एशियाई पैरा खेलों में भारत का जलवा, आयुष वर्मा और प्रवीण कुमार ने जीता गोल्ड, बंटी को सिल्वर
एशियाई पैरा खेलों 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। बुधवार, 21 अक्टूबर को प्रवीण कुमार ने ऊंची कूद में खेलों के रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता। इसी स्पर्धा में भारत के बंटी ने रजत पदक हासिल किया। वहीं, आयुष वर्मा ने पुरुषों की शॉट पुट स्पर्धा में गोल्ड जीतकर देश की पदक तालिका में एक और स्वर्ण जोड़ा।
जापान के आइची-नागोया में आयोजित इन खेलों में भारतीय पैरा एथलीट लगातार पदक जीत रहे हैं। प्रवीण ने 2.05 मीटर की छलांग लगाकर नया गेम्स रिकॉर्ड बनाया। दूसरी ओर, आयुष ने शॉट पुट में 8.16 मीटर का थ्रो करके पहला स्थान हासिल किया। इन उपलब्धियों से भारतीय दल का उत्साह बढ़ा है।
प्रवीण कुमार ने रिकॉर्ड के साथ जीता गोल्ड
भारत के पैरा एथलीट प्रवीण कुमार ने पुरुषों की हाई जंप टी44/64 स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 2.05 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने एशियाई पैरा खेलों का नया रिकॉर्ड भी बनाया।
प्रवीण की यह उपलब्धि इसलिए खास है, क्योंकि उन्होंने प्रतियोगिता में लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हुए ऊंचाई पार की। उनकी 2.05 मीटर की छलांग ने उन्हें पहला स्थान दिलाया। इस जीत के साथ उन्होंने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता साबित की।
इस स्पर्धा में भारत के बंटी ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया। उन्होंने 1.92 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक जीता। यह बंटी का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। इस तरह भारत ने पुरुषों की हाई जंप स्पर्धा में पहले और दूसरे स्थान पर कब्जा किया।
उज्बेकिस्तान के तेमुरबेक गियाजोव ने 1.86 मीटर की छलांग के साथ कांस्य पदक हासिल किया। भारतीय खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन ने प्रतियोगिता में देश को दोहरी सफलता दिलाई।
बंटी ने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से जीता सिल्वर
बंटी के लिए यह रजत पदक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने 1.92 मीटर की छलांग लगाकर अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया। इस परिणाम से उन्होंने दिखाया कि भारतीय पैरा एथलेटिक्स में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की मजबूत मौजूदगी है।
हाई जंप में खिलाड़ियों को निर्धारित ऊंचाई पर लगी बार को बिना गिराए पार करना होता है। हर सफल प्रयास के बाद ऊंचाई बढ़ाई जा सकती है। प्रतियोगिता में खिलाड़ी की तकनीक, गति, संतुलन और शरीर पर नियंत्रण अहम भूमिका निभाते हैं।
पैरा एथलेटिक्स में खिलाड़ियों को उनकी शारीरिक स्थिति और जरूरतों के आधार पर अलग-अलग वर्गों में प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिलता है। टी44 और टी64 वर्ग के खिलाड़ियों को कुछ प्रतियोगिताओं में संयुक्त रूप से शामिल किया जाता है, ताकि प्रतिस्पर्धा के लिए पर्याप्त खिलाड़ी उपलब्ध रहें।
टी44 वर्ग में निचले अंगों से संबंधित कुछ शारीरिक सीमाओं वाले खिलाड़ी शामिल होते हैं, जबकि टी64 वर्ग में ऐसे खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा करते हैं जो निचले अंगों से जुड़ी स्थिति के कारण कृत्रिम पैर का इस्तेमाल करते हैं। वर्गीकरण का उद्देश्य खिलाड़ियों के बीच निष्पक्ष मुकाबले को बढ़ावा देना है।
प्रवीण और बंटी का एक ही स्पर्धा में गोल्ड और सिल्वर जीतना भारतीय खेल दल के लिए बड़ी उपलब्धि है। दोनों खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से देश को गौरवान्वित किया।
आयुष वर्मा ने शॉट पुट में लगाया गोल्डन थ्रो
भारतीय खिलाड़ी आयुष वर्मा ने पुरुषों की शॉट पुट एफ53 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में 8.16 मीटर का थ्रो किया। यही उनका सर्वश्रेष्ठ प्रयास रहा और उन्हें प्रतियोगिता में पहला स्थान मिला।
आयुष का मुकाबला ईरान के अलीरेजा हेमामी से रहा। हेमामी ने 8.09 मीटर का थ्रो करके रजत पदक जीता। कजाखस्तान के मखाम्बेट सेरिक्कलियेव ने 6.81 मीटर के प्रदर्शन के साथ कांस्य पदक हासिल किया।
आयुष और हेमामी के बीच मुकाबला बेहद करीबी रहा। दोनों के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन में केवल सात सेंटीमीटर का अंतर था। ऐसे मुकाबलों में हर प्रयास महत्वपूर्ण होता है और खिलाड़ी की तकनीक परिणाम बदल सकती है।
एफ53 वर्ग में ऐसे खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं, जिनके धड़ और पैरों की गतिविधियों पर काफी प्रभाव पड़ता है। इस स्पर्धा में खिलाड़ी बैठकर थ्रो करते हैं और शरीर के ऊपरी हिस्से की ताकत के सहारे गोला फेंकते हैं।
