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चक्रवात ‘अर्णव’ का अलर्ट: ओडिशा के 5 जिलों में स्कूल-कॉलेज बंद, 140 किमी/घंटा तक चलेंगी हवाएं

ओडिशा तट की ओर बढ़ता भीषण चक्रवात अर्णव, स्कूल कॉलेज बंद - News Critic

बंगाल की खाड़ी में चक्रवात ‘अर्णव’ तेजी से सक्रिय हो रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने इसके प्रभाव को लेकर आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा के तटीय इलाकों के लिए चेतावनी जारी की है। मौसम की गंभीरता को देखते हुए ओडिशा सरकार ने एहतियाती कदम तेज कर दिए हैं। राज्य के पांच जिलों में 28 और 29 अक्टूबर को स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रखने का फैसला लिया गया है।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, चक्रवात 28 अक्टूबर की सुबह आंध्र प्रदेश के तट से टकरा सकता है। इस दौरान हवा की रफ्तार 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटा रहने और झोंकों में 140 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने की आशंका है। इसके साथ कई इलाकों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। ऐसे में प्रशासन ने राहत, बचाव और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की तैयारी शुरू कर दी है।

ओडिशा के किन जिलों में स्कूल-कॉलेज रहेंगे बंद?

चक्रवात के संभावित प्रभाव को देखते हुए ओडिशा सरकार ने पांच संवेदनशील जिलों में शैक्षणिक संस्थान बंद रखने का फैसला किया है। इन जिलों में गंजाम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट और मलकानगिरी शामिल हैं।

सरकारी घोषणा के अनुसार, इन जिलों में 28 और 29 अक्टूबर को स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रहेंगे। यह फैसला बच्चों और कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है। तेज हवाओं और भारी बारिश के कारण सड़क परिवहन, बिजली आपूर्ति और सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है।

ओडिशा के अन्य जिलों में शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने का फैसला स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर संबंधित जिला कलेक्टर करेंगे। इसलिए पूरे राज्य में स्कूल-कॉलेज बंद होने की घोषणा नहीं की गई है। अभिभावकों और विद्यार्थियों को अपने जिले के प्रशासन की आधिकारिक सूचना पर ध्यान देना चाहिए।

140 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है हवा की रफ्तार

मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवात अर्णव बंगाल की खाड़ी के मध्य और पश्चिम-मध्य हिस्से में सक्रिय है। 26 अक्टूबर की सुबह यह प्रणाली चक्रवाती तूफान में बदल गई थी। इसके बाद इसके और शक्तिशाली होने की संभावना जताई गई है।

पूर्वानुमान के अनुसार, तूफान 27 अक्टूबर तक गंभीर चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है। इसके बाद इसके अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान में बदलने की आशंका भी जताई गई है। हालांकि, तूफान की वास्तविक तीव्रता और दिशा मौसम विभाग के अगले अपडेट पर निर्भर करेगी।

आईएमडी के अनुमान के मुताबिक, 28 अक्टूबर की सुबह आंध्र प्रदेश के बापटला और विशाखापत्तनम के बीच तट पर इसका प्रभाव सबसे ज्यादा पड़ सकता है। इस दौरान हवा की लगातार रफ्तार 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटा रह सकती है। वहीं, हवा के तेज झोंके 140 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकते हैं।

इतनी तेज हवाओं से पेड़ गिरने, बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त होने और कमजोर मकानों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। इसलिए तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को प्रशासन की सलाह का पालन करना चाहिए।

आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की संभावना

चक्रवात अर्णव का संभावित रास्ता आंध्र प्रदेश के तट की ओर बताया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, यह 28 अक्टूबर की सुबह बापटला और विशाखापत्तनम के बीच तट पार कर सकता है। इसके बाद इसका असर आसपास के इलाकों में भी दिखाई दे सकता है।

आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अनुमान है। कुछ स्थानों पर बहुत तेज बारिश होने की आशंका भी जताई गई है। इसके कारण निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है।

तूफान के आगे बढ़ने के बाद ओडिशा के दक्षिणी हिस्सों में भी बारिश और तेज हवाओं का असर रहने की संभावना है। हालांकि, मौसम विभाग के मौजूदा अनुमान के अनुसार, चक्रवात का मुख्य तटीय प्रभाव आंध्र प्रदेश में रहने की संभावना है।

ओडिशा सरकार ने इसी जोखिम को देखते हुए तैयारी बढ़ा दी है। प्रशासन का उद्देश्य है कि चक्रवात के दौरान जान-माल के नुकसान को कम किया जाए और जरूरत पड़ने पर लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए।

भारी बारिश को लेकर रेड अलर्ट

मौसम विभाग ने ओडिशा के कुछ दक्षिणी जिलों में अत्यधिक भारी बारिश की आशंका के कारण रेड अलर्ट जारी किया है। गंजाम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट और मलकानगिरी जैसे जिलों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

