दिल्ली के सीमापुरी में ढही 5 मंजिला इमारत, 4 लोगों की मौत; मलबे से 11 का रेस्क्यू, बचाव कार्य जारी
दिल्ली के सीमापुरी इलाके में दिल्ली सीमापुरी इमारत हादसा सामने आया है। बुधवार को एक बहुमंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका थी। राहत टीमों ने अब तक 11 लोगों को बाहर निकाला है। वहीं, गुरुवार सुबह तक मृतकों की संख्या चार हो गई। बचाव दल अभी भी मलबे में किसी और व्यक्ति की तलाश कर रहे हैं।
दिल्ली सीमापुरी इमारत हादसा कैसे हुआ?
यह हादसा पूर्वी दिल्ली के न्यू सीमापुरी इलाके में हुआ। इमारत इदगाह मछली मंडी के पास स्थित थी। बुधवार दोपहर करीब 3:30 से 3:40 बजे दमकल विभाग को इसकी सूचना मिली।
सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। इसके बाद दिल्ली पुलिस, एमसीडी, एनडीआरएफ और अन्य बचाव एजेंसियों ने मोर्चा संभाला।
रिपोर्ट के अनुसार, ढही इमारत करीब 25 वर्ग गज के प्लॉट पर बनी थी। अधिकारियों ने इसे चार मंजिला बताया है, जबकि शुरुआती स्थानीय रिपोर्टों में पांच मंजिल की जानकारी सामने आई थी।
इमारत गिरने के बाद आसपास के कुछ मकान भी प्रभावित हुए। ऐसे में बचाव टीमों को बेहद सावधानी के साथ मलबा हटाना पड़ा।
मलबे से 11 लोगों को सुरक्षित निकाला गया
हादसे के बाद मलबे में करीब 15 लोगों के दबे होने की आशंका जताई गई थी। बचाव टीमों ने लगातार अभियान चलाकर 11 लोगों को बाहर निकाला।
रेस्क्यू किए गए लोगों में बच्चे और कई वयस्क शामिल हैं। घायलों को राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां उनका इलाज चल रहा है।
घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया
बचाव अभियान के दौरान टीमों ने मलबे में दबे लोगों को एक-एक करके बाहर निकाला। इसके लिए भारी मशीनों के साथ हाथ से भी मलबा हटाया गया।
इसके अलावा, एंबुलेंस को घटनास्थल के पास तैयार रखा गया था। घायल लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल भेजा गया।
हादसे में चार लोगों की मौत
शुरुआत में तीन लोगों की मौत की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद गुरुवार सुबह एक और शव मिलने से मृतकों की संख्या चार हो गई।
मृतकों में एक गर्भवती महिला और बच्चे भी शामिल हैं। 21 वर्षीय गुलफसा करीब चार महीने की गर्भवती थीं। उन्हें मलबे से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया था, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
एक करीब 12 साल की बच्ची और एक छोटे बच्चे की भी जान गई। इन दोनों की पहचान की प्रक्रिया चल रही थी। बाद में मलबे से एक और शव बरामद हुआ।
मलबे में फंसी गर्भवती महिला ने मांगी थी मदद
हादसे की सबसे दर्दनाक जानकारी गुलफसा से जुड़ी है। रिपोर्ट के अनुसार, वह इमारत की दूसरी मंजिल के बाथरूम में फंस गई थीं।
मलबे में दबे होने के बावजूद वह होश में थीं। उन्होंने अपने रिश्तेदार को फोन कर बताया कि वह अंदर फंसी हैं। उन्होंने पानी की जरूरत भी बताई थी।
इसके बाद परिवार ने बचाव टीम को उनकी लोकेशन बताई। टीम ने काफी सावधानी से मलबा हटाया। उन्हें बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।
भूकंप के बाद इमारत में आई थीं दरारें
इस हादसे के बाद इमारत की हालत को लेकर एक अहम जानकारी सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार को दिल्ली में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे।
इसके बाद इमारत में दरारें आने की बात सामने आई। स्थानीय लोगों ने भी दावा किया कि भूकंप के बाद भवन में नुकसान दिखाई दिया था।
