नैनीताल में 12 हजार सैलानियों की भीड़, कैंची धाम तक कई KM लंबा जाम
उत्तराखंड के नैनीताल में गांधी जयंती और लंबे वीकेंड के चलते पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ी। नैनीताल में 12 हजार सैलानी पहुंचने से शहर की कई सड़कें वाहनों से भर गईं।
नैनीताल से भवाली और कैंची धाम तक यातायात प्रभावित रहा। कई जगह वाहन घंटों तक धीमी रफ्तार से चलते रहे। वहीं, कैंची धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को भी लंबा इंतजार करना पड़ा।
नैनीताल में 12 हजार सैलानी पहुंचे
गांधी जयंती के लंबे वीकेंड पर नैनीताल में पर्यटकों की संख्या अचानक बढ़ गई। स्थानीय कारोबारियों के अनुसार, निजी और सार्वजनिक वाहनों से करीब 12 हजार पर्यटक शहर पहुंचे।
इससे नैनीताल के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भी भीड़ बढ़ गई। नैनी झील, मालरोड, स्नो व्यू और चिड़ियाघर में बड़ी संख्या में लोग नजर आए।
वहीं, शहर के होटल और गेस्ट हाउस भी पर्यटकों से भरे रहे। कई यात्रियों को कमरा तलाशने में परेशानी हुई। पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों के लिए यह व्यस्त वीकेंड रहा।
सुबह से ही बढ़ने लगा वाहनों का दबाव
रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब सात बजे से ही सड़कों पर वाहनों की रफ्तार कम होने लगी थी। इसके बाद कई मार्गों पर लंबी कतारें बन गईं।
मालरोड के अलावा हल्द्वानी रोड और भवाली रोड पर भी यातायात प्रभावित रहा। कुछ स्थानों पर यात्रियों को कई किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा।
पार्किंग स्थलों के भर जाने से समस्या और बढ़ गई। बिना पार्किंग वाले वाहनों की संख्या बढ़ने पर सड़कों पर दबाव लगातार बना रहा।
कैंची धाम तक लगा लंबा जाम
नैनीताल के साथ कैंची धाम में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पहुंची। शुक्रवार को करीब 36 हजार श्रद्धालुओं के कैंची धाम पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई।
इस भीड़ का असर भवाली-कैंची धाम मार्ग पर साफ दिखाई दिया। कैंची धाम से निगलाट तक करीब दो किलोमीटर लंबा जाम लगा रहा।
कई यात्री तीन घंटे से अधिक समय तक जाम में फंसे रहे। कुछ श्रद्धालु और पर्यटक भवाली से कैंची धाम तक पैदल भी पहुंचे।
श्रद्धालुओं को घंटों करना पड़ा इंतजार
कैंची धाम में बाबा नीब करौरी महाराज के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ सड़क पर दबाव भी बढ़ता गया।
अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, रानीखेत और बागेश्वर की ओर जाने वाले यात्रियों को भी परेशानी हुई। हल्द्वानी आने-जाने वाले लोगों को भी जाम का सामना करना पड़ा।
इसके अलावा, भवाली और आसपास के बाजारों पर भी इसका असर पड़ा। कुछ कारोबारियों ने बताया कि जाम के कारण सामान्य आवाजाही प्रभावित हुई।
पुलिस ने संभाली यातायात व्यवस्था
जाम की स्थिति को देखते हुए पुलिस और यातायात कर्मियों को अलग-अलग स्थानों पर तैनात किया गया। पुलिस ने वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने की कोशिश की।
इसके अलावा, भीमताल और भवाली से कैंची धाम के लिए शटल सेवा भी चलाई गई। इसका उद्देश्य निजी वाहनों की संख्या कम करना था।
हालांकि, भारी भीड़ के कारण शटल वाहन भी कई जगह जाम में फंस गए। ऐसे में यातायात सामान्य करने में पुलिस को लगातार मशक्कत करनी पड़ी।
पहले से बनाया गया था ट्रैफिक प्लान
लंबे वीकेंड को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने विशेष ट्रैफिक प्लान तैयार किया था। यह व्यवस्था 2 से 4 अक्टूबर तक लागू की गई।
योजना के तहत भीमताल विकास भवन पार्किंग में कुछ वाहनों को रोकने की व्यवस्था की गई। इसके बाद यात्रियों को शटल या सार्वजनिक परिवहन से आगे भेजने की योजना थी।
इसी तरह, नैनीताल और गेठिया की ओर से आने वाले वाहनों के लिए भवाली क्षेत्र में पार्किंग की व्यवस्था की गई। जरूरत के अनुसार कुछ वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजने का भी प्रावधान था।
भारी वाहनों के लिए भी डायवर्जन
कैंची धाम और भवाली में दबाव कम करने के लिए भारी वाहनों के रूट में भी बदलाव किया गया। अल्मोड़ा और रानीखेत की ओर से आने वाले वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से भेजने की योजना बनाई गई।
वहीं, आवश्यक सेवाओं वाले वाहनों के लिए अलग व्यवस्था रखी गई। एंबुलेंस, दमकल और पुलिस वाहनों के लिए रास्ता खुला रखने की योजना थी।
इसके बावजूद पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या ज्यादा होने से कई जगह यातायात व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया।
होटल और पर्यटन कारोबार पर क्या असर?