27 से 29 अक्टूबर के बीच अलग-अलग स्थानों पर भारी से अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। कुछ इलाकों में एक दिन में 20 सेंटीमीटर से अधिक बारिश होने की आशंका भी जताई गई है। पहाड़ी क्षेत्रों में तेज बारिश से भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है। वहीं, निचले इलाकों में पानी भरने और सड़कों का संपर्क टूटने की आशंका रहती है।

प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। निचले इलाकों और कमजोर मकानों में रहने वाले परिवारों पर खास ध्यान दिया जा रहा है।

लोगों को सलाह दी गई है कि वे मौसम संबंधी चेतावनियों को गंभीरता से लें। बिना जरूरत घर से बाहर निकलने और समुद्र या जलभराव वाले क्षेत्रों के पास जाने से बचना चाहिए।

राहत और बचाव के लिए टीमें तैयार

ओडिशा सरकार ने चक्रवात से निपटने के लिए राहत और बचाव व्यवस्था मजबूत की है। राज्य में ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ओडीआरएएफ), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), अग्निशमन विभाग और पुलिस की टीमों को तैयार रखा गया है।

प्रशासन ने संवेदनशील जिलों में बचाव दलों की तैनाती की है। जरूरत पड़ने पर इन टीमों को प्रभावित इलाकों में भेजा जाएगा। इसके साथ ही जिला और स्थानीय स्तर पर नियंत्रण कक्ष सक्रिय किए गए हैं, ताकि लोगों की शिकायतों और आपातकालीन सूचनाओं पर जल्द कार्रवाई हो सके।

राज्य सरकार ने संबंधित अधिकारियों को अपने मुख्यालय पर रहने के निर्देश भी दिए हैं। जरूरी सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द की गई हैं, ताकि आपदा के दौरान कामकाज प्रभावित न हो।

इसके अलावा, बिजली, सड़क और पेयजल जैसी जरूरी सेवाओं को जल्द बहाल करने की तैयारी की जा रही है। स्वास्थ्य केंद्रों को आवश्यक दवाएं और चिकित्सा सामग्री उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं।

मछुआरों और पर्यटकों के लिए विशेष निर्देश

चक्रवात की आशंका को देखते हुए समुद्र में मछली पकड़ने पर रोक लगाई गई है। मछुआरों को समुद्र में न जाने और पहले से समुद्र में मौजूद नौकाओं को सुरक्षित लौटने की सलाह दी गई है।

प्रशासन ने संवेदनशील जिलों में पहाड़ियों, झरनों, बांधों और अन्य पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की आवाजाही भी प्रतिबंधित की है। तेज बारिश के दौरान इन जगहों पर अचानक जलस्तर बढ़ने और फिसलन जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।

निचले इलाकों और कच्चे मकानों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित आश्रय स्थलों तक पहुंचाने की तैयारी है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांग लोगों की सुरक्षा के लिए भी विशेष व्यवस्था की जा रही है।

किसानों को भी अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए सतर्क रहने को कहा गया है। जो फसल लगभग पक चुकी है, उसे सुरक्षित काटकर रखने की सलाह दी गई है। इससे तेज बारिश और हवाओं के कारण संभावित नुकसान को कम किया जा सकता है।

लोगों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

चक्रवात के दौरान सबसे जरूरी है कि लोग मौसम विभाग और जिला प्रशासन की आधिकारिक चेतावनियों पर ध्यान दें। अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय प्रमाणित जानकारी के आधार पर निर्णय लेना चाहिए।

तटीय और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को प्रशासन की सलाह पर सुरक्षित स्थानों पर जाना चाहिए। घर में पीने का पानी, जरूरी दवाएं, टॉर्च, मोबाइल चार्जर और जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए। बिजली के तारों और गिरे हुए खंभों से दूरी बनाए रखना भी जरूरी है।

तेज हवा के दौरान पेड़ों, कमजोर दीवारों और होर्डिंग के पास खड़े होने से बचना चाहिए। समुद्र, नदियों और तेज बहाव वाले पानी के पास जाने से भी परहेज करना चाहिए।

यदि प्रशासन किसी इलाके को खाली करने का निर्देश देता है, तो लोगों को उसका पालन करना चाहिए। समय पर सावधानी बरतने से जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकता है।

निष्कर्ष

चक्रवात अर्णव को लेकर ओडिशा और आंध्र प्रदेश में सतर्कता बढ़ा दी गई है। ओडिशा के गंजाम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट और मलकानगिरी जिलों में 28 और 29 अक्टूबर को स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रहेंगे। मौसम विभाग ने तूफान के दौरान हवा के झोंके 140 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने और भारी बारिश की आशंका जताई है।

चक्रवात के 28 अक्टूबर की सुबह आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की संभावना है। इससे पहले प्रशासन ने राहत दलों को तैयार रखा है और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा उपाय तेज किए हैं। लोगों के लिए जरूरी है कि वे आधिकारिक मौसम अपडेट पर नजर रखें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

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