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ईरान के हाथ लगा US का दूसरा अंडरवॉटर जासूस? IRGC ने जारी किया VIDEO

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) द्वारा पकड़ा गया कथित अमेरिकी अंडरवॉटर जासूसी ड्रोन - News Critic

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच बड़ा दावा सामने आया है। ईरान के IRGC ने दूसरे अमेरिकी अंडरवॉटर ड्रोन को पकड़ने की बात कही है।

IRGC ने इस कथित ड्रोन का वीडियो भी जारी किया है। हालांकि, अमेरिकी सेना ने ईरान के दावे को खारिज कर दिया है। 

ईरान ने अमेरिकी ड्रोन पकड़ने का किया दावा

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स यानी IRGC ने रविवार को बड़ा दावा किया। IRGC के अनुसार, उसकी नौसेना ने एक अमेरिकी अंडरवॉटर ड्रोन पकड़ा है।

यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में होने की बात कही गई है। ईरान ने दावा किया कि ड्रोन जासूसी मिशन पर था।

IRGC के मुताबिक, इस कार्रवाई में खुफिया जानकारी का इस्तेमाल हुआ। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तकनीक भी इस्तेमाल की गई। 

IRGC ने VIDEO क्यों जारी किया?

ईरान ने अपने दावे के साथ वीडियो भी जारी किया है। वीडियो में एक अंडरवॉटर वाहन दिखाई देता है।

IRGC का कहना है कि यही अमेरिकी वाहन उसके कब्जे में आया है। ईरानी पक्ष ने इसे एक स्वायत्त अंडरवॉटर व्हीकल बताया है।

ईरानी मीडिया के अनुसार, वाहन को विशेषज्ञों के हवाले किया गया है। विशेषज्ञ इसमें मौजूद डेटा की जांच कर रहे हैं। 

हालांकि, वीडियो से पूरे दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती। वाहन की पहचान को लेकर भी अलग-अलग जानकारी सामने आई है।

पहले Remus 600 बताया गया

IRGC ने शुरुआत में इस वाहन की पहचान Remus 600 के रूप में की। इसे एक आधुनिक स्वायत्त अंडरवॉटर वाहन बताया गया।

ईरानी पक्ष के अनुसार, यह वाहन समुद्र के अंदर खुद काम कर सकता है। इसमें सोनार और नेविगेशन जैसी तकनीक मौजूद होती है।

बाद में IRGC की ओर से वाहन का नाम Mk 18 Mod 2 Kingfish भी बताया गया। यह बदलाव इस मामले को और चर्चा में ले आया। 

इसलिए फिलहाल वाहन की सटीक पहचान पर सवाल बना हुआ है। ईरान के अलग-अलग बयानों में दोनों नाम सामने आए हैं।

अमेरिका ने ईरान के दावे को किया खारिज

ईरान के दावे के बाद अमेरिका की प्रतिक्रिया भी सामने आई। अमेरिकी सेना ने ड्रोन पकड़े जाने की बात को स्वीकार नहीं किया।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने बयान दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने सभी ऑपरेशनल ड्रोन पर नियंत्रण रखता है।

इस बयान से साफ है कि दोनों देशों के दावे अलग हैं। ईरान कब्जे की बात कर रहा है। वहीं, अमेरिका इसे खारिज कर रहा है। 

क्या सच में जासूसी कर रहा था ड्रोन?

IRGC ने ड्रोन को जासूसी मिशन से जोड़ा है। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि यह होर्मुज में निगरानी कर रहा था।

अमेरिका ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है। इसलिए ड्रोन के वास्तविक मिशन को लेकर स्थिति साफ नहीं है।

अंडरवॉटर ड्रोन का इस्तेमाल कई कामों में होता है। इनमें समुद्री निगरानी और समुद्र तल की मैपिंग शामिल है।

इनका इस्तेमाल खुफिया जानकारी जुटाने में भी किया जा सकता है। इसलिए ऐसे ड्रोन सैन्य अभियानों में काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

होर्मुज स्ट्रेट में क्यों बढ़ा तनाव?

होर्मुज जलडमरूमध्य बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है।

इस रास्ते से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की आवाजाही होती है। इसलिए यहां किसी भी सैन्य तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पड़ सकता है।

अमेरिका और ईरान के बीच पहले से तनाव बना हुआ है। ऐसे में अंडरवॉटर ड्रोन को लेकर नया विवाद अहम माना जा रहा है। 

ईरान ने दूसरी बार ड्रोन पकड़ने का दावा किया

यह पहली बार नहीं है जब ईरान ने अमेरिकी अंडरवॉटर ड्रोन पकड़ने की बात कही है। इससे पहले भी इसी महीने ऐसा दावा सामने आया था।

8 सितंबर को ईरान ने एक अमेरिकी Dive-LD वाहन पकड़ने की बात कही थी। ईरान ने उस वाहन को भी होर्मुज क्षेत्र से जोड़ा था।

उस समय अमेरिकी पक्ष ने अलग जानकारी दी थी। पेंटागन ने कहा था कि वह ड्रोन पहले ही खराब हो चुका था।

अमेरिका के अनुसार, वह वाहन क्षेत्रीय पानी की निगरानी कर रहा था। पेंटागन ने यह भी कहा था कि उसमें संवेदनशील डेटा नहीं था। 

पहले वाले ड्रोन की पहचान क्या थी?

