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रायपुर में 53 लाख रुपये की चोरी, गीजर, टीवी और खिलौनों में छिपाया कैश; दो आरोपी गिरफ्तार

रायपुर में गीजर, टीवी और खिलौनों में 53 लाख का कैश छिपाने वाले 2 शातिर चोर गिरफ्तार - News Critic

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 53 लाख रुपये की चोरी के मामले का पुलिस ने खुलासा किया है। एक कपड़ा कारोबारी की स्कूटी से नकदी से भरा बैग चोरी करने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर पूरी रकम बरामद करने की जानकारी दी है।

इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात नकदी छिपाने का तरीका है। आरोपियों ने कथित तौर पर चोरी के रुपये गीजर के अंदर, टीवी के पीछे और बच्चों के खिलौनों में छिपाकर रखे थे। पुलिस के अनुसार, वारदात के बाद दोनों आरोपी पहचान छिपाने के लिए रास्ते में कपड़े बदलते रहे। उन्होंने सीसीटीवी कैमरों से बचने के लिए अलग-अलग रास्तों का भी इस्तेमाल किया।

पुलिस ने मामले की जांच के दौरान आसपास के हजारों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिली। अब पुलिस उनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और चोरी की रकम से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।

रायपुर में कारोबारी की स्कूटी से कैसे चोरी हुए 53 लाख रुपये?

यह मामला रायपुर के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र का है। शैलेंद्र नगर निवासी किशोर बलवानी पंडरी कपड़ा बाजार में रेडीमेड कपड़ों की दुकान चलाते हैं। पुलिस के अनुसार, 9 अक्टूबर 2026 को वह अपनी स्कूटी से दुकान जाने के लिए निकले थे।

कारोबारी के पास सफेद कपड़े के बैग में 53 लाख रुपये रखे हुए थे। उन्होंने बैग को स्कूटी के सामने वाले पायदान पर रखा था। सुबह करीब 11:45 बजे वह कटोरा तालाब स्थित संत कंवर राम चौक के पास अप्पू पान ठेले पर रुके।

कारोबारी स्कूटी खड़ी करके पान खाने चले गए। इसी दौरान कथित तौर पर आरोपियों ने मौका देखकर स्कूटी से नकदी से भरा बैग निकाल लिया। जब कारोबारी वापस लौटे, तो बैग गायब था।

इतनी बड़ी रकम गायब होने से कारोबारी परेशान हो गए। इसके बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की। शिकायत मिलने पर सिविल लाइंस थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

एक सप्ताह तक कारोबारी की गतिविधियों पर रखी नजर

पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर वारदात से करीब एक सप्ताह पहले से कारोबारी की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे। वे उनके आने-जाने के समय और रोजमर्रा की दिनचर्या के बारे में जानकारी जुटा रहे थे।

जांच के अनुसार, आरोपियों को कारोबारी के घर से दुकान जाने के रास्ते की जानकारी थी। वे इस बात पर भी नजर रख रहे थे कि कारोबारी कब और कहां रुकते हैं। इसके बाद उन्होंने मौका देखकर नकदी से भरा बैग चोरी करने की योजना को अंजाम दिया।

इस तरह की वारदात में अपराधी अक्सर पीड़ित की गतिविधियों पर नजर रखते हैं। वे उस समय का इंतजार करते हैं, जब आसपास लोगों की निगरानी कम हो या पीड़ित कुछ देर के लिए अपने सामान से दूर हो जाए।

हालांकि, इस मामले में आरोपियों की योजना और उनकी भूमिका से जुड़ी जानकारी पुलिस की जांच पर आधारित है। आगे की कानूनी प्रक्रिया में साक्ष्यों के आधार पर ही सभी आरोपों का निर्धारण होगा।

हजारों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज से मिली अहम जानकारी

शिकायत के बाद पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच शुरू की। जांच का दायरा बढ़ाते हुए उन रास्तों की फुटेज भी देखी गई, जहां से आरोपी वारदात के बाद भागे होने की आशंका थी।

पुलिस को फुटेज में बिना नंबर प्लेट वाली पल्सर मोटरसाइकिल पर दो संदिग्ध दिखाई दिए। इसके बाद टीम ने अलग-अलग कैमरों की रिकॉर्डिंग का मिलान किया। संदिग्धों की गतिविधियों और उनके आने-जाने के रास्तों को जोड़कर जांच आगे बढ़ाई गई।

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए रास्ते में बार-बार कपड़े बदले थे। वे कैमरों की नजर से बचने के लिए अलग-अलग रास्तों का इस्तेमाल भी कर रहे थे।

इसके बावजूद कई स्थानों की फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों से जांच को दिशा मिली। पुलिस ने संदिग्धों की पहचान करने के बाद उन्हें हिरासत में लिया और पूछताछ शुरू की।

