धामी मंत्रिमंडल की बैठक, इन 17 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर लगी मुहर, अदानी ग्रुप को पावर प्रोजेक्ट की मंजूरी
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में 25 अगस्त को हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। धामी कैबिनेट के 17 फैसले ऊर्जा, सहकारिता, स्वास्थ्य, परिवहन, कार्मिक और अन्य विभागों से जुड़े हैं। इनमें सबसे बड़ा फैसला 1320 मेगावाट की कोयला आधारित बिजली परियोजना के लिए अदानी पावर को जिम्मेदारी देने और 25 साल की बिजली खरीद व्यवस्था को मंजूरी देना रहा।
धामी कैबिनेट के 17 फैसलों पर लगी मुहर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में देहरादून सचिवालय में हुई बैठक में कुल 17 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक के बाद मुख्यमंत्री के अपर सचिव बंशीधर तिवारी ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी।
बैठक में राज्य की बिजली जरूरतों के साथ स्वास्थ्य, परिवहन, सहकारिता और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर भी निर्णय लिए गए। सरकार ने कई क्षेत्रों में नीतिगत बदलाव और नई व्यवस्थाओं को मंजूरी दी।
इन फैसलों में ऊर्जा क्षेत्र का प्रस्ताव सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। इसके अलावा उत्तराखंड राज्य सहकारिता नीति-2026 और मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन जैसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी मंजूर किए गए।
अदानी पावर को 1320 मेगावाट प्रोजेक्ट
कैबिनेट का सबसे अहम फैसला बिजली उत्पादन से जुड़ा रहा। उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी UPCL के प्रस्ताव पर 1320 मेगावाट कोयला आधारित बिजली की दीर्घकालिक खरीद को मंजूरी दी गई।
रिपोर्टों के अनुसार, इस परियोजना के लिए अदानी पावर की बोली सबसे कम रही। इसके बाद कैबिनेट ने परियोजना को अदानी पावर को देने पर मुहर लगाई।
25 साल के लिए बिजली खरीद
उत्तराखंड सरकार ने 1320 मेगावाट बिजली की खरीद के लिए 25 साल की अवधि को मंजूरी दी है। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, कुल टैरिफ ₹5.746 प्रति यूनिट तय किया गया है।
परियोजना के लिए छत्तीसगढ़ में कोल ब्लॉक का आवंटन पहले ही किया जा चुका है। अदानी पावर को प्लांट की स्थापना और संचालन की जिम्मेदारी दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
सरकार का कहना है कि लंबे समय की यह व्यवस्था राज्य की बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकती है। इससे भविष्य में बिजली की उपलब्धता को मजबूत करने का लक्ष्य है।
छत्तीसगढ़ में स्थापित होगा पावर प्लांट
इस फैसले को केवल उत्तराखंड में प्लांट लगाने के तौर पर समझना सही नहीं होगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, परियोजना के लिए कोल ब्लॉक छत्तीसगढ़ में आवंटित किया गया है और वहीं पिट-हेड थर्मल पावर प्लांट स्थापित किया जाना है।
उत्तराखंड को इस परियोजना से उत्पादित बिजली की आपूर्ति की जाएगी। इसलिए कैबिनेट का निर्णय राज्य की दीर्घकालिक ऊर्जा जरूरतों से सीधे जुड़ा है।
बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार लगातार ऊर्जा सुरक्षा पर जोर दे रही है। इस परियोजना को उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
उत्तराखंड राज्य सहकारिता नीति-2026 को मंजूरी
कैबिनेट ने उत्तराखंड राज्य सहकारिता नीति-2026 को भी मंजूरी दी। इस नीति के जरिए सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने और विभिन्न क्षेत्रों में सहकारी संस्थाओं की भूमिका बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
नई नीति में सात मिशन तय किए जाने की जानकारी सामने आई है। सरकार का उद्देश्य सहकारी क्षेत्र को राज्य की आर्थिक गतिविधियों से ज्यादा प्रभावी तरीके से जोड़ना है।
इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की उम्मीद जताई जा रही है।
परिवहन क्षेत्र में भी अहम फैसला
कैबिनेट ने उत्तराखंड मोटरयान कराधान सुधार अधिनियम को मंजूरी दी। इसके तहत वाहनों से जुड़े कर और ग्रीन सेस व्यवस्था में बदलाव किए गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, CNG वाहनों को ग्रीन सेस में मिलने वाली छूट जारी रहेगी। वहीं हाइब्रिड वाहनों को दी जा रही राहत समाप्त करने का फैसला किया गया है।
इसके साथ ही राज्य की नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके लिए दूसरे राज्यों की EV नीतियों का अध्ययन किया जाएगा।
EV नीति पर भी सरकार का जोर
उत्तराखंड में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए नई नीति तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होगी। सरकार दूसरे राज्यों में लागू नीतियों का अध्ययन कर राज्य के लिए उपयुक्त व्यवस्था तैयार करेगी।
इसका उद्देश्य परिवहन क्षेत्र को अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाने के साथ इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देना है।
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई प्रस्ताव मंजूर
कैबिनेट बैठक में स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय हुए। औषधियों और सर्जिकल सामग्री की खरीद के लिए उत्तराखंड मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन के गठन को मंजूरी दी गई।
