CGPSC घोटाले और DMF फंड पर ED की ताबड़तोड़ छापेमारी
छत्तीसगढ़ में CGPSC घोटाला और जिला खनिज फाउंडेशन यानी DMF फंड से जुड़े मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई तेज हो गई है। एजेंसी ने 1 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया और दोनों मामलों में एक-एक आरोपी को गिरफ्तार किया।
ED के मुताबिक, CGPSC मामले में कथित प्रश्नपत्र लीक और भर्ती में अनियमितताओं की जांच हो रही है। वहीं DMF मामले में फंड के कथित दुरुपयोग और कमीशन के लेनदेन की पड़ताल की जा रही है।
CGPSC घोटाला मामले में ED की बड़ी कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग यानी CGPSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कार्रवाई की है। एजेंसी ने 1 सितंबर को रायपुर, दुर्ग, धमतरी और जशपुर जिलों में पांच ठिकानों पर तलाशी ली।
इस कार्रवाई के दौरान उत्कर्ष चंद्राकर को गिरफ्तार किया गया। ED के अनुसार, यह गिरफ्तारी PMLA के तहत की गई है। एजेंसी का दावा है कि जांच में कथित अपराध से अर्जित रकम से जुड़ी गतिविधियों में उसकी भूमिका सामने आई है।
तलाशी के दौरान ED ने कई दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, वित्तीय रिकॉर्ड, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जब्त किए। एजेंसी का कहना है कि इन सामग्री का इस्तेमाल मामले में आगे की जांच के लिए किया जाएगा।
2020 और 2021 की परीक्षाएं जांच के दायरे में
CGPSC मामले की जांच में वर्ष 2020 और 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। ED का आरोप है कि प्रश्नपत्र कुछ रिश्तेदारों और चयनित अभ्यर्थियों तक कथित तौर पर अवैध तरीके से पहुंचाए गए।
जांच एजेंसी के मुताबिक, इस कथित नेटवर्क में निजी बिचौलियों के जरिए पैसों का लेनदेन हुआ। एजेंसी इस रकम के स्रोत और उसके इस्तेमाल की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है।
ED की जांच मूल रूप से छत्तीसगढ़ में दर्ज संबंधित FIR और भ्रष्टाचार तथा परीक्षा अनियमितताओं से जुड़े मामलों के आधार पर आगे बढ़ रही है। जांच अभी जारी है, इसलिए आरोपों से जुड़े अंतिम निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
करीब 3 करोड़ रुपये के लेनदेन का दावा
CGPSC मामले में ED ने करीब 3 करोड़ रुपये के कथित अवैध लेनदेन की कड़ी सामने आने का दावा किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से रकम वसूले जाने की बात सामने आई है।
ED इस कथित रकम के पूरे मनी ट्रेल की जांच कर रही है। इसमें यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि पैसा किन लोगों तक पहुंचा और कथित नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे।
वरिष्ठ पदों पर चयन से जुड़े आरोप
जांच एजेंसी का दावा है कि कथित प्रश्नपत्र लीक से कुछ चयनित उम्मीदवारों को फायदा पहुंचा। इनमें डिप्टी कलेक्टर और डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस जैसे पदों पर नियुक्ति का आरोप भी जांच का हिस्सा है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ED के आरोप जांच का हिस्सा हैं। आरोपितों के खिलाफ दोष सिद्ध होना न्यायिक प्रक्रिया के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा।
DMF फंड मामले में भी ED का शिकंजा
CGPSC घोटाले के साथ-साथ ED ने छत्तीसगढ़ के DMF फंड से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में भी बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने सतपाल सिंह छाबड़ा को 1 सितंबर को PMLA के तहत गिरफ्तार किया।
उन्हें रायपुर की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया। अदालत ने ED को पांच दिन की हिरासत में पूछताछ की अनुमति दी है।
DMF यानी District Mineral Foundation का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों और वहां रहने वाले लोगों के विकास से जुड़े कार्यों को वित्तीय सहायता देना है। ED का आरोप है कि इस फंड की राशि के इस्तेमाल में कथित तौर पर अनियमितताएं हुईं।