मनीष यदु और कमलेश कुशवाहा गिरफ्तार

इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनकी पहचान मनीष यदु, उम्र 39 वर्ष, निवासी डीडी नगर और कमलेश कुशवाहा, उम्र 36 वर्ष, निवासी टाटीबंध, रायपुर के रूप में बताई गई है।

पुलिस के अनुसार, दोनों से पूछताछ के दौरान चोरी की रकम छिपाने की जगहों के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद टीम ने उनकी निशानदेही पर अलग-अलग स्थानों पर तलाशी ली।

इस कार्रवाई में चोरी की पूरी 53 लाख रुपये की रकम बरामद किए जाने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा वारदात में इस्तेमाल की गई पल्सर मोटरसाइकिल और दो मोबाइल फोन भी जब्त किए गए।

पुलिस ने यह भी बताया कि चोरी की रकम का कुछ हिस्सा आरोपियों के तीन बैंक खातों में जमा कराया गया था। इन खातों को फ्रीज कराने की कार्रवाई की गई, ताकि उनमें मौजूद धनराशि का इस्तेमाल न किया जा सके।

गीजर, टीवी और बच्चों के खिलौनों में छिपाए थे रुपये

इस मामले में नकदी छिपाने का तरीका चर्चा का विषय बना हुआ है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने चोरी के रुपये एक ही जगह रखने के बजाय अलग-अलग स्थानों पर छिपाए थे।

कुछ नकदी गीजर के अंदर रखी गई थी। कुछ रुपये टीवी के पीछे छिपाए गए थे। वहीं, बच्चों के खिलौनों के भीतर भी नकदी छिपाकर रखी गई थी।

इस तरह रुपये छिपाने का कथित उद्देश्य चोरी की रकम को सामान्य तलाशी के दौरान आसानी से मिलने से बचाना था। हालांकि, पुलिस ने जांच के बाद इन स्थानों से नकदी बरामद कर ली।

पुलिस के अनुसार, पूरी रकम यानी 53 लाख रुपये बरामद किए गए हैं। वारदात में इस्तेमाल वाहन और मोबाइल फोन की जब्ती भी जांच के लिए महत्वपूर्ण है। इनसे आरोपियों की गतिविधियों और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की पड़ताल की जा सकती है।

दोनों आरोपियों का पहले भी रहा है आपराधिक रिकॉर्ड

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों का पहले भी आपराधिक मामलों से संबंध रहा है। मनीष यदु के खिलाफ पूर्व में मारपीट और जुआ अधिनियम से जुड़े मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

बताया गया है कि वह पहले जेल भी जा चुका है। इसके अलावा वर्ष 2012 में नकदी लूट से संबंधित झूठी शिकायत दर्ज कराने के मामले का भी उल्लेख किया गया है।

दूसरे आरोपी कमलेश कुशवाहा के खिलाफ भी पहले मारपीट का मामला दर्ज हुआ था। वह इस मामले में गिरफ्तार होकर जेल जा चुका है।

हालांकि, किसी व्यक्ति के पुराने मामलों का उल्लेख वर्तमान आरोपों का स्वतः प्रमाण नहीं होता। मौजूदा मामले में आरोपियों की भूमिका का निर्धारण उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।

पुलिस की कार्रवाई से चोरी के मामले में क्या सामने आया?

इस मामले में जांच के कई पहलू महत्वपूर्ण रहे। सबसे पहले घटनास्थल की जानकारी और कारोबारी की शिकायत के आधार पर जांच शुरू हुई। इसके बाद सीसीटीवी फुटेज की मदद से संदिग्धों की गतिविधियों का पता लगाने का प्रयास किया गया।

तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई। पूछताछ के बाद चोरी की रकम छिपाने के स्थानों की जानकारी मिली और पुलिस ने नकदी बरामद की।

इसके अलावा, कथित वारदात में इस्तेमाल वाहन और मोबाइल फोन भी जब्त किए गए। बैंक खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई से रकम के लेनदेन से जुड़े पहलुओं की जांच में मदद मिल सकती है।

अब यह भी जांच का विषय हो सकता है कि इस वारदात में किसी अन्य व्यक्ति ने मदद की थी या नहीं। पुलिस बरामद सामग्री और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की आगे की जांच कर रही है।

निष्कर्ष

रायपुर में 53 लाख रुपये की चोरी के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर बड़ी नकदी बरामद करने की जानकारी दी है। आरोप है कि दोनों ने कपड़ा कारोबारी की स्कूटी से बैग चोरी किया था। वारदात के बाद उन्होंने रुपये गीजर, टीवी के पीछे और बच्चों के खिलौनों में छिपा दिए थे।

पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की जांच और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का दावा किया है। मामले में नकदी के अलावा पल्सर मोटरसाइकिल और दो मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। अब आगे की जांच में आरोपियों की भूमिका, रकम के लेनदेन और संभावित अन्य संपर्कों से जुड़े पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा।

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