एमपी के 56 लाख स्कूली बच्चों को जल्द मिलेंगे ₹600, यूनिफॉर्म खरीदने के लिए सीधे बैंक खातों में आएगी राशि
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों के लिए अहम खबर है। एमपी स्कूली बच्चों को 600 रुपये देने की योजना को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। इसके तहत कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को स्कूल यूनिफॉर्म खरीदने के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी।
सरकार प्रत्येक पात्र विद्यार्थी के लिए 600 रुपये सीधे बैंक खाते में भेजेगी। यह राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी के माध्यम से मिलेगी। सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए इस योजना पर करीब 348.07 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी दी है। इससे अभिभावकों को बच्चों की यूनिफॉर्म खरीदने में मदद मिलेगी।
हालांकि, राशि खाते में पहुंचने की तारीख और भुगतान की प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी का इंतजार करना होगा। अभिभावकों को फिलहाल बैंक खाते और उससे जुड़ी जरूरी जानकारी सही रखने पर ध्यान देना चाहिए।
कैबिनेट ने ₹348.07 करोड़ के बजट को दी मंजूरी
मध्य प्रदेश सरकार ने 29 सितंबर 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में यूनिफॉर्म सहायता राशि को लेकर फैसला लिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म खरीदने के लिए आर्थिक सहायता मिलेगी।
सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कुल 348.07 करोड़ रुपये का प्रावधान मंजूर किया है। यह राशि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए निर्धारित की गई है। प्रत्येक पात्र विद्यार्थी को 600 रुपये देने की योजना है।
इस फैसले से उन परिवारों को राहत मिल सकती है, जिन्हें बच्चों की पढ़ाई के साथ कपड़ों और अन्य जरूरी सामान पर भी खर्च करना पड़ता है। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह सहायता उपयोगी होगी।
कितने विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ?
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक पढ़ने वाले लगभग 58 लाख विद्यार्थियों को इस योजना में शामिल किया गया है। उपलब्ध शैक्षणिक आंकड़ों के अनुसार, इन कक्षाओं में विद्यार्थियों की संख्या 56.62 लाख से अधिक है।
विद्यार्थियों की संख्या और स्वीकृत लाभार्थियों के अंतिम आंकड़ों में अंतर हो सकता है। इसलिए अंतिम भुगतान सूची में पात्र बच्चों की सही संख्या स्पष्ट होगी।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य बच्चों को स्कूल की निर्धारित पोशाक उपलब्ध कराने में परिवारों की मदद करना है। इसके अलावा, सरकार चाहती है कि यूनिफॉर्म की व्यवस्था में होने वाली देरी से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
बैंक खाते में कैसे आएंगे यूनिफॉर्म के पैसे?
सरकार विद्यार्थियों को सहायता राशि देने के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी व्यवस्था अपनाएगी। इस प्रक्रिया में सरकारी सहायता सीधे लाभार्थी या उसके अभिभावक के बैंक खाते में भेजी जाती है।
इस व्यवस्था से राशि वितरण की प्रक्रिया आसान हो सकती है। साथ ही, अभिभावकों को यूनिफॉर्म खरीदने के लिए अलग से सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
हालांकि, राशि जारी होने से पहले विभाग को लाभार्थियों का रिकॉर्ड और बैंक से जुड़ी जानकारी सत्यापित करनी होगी। इसलिए अभिभावकों को अपने बच्चों की जानकारी स्कूल में सही दर्ज होने की पुष्टि करनी चाहिए।
अभिभावक इन बातों का रखें ध्यान
यूनिफॉर्म की राशि पाने के लिए अभिभावकों को कुछ जरूरी बातों पर ध्यान देना चाहिए।
- बच्चे का नाम स्कूल के रिकॉर्ड में सही होना चाहिए।
- समग्र आईडी की जानकारी सही और अद्यतन रखें।
- स्कूल में दर्ज बैंक खाते का विवरण जांच लें।
- बैंक खाते की सक्रिय स्थिति की पुष्टि करें।
- आधार और बैंक खाते से जुड़ी जानकारी में गलती हो, तो संबंधित बैंक या स्कूल से संपर्क करें।
ध्यान रहे कि ये सामान्य सावधानियां हैं। योजना के तहत आवश्यक दस्तावेजों और सत्यापन की अंतिम शर्तें शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुसार लागू होंगी।
इसके अलावा, अभिभावकों को भुगतान की स्थिति जानने के लिए स्कूल से संपर्क बनाए रखना चाहिए। केवल राशि मंजूर होने का अर्थ यह नहीं है कि पैसा सभी खातों में पहुंच चुका है।
सरकार ने सिली-सिलाई यूनिफॉर्म का फैसला क्यों बदला?
