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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का छत्तीसगढ़ दौरा, रायपुर में ₹200 का स्मारक सिक्का करेंगी जारी; जगदलपुर के मुरिया दरबार में होंगी शामिल

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का छत्तीसगढ़ दौरा, रायपुर में 200 रुपये का स्मारक सिक्का जारी - न्यूज़ क्रिटिक

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का छत्तीसगढ़ दौरा 22 और 23 अक्टूबर को निर्धारित है। इस दौरान वे रायपुर और जगदलपुर में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगी। दौरे के पहले दिन रायपुर स्थित लोक भवन में पूज्य माता हासी देवी जी के सम्मान में ₹200 का स्मारक सिक्का जारी किया जाएगा। इसके अलावा, राष्ट्रपति नुआखाई पर्व के अवसर पर आयोजित सेवा सम्मान पर्व और युवा प्रबोधन कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगी।

दौरे के दूसरे दिन राष्ट्रपति जगदलपुर पहुंचेंगी। यहां वे बस्तर दशहरा के अवसर पर आयोजित ऐतिहासिक मुरिया दरबार में शामिल होंगी और सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करेंगी। राष्ट्रपति के इस प्रवास में धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों को प्रमुख स्थान दिया गया है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का छत्तीसगढ़ दौरा कब और कहां होगा?

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 22 से 23 अक्टूबर 2026 तक छत्तीसगढ़ में रहेंगी। उनके कार्यक्रम राजधानी रायपुर से शुरू होकर बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर तक पहुंचेंगे। इस दौरान वे स्मारक सिक्का जारी करने के साथ कई सार्वजनिक और सांस्कृतिक आयोजनों में भाग लेंगी।

22 अक्टूबर को रायपुर में जारी होगा ₹200 का स्मारक सिक्का

राष्ट्रपति दौरे के पहले दिन रायपुर स्थित लोक भवन में कार्यक्रम में शामिल होंगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, वे पूज्य माता हासी देवी जी के सम्मान में ₹200 मूल्यवर्ग का स्मारक सिक्का जारी करेंगी। यह इस दौरे के प्रमुख आयोजनों में से एक है।

स्मारक सिक्के किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति, ऐतिहासिक घटना या सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने के लिए जारी किए जाते हैं। इनका उद्देश्य संबंधित व्यक्तित्व या परंपरा के योगदान को व्यापक पहचान देना होता है। ऐसे सिक्के सामान्य मुद्रा से अलग स्मरण और संग्रह के महत्व के लिए भी जाने जाते हैं।

माता हासी देवी जी के सम्मान में सिक्का जारी होने से उनके जीवन और योगदान को पहचान मिलने की उम्मीद है। हालांकि, सिक्के की उपलब्धता, बिक्री और बुकिंग से जुड़ी जानकारी के लिए आधिकारिक घोषणा देखना जरूरी होगा।

कौन हैं माता हासी देवी जी, जिनके सम्मान में जारी होगा सिक्का?

पूज्य माता हासी देवी जी का नाम शदाणी दरबार की धार्मिक परंपरा से जुड़ा है। उनके सम्मान में स्मारक सिक्का जारी करने का कार्यक्रम इस परंपरा और उससे जुड़े समुदाय के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

धार्मिक और सामाजिक परंपराएं किसी समुदाय की पहचान को मजबूत करती हैं। इनके माध्यम से लोगों को अपनी विरासत, मान्यताओं और ऐतिहासिक योगदान को याद करने का अवसर मिलता है। स्मारक सिक्का जारी करना भी इसी तरह किसी व्यक्तित्व के सम्मान को प्रतीकात्मक रूप से प्रस्तुत करने का माध्यम है।

राष्ट्रपति की ओर से सिक्का जारी किए जाने से इस आयोजन को औपचारिक महत्व मिलेगा। हालांकि, सिक्के के डिजाइन, धातु, वजन और आम लोगों के लिए उपलब्धता जैसी तकनीकी जानकारियों को आधिकारिक विवरण के आधार पर ही समझना चाहिए।

रायपुर में सेवा सम्मान पर्व और युवा प्रबोधन कार्यक्रम

स्मारक सिक्का जारी करने के बाद राष्ट्रपति रायपुर में नुआखाई पर्व के अवसर पर आयोजित सेवा सम्मान पर्व और युवा प्रबोधन कार्यक्रम में शामिल होंगी। ये कार्यक्रम 22 अक्टूबर को निर्धारित हैं। इनके माध्यम से सामाजिक सेवा और युवाओं से जुड़े विषयों को प्रमुखता दी जाएगी।

नुआखाई पर्व का क्या है महत्व?

नुआखाई पश्चिमी ओडिशा और आसपास के क्षेत्रों में विशेष रूप से मनाया जाने वाला प्रमुख कृषि पर्व है। इस अवसर पर नई फसल के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है। परिवार और समुदाय एक साथ मिलकर परंपराओं का पालन करते हैं।

समय के साथ नुआखाई का सांस्कृतिक महत्व क्षेत्रीय सीमाओं से आगे भी दिखाई देने लगा है। दूसरे राज्यों में रहने वाले समुदाय भी इस पर्व के माध्यम से अपनी परंपराओं से जुड़े रहते हैं। छत्तीसगढ़ में आयोजित कार्यक्रम भी इसी सांस्कृतिक जुड़ाव को सामने लाते हैं।

युवा प्रबोधन कार्यक्रम पर भी रहेगी नजर

युवा प्रबोधन कार्यक्रम युवाओं से जुड़े विचारों और सामाजिक भागीदारी को महत्व देने वाला आयोजन है। ऐसे मंचों पर युवाओं की भूमिका, जिम्मेदारी और समाज के विकास में उनके योगदान जैसे विषयों पर चर्चा हो सकती है।