DMF मामले में 31 करोड़ रुपये के कथित कमीशन की जांच
ED के अनुसार, बैंक खातों और जांच के दौरान दर्ज बयानों के विश्लेषण में सतपाल सिंह छाबड़ा से जुड़े करीब 31 करोड़ रुपये के कथित कमीशन का पता चला है।
एजेंसी का दावा है कि यह रकम केवल एक खाते तक सीमित नहीं थी। कथित तौर पर धनराशि आरोपी, उसके परिवार के सदस्यों, HUF और उससे जुड़ी संस्थाओं के बैंक खातों में पहुंची।
अब ED इस रकम की पूरी मनी ट्रेल की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित कमीशन कहां से आया और इसका इस्तेमाल किन उद्देश्यों के लिए किया गया।
सप्लाई आधारित कार्यों पर ED की नजर
जांच एजेंसी के मुताबिक, DMF फंड के तहत कुछ राशि ऐसे आपूर्ति आधारित कार्यों में खर्च की गई, जिनमें कथित तौर पर कीमत बढ़ाने और कमीशन हासिल करने की गुंजाइश थी।
ED का आरोप है कि कुछ एजेंटों और संपर्क सूत्रों के माध्यम से चयनित आपूर्तिकर्ताओं तक काम पहुंचाया गया। एजेंसी इन लेनदेन और कथित कमीशन नेटवर्क की भूमिका की जांच कर रही है।
सात स्थानों पर भी हुई कार्रवाई
CGPSC और DMF मामलों की जांच के बीच ED की कार्रवाई का दायरा बढ़ता दिखाई दिया है। 1 सितंबर को अलग-अलग रिपोर्टों में छत्तीसगढ़ में सात स्थानों पर कार्रवाई की जानकारी सामने आई थी।
बाद में ED ने CGPSC मामले में पांच स्थानों पर तलाशी और उत्कर्ष चंद्राकर की गिरफ्तारी की पुष्टि की। तलाशी रायपुर, दुर्ग और जशपुर से जुड़े परिसरों में की गई थी।
तलाशी के दौरान डिजिटल उपकरणों और वित्तीय दस्तावेजों की बरामदगी जांच के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ED इन दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड से कथित वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ रही है।
दोनों मामलों में दो गिरफ्तारियां
ED की हालिया कार्रवाई में दोनों मामलों से जुड़ी अलग-अलग गिरफ्तारियां हुई हैं।
- CGPSC मामले में उत्कर्ष चंद्राकर गिरफ्तार।
- DMF मामले में सतपाल सिंह छाबड़ा गिरफ्तार।
- दोनों मामलों में PMLA के तहत कार्रवाई।
- DMF मामले में छाबड़ा को पांच दिन की ED हिरासत मिली।
- CGPSC मामले में तलाशी के दौरान वित्तीय और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए।
इन गिरफ्तारियों के बाद ED की जांच में आगे और लोगों की भूमिका सामने आने की संभावना है। हालांकि, किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निकाला जा सकता है।
आगे क्या करेगी ED?
अब जांच एजेंसी दोनों मामलों में वित्तीय लेनदेन और संबंधित लोगों के बीच कड़ियों की पड़ताल कर रही है। CGPSC मामले में प्रश्नपत्र लीक से जुड़े कथित पैसों के लेनदेन और आरोपितों के संपर्कों की जांच महत्वपूर्ण होगी।
वहीं DMF मामले में कथित कमीशन की रकम, बैंक खातों में हुए लेनदेन और संबंधित संस्थाओं की भूमिका पर ध्यान दिया जा रहा है। ED यह भी जांच रही है कि कथित अपराध से अर्जित रकम को कहीं संपत्ति या अन्य परिसंपत्तियों में तो नहीं लगाया गया।
जांच आगे बढ़ने के साथ एजेंसी की ओर से और दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड या अन्य साक्ष्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल दोनों मामले जांच के चरण में हैं।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में CGPSC घोटाला और DMF फंड मामले में ED की कार्रवाई ने जांच को नया मोड़ दिया है। CGPSC मामले में कथित प्रश्नपत्र लीक और भर्ती अनियमितताओं से जुड़े मनी ट्रेल की जांच हो रही है, जबकि DMF मामले में फंड के कथित दुरुपयोग और करीब 31 करोड़ रुपये के कथित कमीशन की जांच एजेंसी कर रही है।
उत्कर्ष चंद्राकर और सतपाल सिंह छाबड़ा की गिरफ्तारी के बाद दोनों मामलों में पूछताछ और वित्तीय कड़ियों की जांच आगे बढ़ेगी। हालांकि, इन मामलों से जुड़े सभी आरोप अभी जांच के दायरे में हैं और अंतिम दोष सिद्धि अदालत के फैसले से ही तय होगी।

