमुख एलिवेटेड स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इनमें ठाणे, विरार और बोइसर स्टेशन शामिल हैं।
ठाणे स्टेशन को आसपास के पर्यावरण को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जा रहा है। खासतौर पर मैंग्रोव क्षेत्र को देखते हुए निर्माण में पर्यावरणीय पहलुओं का ध्यान रखा जा रहा है।
स्टेशन बनने के बाद यह सेक्शन केवल हाई-स्पीड रेल के लिए ट्रैक उपलब्ध नहीं कराएगा, बल्कि ठाणे और पालघर क्षेत्र को आधुनिक रेल कनेक्टिविटी से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
निर्माण के लिए आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल
इतने बड़े प्रोजेक्ट को तेजी से पूरा करने के लिए महाराष्ट्र में आधुनिक निर्माण उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यहां 9 कास्टिंग यार्ड सक्रिय हैं।
इसके अलावा 7 फुल-स्पैन लॉन्चिंग गैंट्री और 8 स्पैन-बाय-स्पैन लॉन्चिंग गैंट्री भी काम कर रही हैं।
इन मशीनों की मदद से तैयार गर्डर को तेजी से निर्धारित स्थान तक पहुंचाकर स्थापित किया जाता है। इससे बड़े एलिवेटेड सेक्शन के निर्माण में समय कम करने में मदद मिलती है।
एलिवेटेड कॉरिडोर का बड़ा हिस्सा
महाराष्ट्र का 135.45 किलोमीटर लंबा मुख्य हिस्सा एलिवेटेड है। इसमें वायाडक्ट और पुलों की कुल लंबाई करीब 124.027 किलोमीटर है।
इससे साफ है कि परियोजना का बड़ा हिस्सा जमीन से ऊपर बनाया जा रहा है। पहाड़ी और नदी वाले इलाकों में सुरंग और पुल इसके महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट कितना लंबा है?
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 508 किलोमीटर है। यह मुंबई से शुरू होकर गुजरात के अहमदाबाद तक जाएगा।
इस परियोजना को नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी NHSRCL विकसित कर रहा है। पूरी परियोजना में महाराष्ट्र के अलावा गुजरात और केंद्र शासित क्षेत्र दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव का हिस्सा भी शामिल है।
महाराष्ट्र में चल रहा 135.45 किलोमीटर का काम इसी बड़े कॉरिडोर का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
समंदर के नीचे भी बन रही सुरंग
बुलेट ट्रेन परियोजना की खासियत केवल महाराष्ट्र की पर्वतीय सुरंगों तक सीमित नहीं है। मुंबई के पास ठाणे क्रीक के नीचे करीब 7 किलोमीटर लंबी समुद्र के नीचे सुरंग भी बनाई जा रही है।
यह भारत की पहली अंडरसी रेल सुरंग होगी। इसका निर्माण चुनौतीपूर्ण भूगर्भीय और पर्यावरणीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।
इस तरह मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर में एलिवेटेड ट्रैक, पर्वतीय सुरंग और अंडरसी सुरंग जैसी अलग-अलग इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल हो रहा है।
गुजरात में भी निर्माण ने पकड़ी रफ्तार
महाराष्ट्र सेक्शन के साथ गुजरात में भी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर तेजी से काम जारी है। अगस्त 2027 में सूरत और वापी के बीच करीब 100 किलोमीटर के हिस्से में पहला परिचालन शुरू करने का लक्ष्य बताया गया है।
पूरे 508 किलोमीटर कॉरिडोर को दिसंबर 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य भी सामने आया है। हालांकि किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की तरह अंतिम समयसीमा निर्माण की वास्तविक प्रगति और अन्य प्रक्रियाओं पर निर्भर करती है।
बुलेट ट्रेन से क्या बदलेगा?
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना का उद्देश्य देश में तेज और आधुनिक रेल परिवहन का नया नेटवर्क तैयार करना है। ट्रेन की डिजाइन गति 320 किलोमीटर प्रति घंटा तक रखी गई है।
इसके पूरा होने के बाद मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा समय में बड़ी कमी आने की उम्मीद है। साथ ही मार्ग में आने वाले प्रमुख शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों को तेज रेल कनेक्टिविटी मिलेगी।
इससे व्यापार, पर्यटन और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
इंजीनियरिंग के लिए बड़ी चुनौती
महाराष्ट्र का भूगोल इस परियोजना को खास बनाता है। एक तरफ मुंबई महानगर क्षेत्र है, दूसरी ओर पहाड़ी और वन क्षेत्र हैं। बीच में कई नदियां और प्रमुख परिवहन मार्ग भी आते हैं।
ऐसे में निर्माण के दौरान सुरक्षा और पर्यावरण दोनों का ध्यान रखना जरूरी है। हाई-स्पीड रेल के लिए संरचनाओं की गुणवत्ता और सटीकता भी सामान्य रेल परियोजनाओं की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण होती है।
इसी वजह से पियर, गर्डर, पुल और सुरंगों का निर्माण चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है।
अब आगे क्या होगा?
आने वाले समय में तैयार पियर पर गर्डर लॉन्चिंग का काम और तेज होने की उम्मीद है। इसके साथ सुरंगों में लाइनिंग, वॉटरप्रूफिंग और अन्य कार्य आगे बढ़ेंगे।
स्टेशनों और नदी पुलों के निर्माण के साथ ट्रैक से जुड़े काम भी चरणबद्ध तरीके से शुरू होंगे। इस पूरी प्रक्रिया के बाद इलेक्ट्रिफिकेशन, सिग्नलिंग और हाई-स्पीड रेल सिस्टम की स्थापना होगी।
महाराष्ट्र सेक्शन में मौजूदा प्रगति से यह साफ है कि परियोजना अब केवल योजना और शुरुआती निर्माण के चरण में नहीं है। बड़े पैमाने पर स्थायी संरचनाएं जमीन पर आकार ले रही हैं।
निष्कर्ष
बुलेट ट्रेन महाराष्ट्र सेक्शन के 135.45 किलोमीटर हिस्से में निर्माण ने उल्लेखनीय गति पकड़ी है। 100 किलोमीटर से अधिक पियर वर्क, सात पर्वतीय सुरंगों, 36 पुल और क्रॉसिंग तथा तीन प्रमुख स्टेशनों का निर्माण इस सेक्शन की जटिलता और पैमाने को दिखाता है।
महाराष्ट्र में ठाणे और पालघर के कठिन इलाकों में तेजी से आगे बढ़ता यह काम भारत की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि तैयार संरचनाओं पर गर्डर, ट्रैक और अन्य सिस्टम का काम कितनी तेजी से आगे बढ़ता है।

