वायुसेना की ताकत: खगंतक-243 ग्लाइड बम का सफल परीक्षण, 140 किमी से ज्यादा मारक क्षमता
भारतीय वायुसेना ने रक्षा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वायुसेना ने स्वदेशी लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम खगंतक-243 का सफल ड्रॉप परीक्षण किया है। परीक्षण के दौरान हथियार ने सभी निर्धारित लक्ष्यों को पूरा किया।
इस परीक्षण से भारत की लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता को मजबूती मिलेगी। साथ ही, यह रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भी अहम कदम माना जा रहा है।
खगंतक-243 ग्लाइड बम का सफल परीक्षण
भारतीय वायुसेना ने 2 सितंबर को खगंतक-243 का सफल ड्रॉप ट्रायल किया। यह एक स्वदेशी लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम है।
वायुसेना के अनुसार, परीक्षण के दौरान सभी तय उद्देश्यों को हासिल किया गया। इसके साथ ही भारतीय वायुसेना और देश के रक्षा उद्योग के लिए इसे महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया है।
यह हथियार लड़ाकू विमान से छोड़ा जाता है। इसके बाद यह अपने पंखों और नियंत्रण प्रणाली की मदद से लक्ष्य की ओर ग्लाइड करता है।
140 किलोमीटर से ज्यादा है रेंज
खगंतक-243 की सबसे खास बात इसकी लंबी दूरी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह 140 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक लक्ष्य को निशाना बना सकता है।
इस क्षमता से लड़ाकू विमान को लक्ष्य के बेहद करीब जाने की जरूरत कम होती है। यानी विमान सुरक्षित दूरी से हमला करने में सक्षम हो सकता है।
इसी वजह से इसे स्टैंड-ऑफ हथियार की श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे हथियार आधुनिक हवाई युद्ध में काफी अहम माने जाते हैं।
Su-30MKI से किया गया परीक्षण
खगंतक-243 का शुरुआती परीक्षण Su-30MKI लड़ाकू विमान से किया गया है। यह भारतीय वायुसेना का प्रमुख बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है।
Su-30MKI से इस हथियार का परीक्षण इसकी परिचालन क्षमता को समझने में अहम है। आगे इसे दूसरे लड़ाकू विमानों के साथ भी जोड़ने की संभावना बताई गई है।
इस तरह भारतीय वायुसेना के पास लंबी दूरी के सटीक हमले के लिए एक और विकल्प तैयार हो सकता है।
300 किलो वर्ग का है खगंतक-243
खगंतक-243 करीब 300 किलोग्राम वर्ग का ग्लाइड बम है। इसे लंबी दूरी से सटीक हमला करने के लिए डिजाइन किया गया है।
इस हथियार में एयरोडायनामिक पंख और नियंत्रण सतहें हैं। इनके कारण बम विमान से अलग होने के बाद लंबी दूरी तक ग्लाइड कर सकता है।
रिपोर्टों के अनुसार, इसमें 125 किलोग्राम विस्फोटक क्षमता वाला Mk-81 श्रेणी का वारहेड इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, अलग मिशन के लिए इसकी संरचना में बदलाव की गुंजाइश भी बताई गई है।
कौन बना रहा है यह स्वदेशी हथियार?
खगंतक-243 को भारतीय रक्षा उद्योग ने विकसित किया है। इसके विकास में JSR Dynamics और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड यानी BEL की भूमिका बताई गई है।
JSR Dynamics ने हथियार के बॉडी और कंट्रोल सिस्टम से जुड़े हिस्सों पर काम किया है। वहीं BEL ने इलेक्ट्रॉनिक्स और गाइडेंस सिस्टम उपलब्ध कराए हैं।
इससे भारत की निजी रक्षा कंपनियों और सरकारी रक्षा कंपनियों के बीच सहयोग भी सामने आता है। यह मॉडल ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन को बढ़ावा दे सकता है।
क्या होता है ग्लाइड बम?
ग्लाइड बम सामान्य बम से अलग होता है। पारंपरिक बम को विमान से गिराने के बाद वह मुख्य रूप से गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे जाता है।
वहीं ग्लाइड बम में पंख और नियंत्रण प्रणाली होती है। इसलिए यह हवा में आगे की ओर ग्लाइड कर सकता है और ज्यादा दूरी तय कर सकता है।
इसके अलावा, गाइडेंस सिस्टम लक्ष्य तक पहुंचने में मदद करता है। इसी वजह से ग्लाइड बम को सटीक प्रहार के लिए उपयोगी माना जाता है।
वायुसेना की मारक क्षमता को मिलेगा फायदा
खगंतक-243 का सफल परीक्षण भारतीय वायुसेना के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है। सबसे पहले इससे लंबी दूरी से हमला करने की क्षमता बढ़ सकती है।
दूसरी ओर, स्टैंड-ऑफ हथियार होने के कारण लड़ाकू विमानों को लक्ष्य के करीब जाने का जोखिम कम हो सकता है। इससे कठिन और संवेदनशील अभियानों में विकल्प बढ़ते हैं।
इसके अलावा, स्वदेशी हथियार होने से विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। यह भारत की रक्षा उत्पादन नीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
आत्मनिर्भर भारत को मिला बढ़ावा
भारत लगातार स्वदेशी हथियारों के विकास पर जोर दे रहा है। खगंतक-243 का सफल परीक्षण इसी दिशा में एक और उपलब्धि है।
वायुसेना ने भी इस परीक्षण को आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और रक्षा नवाचार से जोड़ा है। ऐसे परीक्षण देश के रक्षा उद्योग को नई तकनीक विकसित करने का अवसर देते हैं।
साथ ही, घरेलू स्तर पर हथियारों का उत्पादन होने से भविष्य में आपूर्ति व्यवस्था मजबूत हो सकती है। इससे भारतीय सशस्त्र बलों की जरूरतों को देश में ही पूरा करने की क्षमता बढ़ेगी।
आगे क्या होगा?
खगंतक-243 का यह परीक्षण विकास और परीक्षण प्रक्रिया में महत्वपूर्ण चरण है। इसके बाद हथियार की तकनीक, एकीकरण और परिचालन जरूरतों से जुड़े अगले चरणों पर काम आगे बढ़ सकता है।
वहीं, भारतीय वायुसेना को अलग-अलग लड़ाकू विमानों के लिए स्टैंड-ऑफ हथियारों की जरूरत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में खगंतक-243 भविष्य की सटीक प्रहार क्षमता में उपयोगी भूमिका निभा सकता है।
फिलहाल, सफल परीक्षण ने स्वदेशी रक्षा तकनीक को लेकर भारत की क्षमता जरूर मजबूत की है।
निष्कर्ष
खगंतक-243 ग्लाइड बम का सफल परीक्षण भारतीय वायुसेना और देश के रक्षा उद्योग के लिए अहम उपलब्धि है। 140 किलोमीटर से ज्यादा की रिपोर्टेड रेंज इसे लंबी दूरी के सटीक हमले के लिए महत्वपूर्ण हथियार बनाती है।
इसके अलावा, Su-30MKI से परीक्षण और स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता को दिखाता है। आने वाले समय में ऐसे हथियार भारतीय वायुसेना की स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक क्षमता को और मजबूत कर सकते हैं।