पहले मामले में ईरान ने वाहन को Dive-LD बताया था। यह एक बड़ा स्वायत्त अंडरवॉटर वाहन है।

इस सिस्टम को अमेरिकी कंपनी Anduril ने बनाया है। यह समुद्र के अंदर कई तरह के मिशन कर सकता है।

इसमें समुद्र तल की मैपिंग की क्षमता भी है। इसके अलावा यह समुद्री निगरानी जैसे काम कर सकता है।

अमेरिका ने हालांकि उस घटना को ईरान की बताई कहानी से अलग बताया था। इसलिए दोनों मामलों में दावों का अंतर महत्वपूर्ण है। 

दूसरे ड्रोन को लेकर क्या कह रहा है ईरान?

IRGC का कहना है कि दूसरे वाहन को एक जटिल अभियान में पकड़ा गया। इसमें खुफिया निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर का इस्तेमाल हुआ।

ईरान ने यह भी कहा कि उसके विशेषज्ञ वाहन की जांच कर रहे हैं। इसका उद्देश्य उसमें मौजूद जानकारी को हासिल करना बताया गया है।

IRGC ने होर्मुज में अनधिकृत गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने की बात कही है। इससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। 

अमेरिका के जवाब से मामला उलझा

अमेरिका का कहना है कि उसके सभी ऑपरेशनल ड्रोन उसके नियंत्रण में हैं। इसलिए ईरान के कब्जे वाले दावे पर अमेरिकी पक्ष ने सवाल उठाया है।

यह बयान ईरान के दावे से बिल्कुल अलग है। एक तरफ ईरान वाहन को अपने कब्जे में बता रहा है।

दूसरी तरफ अमेरिका किसी ऑपरेशनल ड्रोन के खोने से इनकार कर रहा है। ऐसे में घटना की स्वतंत्र पुष्टि बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। 

VIDEO में क्या दिखाई दे रहा है?

IRGC द्वारा जारी वीडियो में एक अंडरवॉटर वाहन दिखाई देता है। ईरान इसे अमेरिकी सैन्य सिस्टम बता रहा है।

वीडियो को ईरान ने अपने दावे के समर्थन में जारी किया है। हालांकि, वीडियो से वाहन के पूरे मिशन की पुष्टि नहीं होती।

इससे यह भी तय नहीं होता कि वाहन कब और कैसे पकड़ा गया। इसलिए वीडियो को ईरान के दावे के संदर्भ में देखना जरूरी है।

क्या इस घटना से तनाव बढ़ सकता है?

होर्मुज जलडमरूमध्य पहले से संवेदनशील क्षेत्र है। यहां अमेरिका और ईरान की सैन्य गतिविधियों पर दुनिया की नजर रहती है।

ऐसे में किसी अमेरिकी ड्रोन को पकड़ने का दावा महत्वपूर्ण है। खासकर तब, जब अमेरिका इस दावे को खारिज कर रहा है।

फिलहाल दोनों पक्षों की जानकारी अलग है। आगे मिलने वाली आधिकारिक जानकारी से स्थिति ज्यादा साफ हो सकती है।

अब आगे क्या होगा?

अब सबसे ज्यादा ध्यान अमेरिका और ईरान के अगले बयानों पर रहेगा। इससे इस घटना के बारे में और जानकारी मिल सकती है।

ईरान अपने विशेषज्ञों के जरिए वाहन की जांच की बात कह रहा है। वहीं, अमेरिका ने किसी ऑपरेशनल ड्रोन के कब्जे में जाने से इनकार किया है। 

इसलिए अभी किसी एक दावे को अंतिम सच मानना जल्दबाजी होगी। स्वतंत्र पुष्टि होने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ होगी।

निष्कर्ष

ईरान के IRGC ने दूसरे अमेरिकी अंडरवॉटर ड्रोन को पकड़ने का दावा किया है। ईरान ने इसके साथ एक वीडियो भी जारी किया है।

शुरुआत में वाहन को Remus 600 बताया गया। बाद में इसे Mk 18 Mod 2 Kingfish कहा गया।

वहीं, अमेरिकी सेना ने ईरान के दावे को खारिज किया है। अमेरिका का कहना है कि उसके सभी ऑपरेशनल ड्रोन उसके नियंत्रण में हैं।

इसलिए फिलहाल यह मामला दोनों देशों के अलग-अलग दावों के बीच है। ड्रोन की पहचान और उसके पकड़े जाने की स्वतंत्र पुष्टि का इंतजार है।

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