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9-9 फीट पीछे शिफ्ट किए गए कई मंदिर, 12 धर्मस्थल हटे; उज्जैन शाही मस्जिद पर कार्रवाई जारी

उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के तहत मंदिर और मस्जिद पर प्रशासनिक कार्रवाई - न्यूज़ क्रिटिक

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच सड़क चौड़ीकरण का काम तेज हो गया है। इसी अभियान में कई धार्मिक स्थलों को हटाया या पीछे किया जा रहा है। उज्जैन शाही मस्जिद का सड़क की सीमा में आने वाला हिस्सा भी हटाया जा रहा है।

प्रशासन के अनुसार, कार्रवाई सड़क को चौड़ा करने और यातायात व्यवस्था बेहतर करने की योजना का हिस्सा है। वहीं, शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने के दौरान सोमवार को तनाव और पथराव की घटना भी हुई थी।

उज्जैन में क्यों चल रहा है सड़क चौड़ीकरण अभियान?

उज्जैन में वर्ष 2028 में सिंहस्थ का आयोजन होना है। इसे देखते हुए शहर में सड़क और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने की तैयारी चल रही है।

मौजूदा योजना में कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक करीब डेढ़ किलोमीटर क्षेत्र में सड़क को 15 मीटर चौड़ा किया जा रहा है। इस परियोजना के दायरे में कई मकान और धार्मिक स्थल भी आ रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, इस सड़क चौड़ीकरण अभियान के तहत कुल 323 मकान प्रभावित हो रहे हैं। इसके साथ ही सड़क की सीमा में आने वाले धार्मिक निर्माणों पर भी कार्रवाई की जा रही है।

प्रशासन की योजना में धार्मिक स्थल भी शामिल

सड़क चौड़ीकरण के दौरान प्रशासन का कहना है कि रास्ते में आने वाले निर्माणों को हटाना जरूरी है। इसी प्रक्रिया में कई धार्मिक स्थलों को भी प्रभावित हिस्से तक सीमित कार्रवाई का सामना करना पड़ा है।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से बताया गया था कि शहर में सड़क चौड़ीकरण के लिए करीब 80 धार्मिक संरचनाओं को हटाने या स्थानांतरित करने की कार्रवाई हुई है। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, संबंधित सड़क पर पहले ही 10 मंदिर और एक मस्जिद के हिस्से हटाए जा चुके थे।

उज्जैन शाही मस्जिद पर क्या हो रही है कार्रवाई?

उज्जैन शाही मस्जिद का कुछ हिस्सा प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण की सीमा में आ रहा है। प्रशासन की कार्रवाई इसी प्रभावित हिस्से तक सीमित बताई गई है।

9 सितंबर 2026 के मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश में दर्ज है कि नगर निगम ने सड़क चौड़ीकरण के लिए मस्जिद के प्रार्थना कक्ष, मीनार और सामने के हिस्से से जुड़े निर्माण के प्रभावित भाग को हटाने की प्रक्रिया शुरू की थी। अदालत के सामने निगम ने कहा था कि सड़क के विस्तार में बाधा बनने वाले धार्मिक निर्माणों पर समान प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

हाई कोर्ट ने संबंधित याचिकाओं को खारिज करते हुए कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार किया था। अदालत के रिकॉर्ड में सड़क चौड़ीकरण को मास्टर प्लान से जुड़ी प्रक्रिया के रूप में दर्ज किया गया है।

मस्जिद कमेटी की सहमति का प्रशासन का दावा

29 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, उज्जैन के एसपी प्रदीप शर्मा ने कहा कि प्रभावित हिस्से को हटाने की कार्रवाई मस्जिद कमेटी की सहमति से जारी है। पुलिस के अनुसार, मुस्लिम पक्ष के कुछ लोग भी मौके पर प्रशासन के साथ मिलकर प्रभावित हिस्से को हटाने में सहयोग कर रहे हैं।

वहीं, पूरे मामले में अलग-अलग पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। मस्जिद से जुड़े पक्ष ने पहले धार्मिक स्थल और उसकी ऐतिहासिक स्थिति का हवाला देते हुए आपत्ति जताई थी। इस वजह से मामला अदालत तक भी पहुंचा।

कई मंदिरों को तोड़ा नहीं गया, 9 फीट पीछे किया गया

सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई में कुछ मंदिरों को हटाने के बजाय पीछे स्थानांतरित किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, संकटमोचन हनुमान मंदिर, शिव मंदिर और गणेश मंदिर को करीब 9-9 फीट पीछे किया गया।

इन मंदिरों से जुड़े पुजारियों ने प्रशासन के अनुरोध पर सहयोग करने की बात कही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इन मंदिरों को नुकसान पहुंचाए बिना पीछे करने की प्रक्रिया अपनाई गई।

यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि धार्मिक संरचनाओं को लेकर स्थानीय स्तर पर भावनाएं जुड़ी रहती हैं। ऐसे में जहां संभव हो, संरचना को पूरी तरह हटाने के बजाय उसे सुरक्षित तरीके से पीछे करना एक अलग प्रक्रिया के रूप में सामने आया है।

14 धर्मस्थलों में से 12 हटाए गए

उज्जैन के संबंधित सड़क मार्ग पर कुल 14 धर्मस्थल कार्रवाई के दायरे में बताए गए हैं। इनमें से 12 धर्मस्थलों को अब तक हटाया जा चुका है।

आजतक की 29 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, इन कार्रवाइयों में प्रशासन के साथ स्थानीय लोगों का सहयोग भी रहा है। वहीं, सड़क के कुछ हिस्सों पर अभी भी काम जारी है।

अदालत में पेश किए गए रिकॉर्ड में भी सड़क चौड़ीकरण के दौरान कई धार्मिक संरचनाओं पर कार्रवाई का उल्लेख है। इसलिए मौजूदा कार्रवाई को केवल एक धार्मिक स्थल तक सीमित प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जा रहा है।

शाही मस्जिद के पास बढ़ाई गई सुरक्षा

शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने के दौरान क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है। पुलिस बल के साथ घुड़सवार दस्ते की तैनाती की गई और अधिकारियों ने इलाके का निरीक्षण किया।

28 सितंबर को मस्जिद के हिस्से को हटाने की कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों और पुलिस के बीच तनाव हुआ। पथराव के बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया।

पुलिस ने बाद में कई लोगों को हिरासत में लिया। भारतीय एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने 15 लोगों को हिरासत में लेने और सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की जानकारी दी।

अफवाहों से बचने की अपील

घटना के बाद प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की। शहर में शांति बनाए रखने के लिए पुलिस की निगरानी बढ़ाई गई है।

पुलिस ने सोशल मीडिया पर भ्रामक या तनाव बढ़ाने वाली सामग्री को लेकर भी कार्रवाई की बात कही है। अधिकारियों का कहना है कि संवेदनशील क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है।

सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन में विकास कार्य तेज

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के लिए बड़े स्तर पर तैयारियां चल रही हैं। सड़क चौड़ीकरण इसी तैयारी का हिस्सा है। शहर में श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए मार्गों और यातायात व्यवस्था को बेहतर करने पर जोर दिया जा रहा है।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश में भी सड़क चौड़ीकरण के पीछे सार्वजनिक सुरक्षा और बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही को ध्यान में रखने की बात दर्ज है।

हालांकि, ऐसे विकास कार्यों में स्थानीय लोगों और धार्मिक संस्थाओं की सहमति तथा प्रभावित संपत्तियों की प्रक्रिया महत्वपूर्ण रहती है। उज्जैन में प्रशासन की ओर से बातचीत और सहयोग के जरिए कई स्थानों पर कार्रवाई आगे बढ़ाने की बात कही गई है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण का काम जारी है। शाही मस्जिद के सड़क की सीमा में आने वाले हिस्से को हटाने की प्रक्रिया भी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आगे बढ़ रही है।

प्रशासन के सामने अब दो अहम जिम्मेदारियां हैं। पहली, विकास परियोजना को तय योजना के अनुसार आगे बढ़ाना और दूसरी, संवेदनशील इलाकों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना।

वहीं, स्थानीय लोगों और धार्मिक संस्थाओं के सहयोग से कार्रवाई को शांतिपूर्ण तरीके से पूरा करना भी महत्वपूर्ण रहेगा। अदालत में इस मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर पहले ही सुनवाई हो चुकी है।

निष्कर्ष

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 से पहले सड़क चौड़ीकरण अभियान के तहत कई धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई हुई है। कई मंदिरों को तोड़ने के बजाय करीब 9 फीट पीछे किया गया, जबकि संबंधित मार्ग पर 14 में से 12 धर्मस्थल हटाए जा चुके हैं।

उज्जैन शाही मस्जिद का सड़क की सीमा में आने वाला हिस्सा भी इसी परियोजना के तहत हटाया जा रहा है। इस कार्रवाई को लेकर अदालत में याचिकाएं दाखिल हुईं और हाई कोर्ट ने फिलहाल रोक लगाने से इनकार किया है।

अब प्रशासन का फोकस सड़क चौड़ीकरण के साथ शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर है। आने वाले दिनों में इस कार्रवाई की प्रगति और स्थानीय स्तर पर इसका असर महत्वपूर्ण रहेगा।

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