हालांकि, कार्यक्रम में होने वाली घोषणाओं या संबोधनों के बारे में पहले से अनुमान लगाना उचित नहीं होगा। राष्ट्रपति के वक्तव्य और कार्यक्रम से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही इसके प्रमुख बिंदुओं का आकलन किया जा सकेगा।

23 अक्टूबर को जगदलपुर पहुंचेंगी राष्ट्रपति

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे का दूसरा दिन बस्तर क्षेत्र के नाम रहेगा। 23 अक्टूबर को वे जगदलपुर में आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, वे मां दंतेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगी। इसके बाद बस्तर दशहरा के अवसर पर आयोजित मुरिया दरबार और सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होंगी।

जगदलपुर बस्तर संभाग का प्रमुख शहर है। यह क्षेत्र अपनी जनजातीय संस्कृति, विशिष्ट परंपराओं और ऐतिहासिक आयोजनों के लिए जाना जाता है। बस्तर दशहरा यहां की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

राष्ट्रपति की मौजूदगी में होने वाले कार्यक्रम से बस्तर की परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, इस दौरे में स्थानीय समुदायों और उनकी सांस्कृतिक विरासत पर भी ध्यान केंद्रित रहेगा।

क्या है मुरिया दरबार की परंपरा?

मुरिया दरबार बस्तर दशहरा से जुड़ी एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और सामाजिक परंपरा है। इसका संबंध बस्तर के जनजातीय समाज और स्थानीय शासन व्यवस्था के इतिहास से रहा है। पारंपरिक रूप से यह ऐसा मंच रहा है, जहां समुदाय के प्रतिनिधि अपनी बातें और समस्याएं सामने रखते थे।

बस्तर की सामाजिक व्यवस्था में स्थानीय समुदायों की भागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मुरिया दरबार इसी ऐतिहासिक परंपरा को दर्शाता है। समय के साथ इसकी परिस्थितियों और स्वरूप में बदलाव आया है, लेकिन सांस्कृतिक पहचान के रूप में इसका महत्व बना हुआ है।

बस्तर दशहरा से कैसे जुड़ा है मुरिया दरबार?

बस्तर दशहरा देश के विशिष्ट पारंपरिक उत्सवों में गिना जाता है। यह उत्सव अपनी लंबी अवधि और स्थानीय रीति-रिवाजों के लिए जाना जाता है। यहां दशहरा केवल रावण दहन तक सीमित नहीं है, बल्कि देवी आराधना, धार्मिक रस्मों और जनजातीय परंपराओं से भी जुड़ा है।

मुरिया दरबार इस उत्सव के महत्वपूर्ण आयोजनों में शामिल है। इसमें स्थानीय परंपराओं और सामाजिक सहभागिता की झलक देखने को मिलती है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का इस आयोजन में शामिल होना बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को विशेष पहचान देने वाला अवसर होगा।

राष्ट्रपति के दौरे का छत्तीसगढ़ के लिए क्या महत्व है?

राष्ट्रपति का दौरा किसी भी राज्य के लिए संवैधानिक और औपचारिक महत्व रखता है। इस प्रवास में अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों से जुड़े कार्यक्रम शामिल होने पर उनकी परंपराओं को व्यापक मंच मिलता है।

इस बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम में रायपुर का स्मारक सिक्का समारोह, नुआखाई से जुड़े आयोजन और जगदलपुर का मुरिया दरबार शामिल हैं। इससे दौरे का स्वरूप केवल प्रशासनिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहता, बल्कि धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं को भी स्थान मिलता है।

इसके अलावा, बस्तर की परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान, जनजातीय विरासत और ऐतिहासिक आयोजनों के बारे में अधिक लोगों को जानने का मौका मिल सकता है।

हालांकि, दौरे के प्रभाव का आकलन कार्यक्रमों के बाद सामने आने वाली जानकारियों के आधार पर ही किया जा सकेगा। किसी नई घोषणा या सरकारी निर्णय को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार करना जरूरी है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे का पूरा कार्यक्रम

राष्ट्रपति के दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे में रायपुर और जगदलपुर के कार्यक्रम प्रमुख हैं।

  • 22 अक्टूबर: रायपुर स्थित लोक भवन में पूज्य माता हासी देवी जी के सम्मान में ₹200 का स्मारक सिक्का जारी करेंगी।
  • 22 अक्टूबर: नुआखाई पर्व के अवसर पर आयोजित सेवा सम्मान पर्व और युवा प्रबोधन कार्यक्रम में शामिल होंगी।
  • 23 अक्टूबर: जगदलपुर स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगी।
  • 23 अक्टूबर: बस्तर दशहरा के अवसर पर मुरिया दरबार और सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होंगी।

इन कार्यक्रमों के जरिए राष्ट्रपति का दौरा धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजनों को जोड़ता है। रायपुर में स्मारक सिक्का जारी करने का कार्यक्रम और जगदलपुर में मुरिया दरबार की सहभागिता इस प्रवास के प्रमुख आकर्षण रहेंगे।

निष्कर्ष

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का छत्तीसगढ़ दौरा 22 और 23 अक्टूबर को रायपुर तथा जगदलपुर में आयोजित कार्यक्रमों पर केंद्रित है। रायपुर में पूज्य माता हासी देवी जी के सम्मान में ₹200 का स्मारक सिक्का जारी किया जाएगा। वहीं, नुआखाई पर्व के अवसर पर सेवा सम्मान पर्व और युवा प्रबोधन कार्यक्रम भी आयोजित होंगे।

दौरे के दूसरे दिन राष्ट्रपति जगदलपुर में मां दंतेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार में शामिल होंगी। इस तरह यह प्रवास छत्तीसगढ़ की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को सामने लाने वाला महत्वपूर्ण अवसर होगा।

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