नई संस्था दवाओं, सर्जिकल सामग्री और रसायनों की खरीद की जिम्मेदारी संभालेगी। इसके संचालन के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में व्यवस्था बनाए जाने की जानकारी दी गई है।
इसके अलावा चिकित्सा एवं परिवार कल्याण विभाग के सांख्यिक संवर्ग को भी मंजूरी मिली। हरिद्वार में राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र के लिए एक एकड़ भूमि उपलब्ध कराने का फैसला भी किया गया।
कर्मचारियों और प्रशासन से जुड़े फैसले
धामी कैबिनेट के 17 फैसले में कार्मिक और कर्मचारी हितों से जुड़े प्रस्ताव भी शामिल रहे। उत्तराखंड आबादी सर्वेक्षण अभिलेख नियमावली-2026 को मंजूरी दी गई।
उत्तराखंड सीड्स एवं डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को अन्य विभागों में शामिल करने पर भी सहमति बनी। वेतन नियमावली में आंशिक संशोधन को भी मंजूरी दी गई।
इसके अलावा उत्तराखंड लोकायुक्त खोजबीन समिति-2026 के गठन का प्रस्ताव भी स्वीकृत किया गया।
सैनिक कल्याण और रोजगार से जुड़े फैसले
कैबिनेट में पूर्व अग्निवीरों के पुनर्वास से जुड़ा फैसला भी लिया गया। रिपोर्ट के अनुसार, सेवा से मुक्त होकर लौटने वाले अग्निवीरों के पुनर्वास के लिए एक समर्पित प्रकोष्ठ बनाने का निर्णय किया गया है।
इसका उद्देश्य अग्निवीरों को सेवा के बाद रोजगार और पुनर्वास से जुड़े अवसरों की दिशा में सहायता उपलब्ध कराना है।
सरकार के इस फैसले को सैनिक कल्याण से जुड़ी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
निजी विश्वविद्यालय से जुड़ा प्रस्ताव भी मंजूर
कैबिनेट ने उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत उत्तरांचल विश्वविद्यालय की नियमावली को भी मंजूरी दी। यह फैसला उच्च शिक्षा क्षेत्र से जुड़ा है।
सरकार की ओर से विभिन्न विभागों से जुड़े प्रस्तावों को एक ही बैठक में मंजूरी दिए जाने से राज्य की प्रशासनिक और नीतिगत दिशा को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले सामने आए हैं।
बिजली संकट से निपटने की कोशिश
उत्तराखंड में बिजली की मांग बढ़ने के साथ भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को लेकर सरकार की चिंता लगातार बनी हुई है। 1320 मेगावाट की दीर्घकालिक बिजली खरीद को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
25 साल की बिजली खरीद व्यवस्था से राज्य को लंबे समय के लिए बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। हालांकि, परियोजना के वास्तविक परिणाम उसके निर्माण, संचालन और बिजली आपूर्ति की प्रभावशीलता पर निर्भर करेंगे।
अदानी पावर के साथ इस व्यवस्था को मंजूरी मिलने के बाद अब आगे की औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। इनमें बिजली खरीद समझौते और जरूरी नियामकीय स्वीकृतियां शामिल हैं।
17 फैसलों का असर किन क्षेत्रों पर पड़ेगा?
कैबिनेट के फैसलों का दायरा केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। सरकार ने कई विभागों में नई नीतियों और व्यवस्थाओं को मंजूरी दी है।
मुख्य क्षेत्रों में शामिल हैं:
- 1320 मेगावाट बिजली की दीर्घकालिक खरीद।
- अदानी पावर को पावर प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी।
- उत्तराखंड राज्य सहकारिता नीति-2026।
- नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति तैयार करने की प्रक्रिया।
- उत्तराखंड मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन का गठन।
- स्वास्थ्य विभाग से जुड़े नए संवर्ग और व्यवस्थाएं।
- लोकायुक्त खोजबीन समिति-2026।
- अग्निवीरों के पुनर्वास के लिए समर्पित प्रकोष्ठ।
- कर्मचारियों और वेतन नियमों से जुड़े संशोधन।
- निजी विश्वविद्यालय से संबंधित नियमावली।
अब आगे क्या होगा?
कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद संबंधित विभाग इन फैसलों को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे। ऊर्जा परियोजना के मामले में बिजली खरीद समझौते और नियामकीय प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण होंगी।
वहीं नई सहकारिता और EV नीति जैसे फैसलों के लिए आगे विभागीय स्तर पर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी। स्वास्थ्य क्षेत्र में मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन के गठन के बाद खरीद व्यवस्था को नई संस्था के जरिए संचालित करने की दिशा में काम होगा।
इन फैसलों का वास्तविक असर उनके प्रभावी क्रियान्वयन के बाद सामने आएगा।
निष्कर्ष
धामी कैबिनेट के 17 फैसले उत्तराखंड के ऊर्जा, स्वास्थ्य, परिवहन, सहकारिता और प्रशासन से जुड़े कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्रभावित करने वाले हैं। इनमें सबसे बड़ी मंजूरी 1320 मेगावाट कोयला आधारित बिजली की 25 साल की खरीद और अदानी पावर को परियोजना की जिम्मेदारी देने से जुड़ी है।
इसके साथ ही सहकारिता नीति-2026, मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन, EV नीति की तैयारी और अग्निवीर पुनर्वास जैसे फैसले भी अहम हैं। अब इन 17 फैसलों की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार इन्हें जमीन पर कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से लागू करती है।