इस साल मध्य प्रदेश सरकार ने स्कूली बच्चों को यूनिफॉर्म देने की व्यवस्था में बदलाव किया था। जून 2026 में सरकार ने विद्यार्थियों को सिली-सिलाई यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने का फैसला लिया था। इसके लिए बड़े स्तर पर खरीद प्रक्रिया शुरू की गई।
इस योजना के तहत दो जोड़ी यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने की तैयारी थी। मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम ने 3 जून को लगभग 350 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया था। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर कानूनी अड़चन सामने आ गई।
जुलाई में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने टेंडर प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी। इसके चलते यूनिफॉर्म की खरीद और वितरण आगे नहीं बढ़ सका। मामला लंबा खिंचने से शैक्षणिक सत्र में विद्यार्थियों तक समय पर ड्रेस पहुंचाना मुश्किल होने लगा।
टेंडर में देरी से बढ़ी परेशानी
स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बाद यूनिफॉर्म की जरूरत बढ़ जाती है। बच्चों को नियमित कक्षाओं के साथ स्कूल की निर्धारित पोशाक भी चाहिए होती है। ऐसे में खरीद प्रक्रिया में देरी का असर विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों पर पड़ सकता है।
सरकार के सामने चुनौती थी कि विद्यार्थियों को समय पर यूनिफॉर्म कैसे उपलब्ध कराई जाए। यदि खरीद प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार किया जाता, तो वितरण में और समय लग सकता था।
इसी वजह से सरकार ने सीधे आर्थिक सहायता देने का रास्ता चुना। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म खरीदने के लिए राशि देने की व्यवस्था अपनाई जाएगी।
हालांकि, टेंडर प्रक्रिया से जुड़े विवाद और आपत्तियों को लेकर अंतिम कानूनी स्थिति को अलग विषय के रूप में देखना जरूरी है। केवल टेंडर रुकने से किसी व्यक्ति या संस्था पर लगे आरोप अपने आप साबित नहीं हो जाते।
पहले भी बदल चुकी है यूनिफॉर्म वितरण की व्यवस्था
मध्य प्रदेश में स्कूली यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने की व्यवस्था पहले भी कई बार बदली है। पहले विद्यार्थियों के अभिभावकों को कपड़ा खरीदने और यूनिफॉर्म सिलवाने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती थी।
बाद में सरकार ने सीधे तैयार यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने की व्यवस्था अपनाई। इसके पीछे उद्देश्य बच्चों को एक जैसी पोशाक देना और वितरण प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाना था।
हालांकि, अलग-अलग समय पर यूनिफॉर्म की गुणवत्ता, सही नाप और समय पर वितरण जैसी समस्याएं भी सामने आईं। कुछ मामलों में विद्यार्थियों तक पोशाक पहुंचने में देरी की शिकायतें हुईं।
इसके बाद सरकार ने फिर से बैंक खाते में राशि भेजने की व्यवस्था पर विचार किया। अब 2026-27 के शैक्षणिक सत्र के लिए डीबीटी मॉडल को मंजूरी मिल गई है।
नकद सहायता से अभिभावकों को क्या फायदा होगा?