पर्यटकों की भारी आमद का सीधा असर स्थानीय पर्यटन कारोबार पर भी दिखाई दिया। होटल, होमस्टे, रेस्टोरेंट, टैक्सी और अन्य सेवाओं में व्यस्तता बढ़ी।
कई होटल और गेस्ट हाउस में कमरे भर गए। कुछ पर्यटकों को आसपास के इलाकों में ठहरने की तलाश करनी पड़ी।
पंगोट, खुरपाताल, मंगोली, गेठिया, भीमताल और नौकुचियाताल जैसे आसपास के इलाकों में भी पर्यटकों की संख्या बढ़ी। इससे नैनीताल के आसपास के पर्यटन कारोबार को भी फायदा मिला।
दूसरी ओर स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ी
पर्यटकों की भीड़ से कारोबार बढ़ा, लेकिन स्थानीय लोगों की मुश्किलें भी बढ़ीं। सड़क पर वाहनों की संख्या बढ़ने से रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित हुई।
रोडवेज बसें भी जाम में फंसी रहीं। कुछ यात्रियों को बस से उतरकर कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ा।
पार्किंग की कमी ने समस्या को और गंभीर बनाया। ऐसे में लंबे वीकेंड पर पहाड़ी शहरों में यातायात प्रबंधन की चुनौती फिर सामने आई।
जाम से निपटने के लिए क्या चुनौती है?
नैनीताल और कैंची धाम जैसे इलाकों में सड़कें सीमित हैं। दूसरी ओर, छुट्टियों में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ जाती है।
ऐसे में बड़ी संख्या में निजी वाहनों का एक साथ पहुंचना यातायात पर दबाव डालता है। पार्किंग की सीमित क्षमता भी समस्या बढ़ाती है।
इस बीच, स्थानीय लोगों और कारोबारियों ने यातायात व्यवस्था को और बेहतर बनाने की जरूरत बताई है। कैंची धाम क्षेत्र में वैकल्पिक मार्गों और पार्किंग व्यवस्था को मजबूत करने की मांग भी सामने आई है।
शटल सेवा को बढ़ाने पर जोर
शटल सेवा निजी वाहनों की संख्या कम करने में मदद कर सकती है। इसलिए भीड़ वाले दिनों में इसकी क्षमता बढ़ाना उपयोगी हो सकता है।
साथ ही, वाहनों को मुख्य पर्यटन क्षेत्र से पहले रोकने की व्यवस्था भी दबाव कम कर सकती है। इससे पर्यटकों को सार्वजनिक परिवहन से आगे भेजना आसान होगा।
हालांकि, ऐसी व्यवस्था तभी प्रभावी होगी जब पार्किंग, शटल और रूट डायवर्जन तीनों के बीच बेहतर तालमेल हो।
अगले दिनों में भी रह सकती है भीड़
लंबे वीकेंड के कारण नैनीताल और आसपास के पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की आवाजाही जारी रहने की संभावना है। होटल और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार, रविवार तक भी भीड़ बनी रह सकती है।
ऐसे में नैनीताल, भवाली और कैंची धाम जाने वाले यात्रियों को अतिरिक्त समय लेकर चलने की जरूरत होगी। खासकर निजी वाहन से यात्रा करने वालों को पार्किंग और डायवर्जन व्यवस्था की जानकारी पहले देखनी चाहिए।
वहीं, प्रशासन की ओर से भी भीड़ के अनुसार यातायात व्यवस्था में बदलाव किया जा सकता है। यात्रियों को पुलिस के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जा रही है।
निष्कर्ष
नैनीताल में 12 हजार सैलानी पहुंचने से लंबे वीकेंड पर पर्यटन कारोबार को रफ्तार मिली। हालांकि, भारी भीड़ ने शहर की यातायात व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती भी खड़ी कर दी।
कैंची धाम में भी हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी से भवाली और आसपास के मार्ग प्रभावित हुए। कई यात्रियों को घंटों जाम में रहना पड़ा।
ऐसे में आगे भीड़ वाले दिनों में पार्किंग, शटल सेवा और रूट डायवर्जन का बेहतर इस्तेमाल जरूरी होगा। इससे पर्यटकों को राहत मिलेगी और स्थानीय लोगों की परेशानी भी कम हो सकती है।