आयुष ने इससे पहले पुरुषों की जैवलिन थ्रो एफ53/एफ54 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था। शॉट पुट में गोल्ड जीतकर उन्होंने मौजूदा प्रतियोगिता में अपना दूसरा पदक हासिल किया। इस तरह उनके खाते में अब एक स्वर्ण और एक कांस्य पदक शामिल हो गया।
भारतीय पैरा एथलीटों का लगातार शानदार प्रदर्शन
एशियाई पैरा खेलों में भारत के खिलाड़ी विभिन्न स्पर्धाओं में पदक जीत रहे हैं। एथलेटिक्स के अलावा तीरंदाजी, बैडमिंटन, तैराकी और दूसरे खेलों में भी भारतीय खिलाड़ियों की भागीदारी है।
प्रवीण कुमार का रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण जीतना और बंटी का रजत हासिल करना हाई जंप में भारत की मजबूती दिखाता है। वहीं, आयुष वर्मा ने शॉट पुट में जीत दर्ज करके भारतीय दल के लिए एक और उपलब्धि जोड़ी।
इन खेलों में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ी लंबे समय तक प्रशिक्षण लेते हैं। उन्हें अपनी शारीरिक जरूरतों के अनुसार तकनीक विकसित करनी होती है। अभ्यास, फिटनेस, मानसिक तैयारी और प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन उनके प्रदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पैरा खेलों में सफलता खिलाड़ियों के संघर्ष और मेहनत को भी सामने लाती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि होती है। इसके लिए लगातार अभ्यास और प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन जरूरी है।
भारतीय खिलाड़ियों की ये उपलब्धियां देश में पैरा खेलों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी मदद कर सकती हैं। अधिक सुविधाएं, बेहतर प्रशिक्षण और प्रतिभाओं को शुरुआती स्तर पर अवसर मिलने से भविष्य में और खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच सकते हैं।
प्रवीण कुमार का अंतरराष्ट्रीय करियर भी रहा है शानदार
प्रवीण कुमार पहले भी बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उन्होंने टोक्यो 2020 पैरालंपिक खेलों में रजत पदक जीता था। इसके बाद पेरिस 2024 पैरालंपिक में उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया।
पेरिस पैरालंपिक में प्रवीण ने पुरुषों की टी64 हाई जंप स्पर्धा में 2.08 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड जीता था। अब एशियाई पैरा खेलों में रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीतना उनके करियर में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
उनकी सफलता युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन सकती है। हालांकि, हर प्रतियोगिता की परिस्थितियां अलग होती हैं और खिलाड़ियों को हर बार नए सिरे से प्रदर्शन करना पड़ता है। प्रवीण ने मौजूदा प्रतियोगिता में दबाव के बीच अच्छा प्रदर्शन करके अपनी क्षमता दिखाई।
बंटी के लिए भी यह प्रदर्शन आगे बढ़ने का अवसर है। व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ रजत पदक जीतना उनके लिए सकारात्मक उपलब्धि है। आने वाली प्रतियोगिताओं में वे अपने प्रदर्शन को और बेहतर बनाने का प्रयास कर सकते हैं।
आगे भी भारतीय खिलाड़ियों से पदकों की उम्मीद
एशियाई पैरा खेलों में प्रतियोगिताएं जारी हैं और कई भारतीय खिलाड़ी अलग-अलग स्पर्धाओं में हिस्सा ले रहे हैं। जैसे-जैसे मुकाबलों के परिणाम सामने आएंगे, भारत की कुल पदक संख्या में बदलाव होता रहेगा।
खेलों में पदक जीतना महत्वपूर्ण है, लेकिन खिलाड़ियों का व्यक्तिगत प्रदर्शन भी उतना ही अहम है। रिकॉर्ड बनाना, व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुभव हासिल करना उनके भविष्य के लिए उपयोगी होता है।
प्रवीण कुमार, बंटी और आयुष वर्मा की उपलब्धियों ने 21 अक्टूबर को भारतीय दल के लिए यादगार बना दिया। अब भारतीय प्रशंसकों की नजरें आने वाली स्पर्धाओं पर रहेंगी, जहां देश के खिलाड़ी पदक जीतने के लिए मैदान में उतरेंगे।
निष्कर्ष
एशियाई पैरा खेलों 2026 में भारत को प्रवीण कुमार और आयुष वर्मा के रूप में दो महत्वपूर्ण स्वर्ण पदक मिले। प्रवीण ने हाई जंप टी44/64 में 2.05 मीटर की छलांग लगाकर गेम्स रिकॉर्ड बनाया, जबकि बंटी ने 1.92 मीटर के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ रजत पदक जीता।
वहीं, आयुष वर्मा ने शॉट पुट एफ53 में 8.16 मीटर का थ्रो करके गोल्ड हासिल किया। इससे पहले वे जैवलिन थ्रो में कांस्य पदक भी जीत चुके हैं। भारतीय खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन देश के पैरा खेल अभियान के लिए उत्साहजनक है। अब प्रतियोगिता के अगले मुकाबलों में भी भारतीय दल से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।