हालांकि, इमारत गिरने की अंतिम वजह अभी आधिकारिक रूप से तय नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल भूकंप को हादसे का सीधा कारण मानना सही नहीं होगा।
मामले की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इमारत किन वजहों से गिरी। प्रशासन अब मलबे की स्थिति और भवन की संरचना की भी जांच कर रहा है।
इमारत की संरचना को लेकर भी सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, यह इमारत करीब 25 वर्ग गज के छोटे प्लॉट पर बनी थी। अधिकारियों ने इसके निर्माण और संरचना को लेकर भी जानकारी जुटाई है।
जागरण की रिपोर्ट में बताया गया कि मकान में पिलर नहीं थे। आसपास के कुछ अन्य मकानों में भी इसी तरह की स्थिति सामने आने की बात कही गई है।
हालांकि, भवन के निर्माण में किस स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ, यह जांच का विषय है। इसलिए अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
मौके पर कई एजेंसियां चला रही हैं रेस्क्यू ऑपरेशन
हादसे के बाद कई एजेंसियों ने संयुक्त रूप से बचाव अभियान शुरू किया। इनमें दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस, एमसीडी और एनडीआरएफ की टीमें शामिल हैं।
इसके अलावा, दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और सीएटीएस की टीमें भी राहत कार्य में लगी हैं। भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है।
मलबे में अभी भी तलाश जारी
अधिकारियों के अनुसार, मलबे का बड़ा हिस्सा हटाया जा चुका है। फिर भी किसी व्यक्ति के फंसे होने की संभावना को देखते हुए तलाश जारी रखी गई।
स्थानीय लोगों ने भी बचाव अभियान में मदद की। हादसे के बाद आसपास की सड़कों पर भीड़ बढ़ गई। इसलिए पुलिस ने लोगों से घटनास्थल से दूर रहने की अपील की।
सीमापुरी हादसे ने फिर उठाए सुरक्षा पर सवाल
दिल्ली सीमापुरी इमारत हादसा ऐसे समय हुआ है, जब राजधानी में भवन गिरने की घटनाएं पहले भी सामने आई हैं। सितंबर में सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत ढह गई थी।
उस हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद पुरानी और कमजोर इमारतों की जांच को लेकर प्रशासन ने सख्ती की बात कही थी।
इसी वजह से सीमापुरी की घटना ने एक बार फिर भवन सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। खासकर घनी आबादी वाले इलाकों में पुराने और कमजोर मकानों की नियमित जांच जरूरी मानी जाती है।
हालांकि, सीमापुरी की इमारत गिरने के मामले में जांच अभी पूरी नहीं हुई है। इसलिए किसी व्यक्ति या विभाग पर जिम्मेदारी तय करना जल्दबाजी होगी।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल बचाव अभियान का मुख्य लक्ष्य मलबे में किसी अन्य व्यक्ति की तलाश करना है। इसके साथ ही घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है।
दूसरी ओर, प्रशासन इमारत गिरने की वजह का पता लगाने में जुटा है। भवन की संरचना, निर्माण और संभावित नुकसान से जुड़े पहलुओं की जांच की जाएगी।
जांच पूरी होने के बाद हादसे की असली वजह सामने आने की उम्मीद है। इसके बाद नियमों के उल्लंघन या किसी अन्य जिम्मेदारी पर आगे की कार्रवाई तय हो सकती है।
निष्कर्ष
दिल्ली सीमापुरी इमारत हादसा बेहद दर्दनाक घटना है। हादसे में चार लोगों की मौत हुई है, जबकि 11 लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया है। कई घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है।
फिलहाल राहत और बचाव कार्य जारी है। प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों की तलाश और घायलों को उपचार उपलब्ध कराना है। वहीं, इमारत गिरने की असली वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