सीधे बैंक खाते में राशि मिलने से अभिभावक अपनी जरूरत के अनुसार यूनिफॉर्म खरीद सकेंगे। वे बच्चे की सही नाप के हिसाब से कपड़ा या तैयार ड्रेस चुन सकते हैं।
इस व्यवस्था में स्थानीय दुकानदारों और दर्जियों से यूनिफॉर्म खरीदने का विकल्प भी खुला रहता है। इससे परिवार अपनी सुविधा के अनुसार खरीदारी कर सकते हैं।
दूसरी ओर, 600 रुपये में दो जोड़ी यूनिफॉर्म की पूरी लागत निकल पाएगी या नहीं, यह कपड़े की गुणवत्ता, बच्चे की उम्र और स्थानीय कीमतों पर निर्भर करेगा। इसलिए इसे पूरी लागत की गारंटी के बजाय सरकारी आर्थिक सहायता के रूप में समझना चाहिए।
सरकार के लिए भी इस मॉडल में खरीद, सिलाई, भंडारण और प्रदेशभर में वितरण की प्रक्रिया पर निर्भरता कम हो सकती है। हालांकि, योजना की वास्तविक सफलता समय पर भुगतान और सही लाभार्थियों तक राशि पहुंचने पर निर्भर करेगी।
राशि कब तक आएगी और भुगतान कैसे जांचें?
कैबिनेट ने राशि देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। लेकिन सभी विद्यार्थियों के खातों में पैसा जमा होने की निश्चित तारीख की पुष्टि जरूरी है। इसलिए अभिभावकों को भुगतान की तारीख को लेकर किसी अपुष्ट सूचना पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
शिक्षा विभाग की ओर से भुगतान प्रक्रिया शुरू होने पर स्कूलों के माध्यम से जरूरी जानकारी मिल सकती है। अभिभावक अपने बच्चे के स्कूल से पूछ सकते हैं कि लाभार्थी विवरण का सत्यापन पूरा हुआ है या नहीं।
पैसा जमा होने पर बैंक खाते का विवरण या बैंक की उपलब्ध सूचना सेवा देखकर इसकी पुष्टि की जा सकती है। यदि निर्धारित प्रक्रिया के बाद भी राशि नहीं मिलती, तो पहले स्कूल में दर्ज जानकारी की जांच कराएं।
इसके अलावा, किसी अनजान व्यक्ति को बैंक का ओटीपी, पिन या अन्य गोपनीय जानकारी न दें। सरकारी सहायता पाने के लिए ऐसी संवेदनशील जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा करना जरूरी नहीं है।
आगे क्या होगा?
अब योजना को जमीन पर लागू करने के लिए संबंधित विभाग को लाभार्थियों का विवरण सत्यापित करना होगा। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार राशि हस्तांतरित की जाएगी। भुगतान में किसी तरह की समस्या होने पर संबंधित अधिकारियों को रिकॉर्ड की जांच करनी होगी।
सरकार के सामने अगले शैक्षणिक सत्र के लिए भी यूनिफॉर्म की व्यवस्था समय पर तैयार करने की चुनौती रहेगी। इसके लिए खरीद प्रक्रिया, वितरण मॉडल और समयसीमा को लेकर स्पष्ट योजना बनाना जरूरी होगा।
यदि भुगतान समय पर होता है, तो अभिभावक बच्चों की जरूरत के अनुसार यूनिफॉर्म खरीद सकेंगे। साथ ही, स्कूलों में पोशाक की कमी से जुड़ी परेशानी कम करने में मदद मिल सकती है।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए सरकारी स्कूलों के कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म सहायता देने के लिए 348.07 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। योजना के तहत प्रत्येक पात्र विद्यार्थी को 600 रुपये देने का प्रावधान है।
एमपी स्कूली बच्चों को 600 रुपये देने का यह फैसला तैयार यूनिफॉर्म की खरीद प्रक्रिया में आई देरी के बाद लिया गया है। अब अभिभावकों को भुगतान की आधिकारिक तारीख और अपने बच्चे की पात्रता से जुड़ी जानकारी का इंतजार करना चाहिए।

